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पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 22 / 66

यशायाह 22

1दर्शन की घाटी के विषय में नबूवत। तुम्हें क्या हुआ कि तुम सबके सब मकानों की छतों पर चढ़ गए?

2हे नगरी, तू जो कोलाहल, और ऊधम से भरी तथा प्रसन्न नगरी थी, तेरे घात किए गए लोग न तो तलवार से और न ही युद्ध में मारे गए है।

3तेरे सब शासक एक साथ भाग गए, और बिना धनुष के ही बन्दी बना लिए गए। और जितने शेष बचे, यघपि वे बहुत दूर भाग गए थे, उन्हें खोज लिया गया, और एक साथ बन्दी बना लिया गया।

4इसलिए मैं कहता हूं, “अपनी दृष्टि मुझसे फेर लो मुझे फूट-फूटकर रोने दो। मेरी प्रजा की पुत्री के विनाश के कारण मुझे सांत्वना देने का प्रयत्न न करो।”

5क्योंकि सेनाओं के प्रभु यहोवा ने दर्शन की घाटी में आतंक, दमन और घबराहट, शहरपनाह के टूटने तथा पर्वतों से दुहाई देने का दिन ठहराया है।

6एलाम ने रथों, पैदल सेना तथा घुड़सवारों सहित तरकश उठा लिया है। कीर ने अपनी ढाल खोल ली है।

7तब तेरी उत्तम-उत्तम घाटियां रथों से भर गईं, घुड़सवारों ने फाटक पर मोर्चा बांध लिया।

8और उसने यहूदा की मोर्चाबन्दी को हटा दिया है। उस दिन तू वन-भवन के अस्त्र-शस्त्रें पर निर्भर था,

9और तूने दाऊदनगर में देखा कि शहरपनाह में कितनी दरारें हैं; और तूने निचले पोखरे में जल एकत्रित किया।

10तब तूने यरूशलेम के मकानों को गिना तथा शहरपनाह को सुदृढ़ बनाने के लिए अनेक मकान ढा दिए।

11तूने दो दीवारों के मध्य पुराने पोखरे के जल के लिए एक जलाशय बनाया, परन्तु तूने इसके कर्त्ता पर ध्यान नहीं दिया था और न ही तूने उसकी ओर दृष्टि की जिसने पूर्वकाल से ही इसे ठान रखा था।

12उस दिन, सेनाओं के प्रभु यहोवा ने तुमसे रोने पीटने, सिर मुंडाने और टाट ओढ़ने के लिए कहा।

13परन्तु यहां तो हर्ष और आनन्द मनाया जा रहा है, पशु काटे जा रहे हैं और भेड़ें वध की जा रही हैं, मांस खाया जा रहा है और मदिरापान हो रहा हैः “आओ, खाओ-पीयो क्योंकि कल तो मरना ही है।”

14परन्तु सेनाओं के यहोवा ने अपने आपको मुझ पर प्रकट कियाः “निश्चय ही तुम्हारा यह अधर्म तुम्हारी मृत्यु तक क्षमा न किया जाएगा।” सेनाओं के प्रभु यहोवा की यही वाणी है।

15सेनाओं का प्रभु यहोवा यों कहता है, “शेबना भंडारी के पास जा, जो राजघराने का प्रबन्धक है और उससे कह,

16‘तू जो ऊंचे स्थान पर कब्र खुदवाता और अपने लिए चट्टान में स्थान गढ़वाता है, तेरा यहां क्या काम, और यहां तेरा कौन है कि तूने अपनी कब्र यहां खुदवाई है?

17देख, हे मनुष्य, यहोवा तुझे सिर के बल फेंक देगा। वह तुझे कसकर पकड़ेगा,

18और मरोड़कर गेंद के समान जोर से एक लम्बे चौड़े देश में फेंक देगा; हे अपने स्वामी के घर को लज्जित करने वाले, वहां तू मरेगा और तेरे वैभवशाली रथ भी वहीं पड़े रहेंगे।’

19मैं तेरे पद से तुझे हटा दूंगा और तेरे स्थान से तुझे उतार डालूंगा।

20“उस दिन मैं हिल्कियाह के पुत्र अपने दास एल्याकीम को बुलाऊंगा,

21तेरा क्रुरता उसे पहनाऊंगा, तेरा कमरबन्ध उस पर कसकर बांधूंगा, तेरा अधिकार उसे दे दूंगा, और वह यरूशलेम के निवासियों तथा यहूदा के घराने का पिता ठहरेगा।

22तब मैं दाऊद के घराने की कुंजी उसके कंधे पर लाद दूंगा। जिसे वह खोलेगा उसे कोई बन्द न कर सकेगा, जिसे वह बन्द करेगा उसे कोई खोल न सकेगा।

23मैं उसे एक सुदृढ़ स्थान में खूंटी के समान गाडूं़गा और वह अपने पिता के घराने के लिए महिमा का आधार होगा।

24अतः वे उस पर अपने पिता के घराने का सारा वैभव अर्थात् वंश और सन्तान, हां, कटोरों से सुराहियों तक सब छोटे-छोटे पात्र, टांग देंगे।”

25सेनाओं का यहोवा यों कहता हैः “उस दिन, वह खूंटी जो सुदृढ़ स्थान में गाड़ी गई थी, उखड़ जाएगी, यहां तक कि वह टूट कर गिर जाएगी, और उस पर लदा हुआ भार नष्ट हो जाएगा, क्योंकि यहोवा की यही वाणी है।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)