पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 30 / 66
यशायाह 30
1यहोवा की यह वाणी है, “उन विद्रोही बच्चों पर हाय, जो योजना तो बनाते हैं पर मेरी ओर से नहीं, और सन्धि तो करते हैं पर मेरे आत्मा की ओर से नहीं, कि पाप पर पाप करते जाए।
2जो मुझसे पूछे बिना मिस्र को जाया करते हैं कि फि़रौन की आड़ में शरण लें और मिस्र की छाया में सुरक्षा पाए।
3इसलिए फि़रौन की सुरक्षा तुम्हारे लिए लज्जा, और मिस्र की आड़ तुम्हारे लिए निन्दा का कारण होगी।
4उनके शासक तो सोअन में और उनके राजदूत हानेस में आ पहुंचे है।
5वे सब एक ऐसी जाति के कारण लज्जित होंगे जिससे उनका कुछ लाभ न होगा, वह न तो उनकी सहायता का और न उनके लाभ का परन्तु लज्जा और निन्दा का ही कारण होगी।”
6नेगेव के पशुओं के विषय में नबूवतः विपत्ति और वेदना के देश से होकर जहां सिंहनी और सिंह, नाग और उड़ने वाले सर्प पाए जाते हैं, वहां ये लोग अपनी धन-सम्पत्ति जवान गदहों पर और अपने ख़जाने ऊंटों के कूबड़ पर लाद कर ऐसे लोगों के पास जा रहे हैं जिनसे उनको लाभ न होगा,
7हां, मिस्र के पास जिसकी सहायता व्यर्थ और निकम्मी है, इसलिए मैंने उसे, “निकम्मी रहब” कहा है।
8अब जा, और इसको उनके सामने पटिये पर खोद और पुस्तक में लिख कि यह भविष्य के लिए सर्वदा की साक्षी ठहरे।
9क्योंकि यह तो बलवा करने वाली जाति है। ये झूठे पुत्र, हां, ऐसे पुत्र हैं जो यहोवा की आज्ञाओं को सुनना नहीं चाहते,
10वे दर्शियों से कहते हैं, “तुम दर्शन मत देखो,” और नबियों से कहते हैं, “नबूवत करके हमें सत्य न बताओ वरन् हमसे मीठी-मीठी बातें करो और मिथ्यापूर्ण नबूवत सुनाओ।
11मार्ग से हट जाओ, पथ को छोड़ दो, तथा इस्राएल के पवित्र के विषय में और कुछ मत सुनाओ।”
12इस कारण इस्राएल का पवित्र यों कहता है, “इसलिए कि तुमने इस वचन को तुच्छ जाना तथा अत्याचार और छल-कपट पर भरोसा रखा और उन्हीं पर विश्वास किया,
13अतः यह अधर्म तुम्हारे लिए दरार पड़ी उस दीवार के समान होगा जो गिरने पर है, एक ऊंची दीवार के उभार के सदृश, जो अचानक पल भर में ही टूटकर गिर पड़ेगी।
14और उसका ढह जाना कुम्हार के बर्तन के फूटने के समान होगा; वह ऐसा चकनाचूर होगा कि उसके टुकड़ों में से एक ठीकरा भी न मिलेगा जिससे चूल्हे में से आग ली जा सके अथवा हौद में से जल निकाला जा सके।”
15क्योंकि प्रभु यहोवा, इस्राएल का पवित्र यों कहता है, “लौट आने और भरोसा रखने में तुम्हारा उद्धार है, शान्त और निर्भर रहने में ही तुम्हारी वीरता है” परन्तु तुमने ऐसा न चाहा,
16और तुमने कहा, “नहीं, हम तो घोड़ों पर चढ़कर भागेंगे,” इसलिए तुम भागोगे! और तुमने कहा, “हम तो फुर्तीले घोड़ों पर सवार होंगे,” अतः तुम्हारा पीछा करने वाले भी फुर्तीले होंगे।
17एक ही की धमकी से एक हजार भाग खड़े होंगे। पांच की धमकी से तुम ऐसे भागोगे कि पर्वत की चोटी के झंडे तथा पहाड़ी की पताका के समान रह जाओगे।
