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पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 25 / 66

यशायाह 25

1हे यहोवा, तू मेरा परमेश्वर है। मैं तुझे सराहूंगा, मैं तेरे नाम का धन्यवाद करूंगा; क्योंकि तूने अद्भुत कार्य किए हैं, तूने प्राचीनकाल की योजनाएं सच्चाई से पूर्ण की है।

2क्योंकि तूने नगर को डीह और गढ़वाले नगर को खंडहर कर दिया। जो परदेशियों के लिए महल था वह अब नगर भी न रहा, उसका पुनर्निर्माण फिर कभी न होगा।

3इस कारण शक्तिशाली जाति तेरी महिमा करेगी, निष्ठुर देशों के नगर तेरा सम्मान करेंगे।

4क्योंकि तू असहायों के लिए रक्षक, संकट में पड़े दीन का सहायक, तूफान में शरण और धूप के समय छाया रहा है; क्योंकि निर्दयी का प्रहार उस तूफान के झोंके के समान है जो दीवार से टकराता है।

5जैसे जल को गर्मी सुखा देती है, वैसे ही तू विदेशियों के कोलाहल को शान्त कर देता है। जैसे बादल की छाया से गरमी कम हो जाती है वैसे ही निर्दयी के गीत शान्त कर दिए जाते है।

6सेनाओं का यहोवा इस पर्वत पर समस्त जातियों के लिए एक विशाल भोज का प्रबन्ध करेगा; इस भोज में पुरानी मदिरा, उत्तम से उत्तम चिकना भोजन तथा निथरी हुई पुरानी मदिरा होगी।

7और वह इसी पर्वत पर सब जातियों के लोगों पर पड़े पर्दे को, हां, सब देशों पर डाले गए घूंघट को हटा देगा।

8वह मृत्यु को सदा के लिए निगल लेगा, तथा प्रभु यहोवा सबके चेहरों से आंसू पोंछ डालेगा और अपनी प्रजा की निन्दा समस्त पृथ्वी पर से दूर करेगा; क्योंकि यहोवा ने ऐसा ही कहा है।

9उस दिन इस प्रकार कहा जाएगा, “देखो, यह हमारा परमेश्वर है जिसकी बाट हम जोहते आए हैं कि वह हमारा उद्धार करे। यही यहोवा है जिसकी हम बाट जोहते आए हैं: आओ, हम उसके किए हुए उद्धार के कारण आनन्द मनाएं और मग्न हो।”

10क्योंकि यहोवा का हाथ इस पर्वत पर सर्वदा बना रहेगा। जैसे पुआल घूरे के पानी में रौंदा जाता है वैसे ही मोआब अपने स्थान में रौंदा जाएगा।

11और वह उसमें अपने हाथ इस प्रकार फैलाएगा जैसे तैराक तैरने के लिए फैलाता है, परन्तु यहोवा उसके हाथों की चतुर युक्तियों तथा उसके गर्व दोनों को निष्फल कर देगा।

12और वह तुम्हारे अजेय किलों की दीवारों को झुका कर नीचा करेगा, वरन् भूमि पर पटककर मिट्टी में मिला देगा।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)