पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 36 / 66
यशायाह 36
1हिजकिय्याह राजा के राज्य के चौदहवें वर्ष में ऐसा हुआ कि अश्शूर के राजा सन्हेरीब ने यहूदा के सब गढ़वाले नगरों पर चढ़ाई करके उनको ले लिया।
2और अश्शूर के राजा ने रबशाके को एक बड़ी सेना देकर लाकीश से यरूशलेम को हिजकिय्याह राजा के विरुद्ध भेज दिया। और वह जलाशय की ऊपरी नहर के समीप धोबियों के मैदान के मार्ग पर जा खड़ा हुआ।
3तब हिल्किय्याह का पुत्र एल्याकीम जो राजघराने का प्रबन्धक था, और शेब्ना मन्त्री तथा आसाप का पुत्र योआह जो इतिहास का लिखने वाला था, ये तीनों उसके पास बाहर निकल आए।
4तब रबशाके ने उनसे कहा, “हिजकिय्याह से कहो, ‘महाराजाधिराज अश्शूर का राजा यों कहता हैः तू किसका भरोसा किए हुए है?
5मेरा कहना है, “क्या मात्र मुंह से बातें बनाना ही युद्ध के लिए युक्ति और पराक्रम है?” अब तूने किस के बल पर मुझसे विद्रोह किया है?
6सुन, तू तो उस कुचले हुए नरकट अर्थात् मिस्र पर भरोसा रखे हुए है; यदि कोई उस पर टेक लगाए तो वह उसके हाथ में चुभकर छेद कर देगा। मिस्र का राजा फि़रौन तो उन सबके साथ ऐसा ही करता है जो उस पर भरोसा रखते है।
7परन्तु यदि तू मुझसे कहे कि हम तो अपने यहोवा परमेश्वर पर भरोसा रखते हैं, तो क्या यह वही पमरेश्वर नहीं जिसके ऊंचे स्थानों और वेदियों को हिजकिय्याह ने हटाकर यहूदा तथा यरूशलेम से कहा है कि तुम इसी वेदी के सामने दण्डवत किया करो?
8इसलिए अब आ, मेरे स्वामी अश्शूर के राजा के साथ यह सौदा कर लेः यदि तू अपनी ओर से उन पर सवार चढ़ा सके तो मैं तुझे दो हजार घोड़े दूंगा।
9फिर तू क्योंकर रथों और सवारों के लिए मिस्र पर भरोसा रखकर मेरे स्वामी के अधिकारियों में से छोटे से छोटे कर्मचारी को हरा सकेगा?
10तो क्या मैं यहोवा के कहे बिना इस देश को नष्ट करने आया हूं? यहोवा ने मुझसे कहा, “इस देश पर चढ़ाई करके इसे नष्ट कर दे।””
11तब एल्याकीम, शेब्ना और योआह ने रबशाके से कहा, “तू अपने दासों अर्थात् हम से अरामी भाषा में बात कर क्योंकि हम उसे समझते हैं; और शहरपनाह पर बैठे हुए लोगों के सुनते हमसे यहूदी भाषा में बात न करे।”
12परन्तु रबशाके ने कहा, “क्या मेरे स्वामी ने मुझे केवल तेरे स्वामी और तुझसे ही ये बातें करने को भेजा है, और उन लोगों से नहीं जो शहरपनाह पर बैठे हैं और जिन्हें तुम्हारे साथ अपनी विष्ठा खाना और अपना मूत्र पीना पड़ेगा?”
13तब रबशाके ने खड़े होकर यहूदी भाषा में ऊंचे शब्द से कहा, “महाराजाधिराज अश्शूर के राजा की बातें सुनो!
14राजा यों कहता हैः हिजकिय्याह तुम्हें धोखा न देने पाए, क्योंकि वह तुमको बचा न पाएगा;
15न ही हिजकिय्याह तुमको यह कहकर यहोवा का भरोसा दिलाने पाए कि निश्चय ही यहोवा हमें बचाएगा, यह नगर अश्शूर के राजा के हाथ में न जाने पाएगा।
16हिजकिय्याह की मत सुनो, क्योंकि अश्शूर का राजा यों कहता हैः मेरे साथ सन्धि कर लो और मेरे पास निकल आओ। तब तुम में से प्रत्येक जन अपनी दाखलता और अंजीर के वृक्ष से तब तक फल खाने पाएगा तथा अपने कुंड का जल पीने पाएगा,
17जब तक मैं आकर तुम्हें एक ऐसे देश में न ले जाऊं जो तुम्हारे ही देश के समान है, अर्थात् अनाज और नए दाखमधु का देश और रोटी और दाख की बारियों का देश है।
18हिजकिय्याह यह कहकर तुमको न बहकाने पाए कि यहोवा हमको छुड़ाएगा। क्या अन्य जातियों के देवताओं में से किसी ने अपने देश को अश्शूर के राजा के हाथ से बचाया है?
19हमात और अर्पाद के देवता कहां रहे? सपरवैम के देवता कहां रहे? क्या वे सामरिया को मेरेे हाथ से बचा पाए?
20इन देशों के सब देवताओं में से ऐसा कौन है जिसने अपने देश को मेरे हाथ से बचाया हो? फिर क्या यहोवा यरूशलेम को मेरे हाथ से बचाएगा?”
21परन्तु उन्होंने चुप रहकर उसके उत्तर में एक भी शब्द न कहा, क्योंकि राजा की यह आज्ञा थी कि उसको उत्तर न देना।
22तब हिल्किय्याह के पुत्र एल्याकीम ने जो राजघराने का प्रबन्धक था और शेब्ना मन्त्री तथा आसाप के पुत्र योआह ने जो इतिहास का लिखने वाला था, अपने वस्त्र फाड़े और हिजकिय्याह के पास जाकर रबशाके की बातें कह सुनाईं।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)