Loading account

पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 37 / 66

यशायाह 37

1जब राजा हिजकिय्याह ने यह सुना, तब वह अपने वस्त्र फाड़ तथा टाट ओढ़कर यहोवा के भवन में गया।

2तब उसने राजघराने के प्रबन्धक एल्याकीम और शेब्ना मन्त्री तथा याजकों के पुरनियों को जो सब टाट ओढ़े हुए थे, आमोस के पुत्र यशायाह नबी के पास भेजा।

3और उन्होंने उससे कहा, “हिजकिय्याह यों कहता है, ‘आज का दिन संकट, निन्दा और तिरस्कार का दिन है; बच्चे जन्मने पर हुए पर जन्म देने की शक्ति न रही।

4सम्भव है कि तेरे परमेश्वर यहोवा ने रबशाके की बातें सुनी होंगी जिसे उसके स्वामी अश्शूर के राजा ने जीवते परमेश्वर की निन्दा करने को भेजा था तथा जिन बातों को यहोवा परमेश्वर ने सुना है उनके लिए उसे झिड़के। इस कारण तू इन बचे हुओं के लिए जो रह गए हैं, प्रार्थना कर’।”

5अतः राजा हिजकिय्याह के कर्मचारी यशायाह के पास आए,

6और यशायाह ने उनसे कहा, “अपने स्वामी से कहो कि यहोवा यों कहता है; उन वचनों के कारण जो तूने सुने हैं, जिनके द्वारा अश्शूर के राजा के कर्मचारियों ने मेरी निन्दा की है भयभीत न हो।

7देख, मैं उसके अन्दर एक ऐसी भावना उत्पन्न करूंगा जिससे कि वह एक अफवाह सुनकर अपने देश को लौट जाए। और मैं उसको उसी के देश में तलवार से मरवा डालूंगा।”

8रबशाके ने सुना कि अश्शूर का राजा लाकीश से चला गया है। तब उसने लौटकर राजा को लिब्ना के विरुद्ध युद्ध करते पाया।

9जब इसने कूश के राजा तिर्हाका के विषय में यह सुना, कि वह मेरे विरुद्ध लड़ने को निकला है, तब उसने हिजकिय्याह के पास दूतों को यह कहकर भेजा,

10“तुम यहूदा के राजा हिजकिय्याह से यों कहना, ‘तेरा परमेश्वर जिस पर तू भरोसा रखता है, यह कहकर तुझे धोखा न दे, कि यरूशलेम अश्शूर के राजा के हाथ में नहीं पड़ेगा।

11देख, तूने तो सुना है कि अश्शूर के राजाओं ने सब देशों को पूर्णतः नष्ट करके उनके साथ क्या किया है। फिर क्या तू बच जाएगा?

12जब मेरे पूर्वजों ने गोजान और हारान तथा रेसेप में रहने वाली जातियों और तलस्सार में रहने वाले एदेनी लोगों को नष्ट किया तो क्या उनके देवताओं ने उन्हें बचा लिया?

13हमात का राजा, अर्पाद का राजा, सपरवैम नगर का राजा, और हेना तथा इव्वा के राजा, ये सब कहां गए?”

14तब हिजकिय्याह ने दूतों के हाथ से उस पत्री को लेकर पढ़ा, और यहोवा के भवन में जाकर यहोवा के सम्मुख उसे फैला दिया।

15और हिजकिय्याह ने यहोवा से यह कहकर प्रार्थना की,

16“हे सेनाओं के यहोवा, इस्राएल के परमेश्वर, तू जो करूबों के ऊपर विराजमान है, तू हां, तू ही पृथ्वी के सब राज्यों के ऊपर परमेश्वर है। तू ही ने आकाश और पृथ्वी को बनाया।

17हे यहोवा, कान लगाकर सुन, हे यहोवा, अपनी आंखें खोलकर देख और सन्हेरीब के इन सब वचनों को सुन ले जिन्हें उसने जीवते परमेश्वर की निन्दा करने को कहला भेजा है।

