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पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 26 / 66

यशायाह 26

1उस दिन यहूदा देश में यह गीत गाया जाएगाः “हमारा एक दृढ़ नगर है; परमेश्वर का उद्धार ही उस नगर की दीवारें और परकोटे ठहरा है।

2फाटकों को खोलो कि एक धर्मी जाति अर्थात् सच्चाई का पालन करने वाली जाति प्रवेश करे।

3जिसका मन तुझमें लगा है, उसकी शान्ति तेरे द्वारा पूरी बनी रहेगी, क्योंकि उसका भरोसा तुझ पर है।

4यहोवा पर सदा भरोसा रख, क्योंकि यहोवा परमेश्वर हमारी सनातन चट्टान है।

5उसने ऊंचे पर रहने वालों को अर्थात् अजेय नगरी को नीचा कर दिया है; वह उसे झुकाता और भूमि पर पटककर धूल में मिला देता है।

6पैरों से, हां दलितों के पैरों और असहायों के कदमों से वह रौंदा जाएगा।”

7धर्मी का मार्ग सीधा होता है। तू जो सच्चा है, धर्मी के मार्ग को समतल बना।

8हे यहोवा, हम तेरी विधियों के मार्ग में चलकर तेरी बाट जोहते आए हैं; तेरा नाम, हां, तेरा स्मरण ही हमारे मन की लालसा है।

9रात्रि के समय मैं मन से तेरी लालसा करता हूं, निश्चय ही मेरी अंतरात्मा तुझे यत्न से ढूंढ़ती है। जब पृथ्वी पर तेरे न्याय के कार्य प्रकट होते हैं तब जगत के निवासी धार्मिकता सीखते है।

10दुष्ट पर चाहे दया भी की जाए, वह धार्मिकता नहीं सीखेगा। खराई के देश में भी वह कुटिलता का व्यवहार करेगा, और यहोवा का प्रताप उसे सुझाई न देगा।

11हे यहोवा, तेरा हाथ उठा हुआ है फिर भी वे उसे नहीं देखते। वे प्रजा के लिए तेरी जलन को देखकर लज्जित होंगे। निश्चय ही तेरे शत्रुओं को आग भस्म करेगी।

12हे यहोवा, तू हमारे लिए शान्ति स्थापित करेगा, क्योंकि तू ही ने हमारे सब कामों को हमारे लिए किया है।

13हे हमारे परमेश्वर यहोवा, तेरे अतिरिक्त अन्य स्वामियों ने भी हम पर शासन किया, परन्तु केवल तेरे ही द्वारा हम तेरे नाम की बड़ाई करते है।

14ये मृतक फिर जीवित न होंगे, जिनकी आत्माएं कूच कर गईं वे पुनः जिलाए न जाएंगे। तूने तो उन्हें दण्ड देकर नष्ट किया और उनकी स्मृति को पूर्णतः मिटा दिया है।

15हे यहोवा, तूने जाति को बढ़ाया हैं, तूने जाति को बढ़ाकर अपनी महिमा प्रकट की है, तूने देश की सब सीमाओं को बढ़ाया है।

16हे यहोवा, दुख में वे तेरे खोजी बने। वे दबे स्वर से ही प्रार्थना कर सके क्योंकि तेरी प्रताड़ना उन पर बनी हुई थी।

17जब प्रसूता का प्रसवकाल निकट आता है तो वह प्रसव-पीड़ा से ऐंठ कर चिल्ला उठती है। हे यहोवा, तेरे सामने हमारी भी यही दशा थी।

18हमने भी गर्भधारण किया हमें भी प्रसव-पीड़ा हुई, पर हमने मानो वायु को ही जन्म दिया। हम जगत के लिए छुटकारे का कारण नहीं बन सके और न ही हमसे पृथ्वी के निवासी जन्मे।

19तेरे मृतक जीवित होंगे, उनके शव जीवित हो उठेंगे। तुम जो धूल में पड़े हो, जागो और जय-जयकार करो, क्योंकि तेरी ओस, भोर की ओस के समान है; पृथ्वी मृतकों को उगल देगी।

20आओ मेरे लोगो, अपने-अपने कमरों में प्रवेश करके किवाड़ों को बन्द कर लो। जब तक कोप शान्त न हो जाए थोड़ी देर अपने को छिपा रखो।

21क्योंकि देखो, यहोवा अपने स्थान से पृथ्वी के निवासियों को उनके अधर्म का दण्ड देने के लिए चला आ रहा है; तब पृथ्वी अपने ऊपर बहाए गए लहू को प्रकट करेगी, और घात किए हुओं को छिपा न रखेगी।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)