पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 11 / 66
यशायाह 11
1तब यिशै के ठूंठ में से एक अंकुर फूट निकलेगा, हां, उसकी जड़ में से एक शाखा निकलकर फलवन्त होगी।
2तब यहोवा का आत्मा, बुद्धि और समझ का आत्मा, युक्ति और पराक्रम का आत्मा वरन् ज्ञान और यहोवा के भय का आत्मा उस पर छाया रहेगा।
3और वह यहोवा का भय मानने में हर्षित होगा, और वह न तो मुंह देखा न्याय करेगा, और न कानों से सुनकर निर्णय लेगा;
4परन्तु वह कंगालों का न्याय धार्मिकता से, और पृथ्वी के पीड़ितों का न्याय खराई से करेगा; और वह पृथ्वी को अपने वचन-रूपी सोंटे से मारेगा; वह दुष्ट को अपने मुंह की फूंक से मिटा देगा।
5उसका कटिबन्ध धार्मिकता, और उसका कमरबन्द सत्य होगा।
6तब भेड़िया मेमने के संग रहेगा, और चीता बकरी के बच्चे के साथ लेटेगा, तथा बछड़ा, जवान सिंह और पाला हुआ बछड़ा, तीनों एक साथ रहेंगे; और एक छोटा लड़का उनकी अगुवाई करेगा।
7गाय और रीछनी भी एक साथ चरेंगी, उनके बच्चे एक साथ लेटेंगे, और सिंह बैल के समान भूसा खाया करेगा।
8दूध-पीता बच्चा करैत के बिल पर खेलेगा; दूध-छुड़ाया लड़का नाग के बिल में अपना हाथ डालेगा।
9मेरे सम्पूर्ण पवित्र पर्वत पर न तो कोई दुख देने वाला और न हानि पहुंचाने वाला होगा, क्योंकि पृथ्वी यहोवा के ज्ञान से ऐसी भर जाएगी जैसा समुद्र जल से भरा रहता है।
10उस दिन ऐसा होगा कि यिशै की जड़ जाति-जाति के लिए आश्रय बनेगी। वह जातियों के लिए झंडा ठहरेगी। और उसका विश्रामस्थान महिमामय होगा।
11उस दिन प्रभु दुबारा अपने हाथ से अपनी प्रजा के बचे हुए भाग अर्थात् बचे हुओं को अश्शूर, मिस्र, पत्तोस, कूश, एलाम, शिनार, हमात और समुद्र के द्वीपों से निकाल ले आएगा।
12और वह जाति-जाति के लिए एक झंडा ठहराएगा, इस्राएल के निर्वासितों को इकट्ठा करेगा तथा यहूदा के सब तितर-बितर लोगों को पृथ्वी की चारों दिशाओं से इकट्ठा करेगा।
13तब एप्रैम की डाह जाती रहेगी, और यहूदा को सताने वाले काट डाले जाएंगे; न तो एप्रैम यहूदा से डाह करेगा और न यहूदा एप्रैम को सताएगा।
14वे पश्चिम की ओर पलिश्तिी देश की ढलान पर झपटेंगे, और मिलकर पूर्वियों को लूटेंगे; वे एदोम और मोआब पर अधिकार कर लेंगे; और अम्मोनी उनके अधीन हो जाएंगे।
15यहोवा मिस्र के समुद्र की खाड़ी को सुखा डालेगा, वह महानद पर अपना हाथ बढ़ाएगा और प्रचंड लू चलाकर उसको सात धाराओं में बदल देगा और उसे ऐसा कर देगा कि लोग चप्पल पहने हुए भी उसे पार कर लेंगे।
16फिर उसकी प्रजा के बचे हुए लोगों के लिए अश्शूर से एक ऐसा राजमार्ग होगा जैसा मिस्र देश से निकल आने के समय इस्राएल के लिए हुआ था।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)