18फिर भी यहोवा तुम पर अनुग्रह करने के लिए ठहरा रहता है, और स्वर्ग में प्रतीक्षा करता है कि तुम पर दया करे क्योंकि यहोवा न्यायी परमेश्वर है; क्या ही धन्य हैं वे सब जो उसकी आस लगाए रहते है।
19हे सिय्योन के लोगो, हे यरूशलेम के निवासियों, तुम फिर कभी न रोओगे। वह तुम्हारी दुहाई सुनकर तुम पर निश्चय ही अनुग्रह करेगा, वह सुनते ही उत्तर देगा।
20यघपि प्रभु ने तुम्हें कष्ट की रोटी और दुख का जल दिया, फिर भी तुम्हारा शिक्षक अधिक समय तक छिपा न रहेगा। परन्तु तुम अपनी आंखों से अपने शिक्षक को देखोगे।
21जब कभी दाहिने या बाएं मुड़ने लगो तो तुम्हारे कान पीछे से यह वचन सुनेंगे, “मार्ग यही है, इसी पर चलो।”
22तब तुम अपनी खुदी हुई मूर्तियों को जो चांदी से मढ़ी गईं, तथा ढली हुई मूर्तियों को जिन पर सोने का पत्तर चढ़ाया गया, अशुद्ध करोगे। तुम उन्हें अशुद्ध वस्तु के समान फेंक दोगे और उनसे कहोगे, “दूर हो जाओ!”
23तब वह खेत में बोए हुए तेरे बीज के लिए वर्षा तथा खेत की उपज से तुझे रोटी देगा और यह उत्तम तथा बहुतायत से होगी; उस दिन तुम्हारे पशुओं को लम्बा-चौड़ा चरागाह मिलेगा।
24और बैलों और गदहों को जिनसे तुम्हारी खेती-बारी होगी बेलचे और पांचे से मिलाया हुआ नमकीन चारा खाने को मिलेगा।
25उस महासंहार के दिन जब गुम्मट गिर पड़ेंगे, प्रत्येक ऊंचे पर्वत तथा ऊंची पहाड़ी पर पानी के सोते और झरने पाए जाएंगे।
26जिस दिन यहोवा अपनी प्रजा के घाव पर पट्टी बान्धेगा और अपने प्रकोप से लगी चोट को चंगा करेगा, उस दिन चन्द्रमा का प्रकाश सूर्य के प्रकाश जैसा तथा सूर्य का प्रकाश सात गुना अर्थात् सात दिन के प्रकाश के बराबर हो जाएगा।
27देखो, यहोवा का नाम दूर से चला आता है; उसका प्रकोप भड़का हुआ, और उसका धुआं अति सघन है। उसके होंठ रोष से भरे हैं और उसकी जीभ भस्म करने वाली अग्नि के समान है।
28उसकी श्वास उमंड़ने वाली ऐसी प्रचंड धारा के समान है जो गर्दन तक पहुंचती हो। वह जाति-जाति को छलनी में चोकर के समान छानेगा तथा उनके जबड़ों में ऐसी लगाम लगाएगा जो उन्हें विनाश की ओर ले जाएगी।
29तुम पर्व की रात का संगीत गाते रहोगे। और तुम्हारे हृदय ऐसे प्रफुल्लित रहेंगे जैसे उस मनुष्य का जो इस्राएल की चट्टान यहोवा के पर्वत पर चढ़ने के समय बांसुरी की धुन पर कूच करे।
30और यहोवा अपनी प्रतापी वाणी सुनाएगा और अपने भुजबल को अपने प्रकोप, भस्म करने वाली अग्नि, मूसलाधार वृष्टि, प्रचण्ड आंधी और ओलों में प्रकट करेगा।
31क्योंकि जब यहोवा उन्हें सोंटे लगाएगा तब उसकी वाणी से अश्शूर आतंकित होगा।
32यहोवा के दण्ड के सोंटे के प्रत्येक प्रहार पर डफ और वीणा बजेंगी, और वह हथियार चला चलाकर युद्ध में उनसे लड़ेगा।
33क्योंकि तोपेत तो पहले ही से तैयार किया गया है हां, वह राजा के लिए तैयार किया गया है। उसने उसे गहरा और लम्बा-चौड़ा बनाया है। चिता में लकड़ी के ढेर है। ज्वलनशील गन्धक के समान यहोवा का श्वास, उसे सुलगाएगा।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)