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पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 35 / 66

यशायाह 35

1जंगल और निर्जन-प्रदेश आनन्दित होंगे तथा अराबा मग्न होकर फूले-फलेगा।

2केसर के समान उसमें ढेरों कलियां निकलेंगी। वह आनन्द के ऊंचे स्वर से हर्षित होगा और आनन्द मनाएगा। उसको लेबनोन की महिमा और कर्मेल तथा शारोन का वैभव दिया जाएगा। वे यहोवा की महिमा और हमारे परमेश्वर के ऐश्वर्य को देखेंगे।

3निर्बल हाथों को दृढ़ करो और थरथराते हुए घुटनों को स्थिर करो।

4घबराए हुओं से कहो, “हियाव बांधों डरो मत, देखो, तुम्हारा परमेश्वर पलटा लेने आएगा। परमेश्वर का प्रतिशोध आ पड़ेगा। वह तुम्हारा उद्धार करने आएगा।”

5तब अन्धों की आंखें खोली जाएंगी, तथा बहिरों के कान भी खोले जाएंगे।

6लंगड़ा उस समय हिरन के समान चौकड़ियां भरेगा, तथा गूंगा अपनी जीभ से जय-जयकार करेगा। क्योंकि जंगल में जल के सोते तथा अराबा में जल-धाराएं फूट निकलेंगी।

7सूखी भूमि ताल और प्यासी धरती जल का सोता बन जाएगी। जिस स्थान में सियार घूमते-फिरते हैं उसमें घास, नरकट और सरकंडे होंगे

8वहां एक सड़क अर्थात् राजमार्ग होगा और उसे “पवित्र मार्ग” कहा जाएगां अशुद्ध जन उस पर न चलने पाएगा; पर यह उन्हीं के लिए होगा जो उस मार्ग पर चलते हैं, मूर्ख तो उस पर पैर भी न रखने पाएंगे।

9न तो वहां सिंह होगा और न ही कोई हिंसक जन्तु उस पर चल जाएगा। ये सब वहां नहीं पाए जाएंगे, परन्तु जो छुड़ाए हुए हैं वे ही उस पर चलेंगे।

10यहोवा के छुड़ाए हुए लौटकर जय-जयकार करते हुए सिय्योन में आएंगे, उनका मुकुट अनन्तकाल का आनन्द होगा। वे हर्ष और आनन्द पाएंगे तथा शोक और आहें भरना दूर हो जाएगा।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)