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पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 34 / 66

यशायाह 34

1हे जाति-जाति के लोगों, सुनने के लिए निकट आओ, और हे देश-देश के लोगों, ध्यानपूर्वक सुनो! पृथ्वी और जो कुछ उसमें है, जगत और जो कुछ उसमें उत्पन्न होता है, सब सुनें!

2यहोवा का कोप सब जातियों पर और उसका प्रकोप उनकी सब सेनाओं पर भड़क उठा है। उसने उनको सर्वनाश होने और संहार होने के लिए छोड़ दिया है।

3अतः उनके मारे हुए फेंक दिए जाएंगे तथा उनके शवों से दुर्गन्ध उठेगी, और उनके लहू से पर्वत डूब जाएंगे।

4आकाश के समस्त तारागण जीर्ण हो जाएंगे। आकाश खेर्रे के समान लपेटा जाएगा। जैसे दाखलता के पत्ते मुर्झा जाते हैं अथवा अंजीर के पत्ते झड़ जाते हैं वैसे ही समस्त तारागण जाते रहेंगे।

5क्योंकि मेरी तलवार आकाश में तृप्त हो चुकी है। देखो, अब वह न्याय करने को एदोम और उन लोगों पर जिनका विनाश करने की मैंने ठानी है, आ पड़ेगी।

6यहोवा की तलवार लहू से भर गई है और चर्बी से चिकनी हो गई है, हां, मेमनों और बकरों के लहू से तथा मेढ़ों के गुर्दों; की चर्बी से। यहोवा के लिए बोस्रा में एक बलि और एदोम देश में एक बड़ा संहार है।

7उनके साथ जंगली सांड़ और बछड़े तथा बैल वध होंगे, इस प्रकार उनकी भूमि रक्त-रंजित हो जाएगी और वहां की धूल चर्बी से चिकनी हो जाएगी।

8क्योंकि सिय्योन के लिए यहोवा ने प्रतिशोध का दिन और बदला चुकाने का वर्ष निश्चित किया है।

9उसकी नदियां राल में तथा उसकी मिट्टी गन्धक में बदल जाएंगी। उसकी भूमि जलती हुई राल बन जाएगी।

10वह रात-दिन न बुझेगी; उसका धुंआ सदा उठता रहेगा। युग युग तक वह उजाड़ पड़ा रहेगा, और कोई उसमें से होकर कभी न चलेगा।

11परन्तु हवासील और साही उसमें पाए जाएंगे, तथा उल्लू और कौवे उसमें बसेंगे। और वह उस पर उजाड़ की रेखा खींचेगा तथा खालीपन का साहुल तानेगा।

12उसके कुलीनों में ऐसा कोई नहीं जिसे वे राजा घोषित कर सकें, और वहां के सब शासक तुच्छ ठहरेंगे।

13उसके बुर्जों में कांटे तथा गढ़वाले नगरों में बिच्छू पौधे और भटकटैया उग आएंगे। वह गीदड़ों का अड्डा और शुतुर्मुर्गों का निवास बनेगा।

14जंगल के जन्तु भेड़ियों के साथ बसेंगे, रोआंर बकरे भी एक दूसरे को पुकारेंगे, हां, वहां लीलीत बस जाएगी और अपने लिए घर पाएगी।

15वहां मादा उल्लू घोंसला बनाकर अंडे देगी, और उनको अपनी सुरक्षा में सेकर बच्चे निकालेगी। हां, वहां चीलें अपने-अपने जोड़े के साथ इकट्ठी होंगी।

16यहोवा की पुस्तक से खोजकर पढ़ो; इनमें से एक भी न छूटेगा, कोई अपने जोड़े से अलग न रहने पाएगी। क्योंकि यह आदेश उसी के मुंह से निकला है और उसके आत्मा ने उनको एकत्रित किया है।

17उसी ने उनके लिए चिट्ठी डाली है और उसे अपने हाथ से डोरी डालकर उनके लिए बांट दिया है। वह सदा के लिए उनका ही बना रहेगा और वे पीढ़ी से पीढ़ी तक उसमें बसे रहेंगे।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)