18हे यहोवा, सचमुच, अश्शूर के राजाओं ने तो सब देशों और उनकी भूमि को उजाड़ा है,

19और उनके देवताओं को आग में झोंका है, क्योंकि ये ईश्वर न थे परन्तु मनुष्यों के हाथों की कारीगरी अर्थात् लकड़ी और पत्थर ही थे। इसी कारण ये नष्ट हुए।

20और अब, हे हमारे परमेश्वर यहोवा, हमें उसके हाथ से बचा कि पृथ्वी के समस्त राज्य यह जान लें कि हे यहोवा, तू ही परमेश्वर है।”

21तब आमोस के पुत्र यशायाह ने हिजकिय्याह के पास यह वचन कहला भेजाः “इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है, इसलिए कि तूने अश्शूर के राजा सन्हेरीब के विषय में मुझसे प्रार्थना की है,

22उसके विरुद्ध यहोवा ने यह वचन कहा हैः सिय्योन की कुंवारी कन्या ने तुझे तुच्छ जाना है और तुझे ठट्टों में उड़ाया है, यरूशलेम की पुत्री ने तुझ पर सिर हिलाया है!

23तूने किसकी निन्दा की और किसे ठट्ठों में उड़ाया है? तूने किसके विरुद्ध बड़ा बोल बोला है, और घमंड से चढ़ी आंखें उठाई हैं? इस्राएल के पवित्र के विरुद्ध!

24तूने अपने कर्मचारियों के द्वारा प्रभु की निन्दा कराई और तूने कहा, ‘मैं अपने असंख्य रथों के साथ पर्वतों की ऊँचाइयों पर लेबनोन के दूरस्थ भागों में चढ़ आया हूं, मैं उसके ऊंचे-ऊंचे देवदारों तथा उत्तम-उत्तम सनौवरों को काट चुका हूं, और मैं उसकी ऊंची से ऊंची चोटी तथा उसके घने वनों तक पहुंच चुका हू।

25मैंने कुएं खुदवाकर पानी पीया और मिस्र की सब नदियों को अपने पैर के तलुवे से ही सुखा दिया।’

26क्या तूने नहीं सुना? पूर्वकाल से मैंने यही करने की ठानी और प्राचीनकाल से इसकी तैयारी की थी। अब मैंने तुझ से गढ़वाले नगरों को खंडहर ही खंडहर करवाकर इसे पूरा भी किया।

27इसी कारण उनके निवासी निर्बल हो गए, वे घबराए और लज्जित हुए; वे मैदान में उगने वाले पौधों तथा वनस्पति और छत पर उग आने वाली घास के समान हो गए जो बढ़ने के पहले ही मुर्झा जाती है।

28“परन्तु मैं तेरा उठना-बैठना, आना-जाना, और अपने विरुद्ध तेरे क्रोध को भी जानता हू।

29इसलिए कि तेरा क्रोध मेरे प्रति भड़का है और तेरे अहंकार की बातें मेरे कानों तक पहुंची हैं, मैं तेरी नाक में नकेल तथा तेरे होंठों में लगाम डालकर जिस मार्ग से तू आया है उसी मार्ग से तुझे लौटा दूंगा।

30“उस समय तेरे लिए यह चिह्न होगाः इस वर्ष तो तू वह खाएगा जो अपने आप उगता है, दूसरे वर्ष उसे जो इससे उत्पन्न हो, तथा तीसरे वर्ष बोएगा और काटेगा, दाख की बारियां लगाएगा, और उनके फल खाएगा।

31और यहूदा के घराने के बचे हुए लोग पुनः नीचे तो जड़ पकड़ेंगे तथा ऊपर फूलेंगे-फलेंगे।

32क्योंकि यरूशलेम में से शेष भाग अर्थात् सिय्योन पर्वत पर से बचे हुए लोग निकल आएंगे। सेनाओं के यहोवा की धुुन से यह होगा।

33इसलिए यहोवा अश्शूर के राजा के विषय में यों कहता है, कि न तो वह इस नगर में आने पाएगा और न ही वहां एक तीर चलाने पाएगा; न तो वह ढाल लेकर इसके सामने आएगा और न ही इसके विरुद्ध दमदमा बान्धने पाएगा।

34जिस मार्ग से वह आया है उसी से वह लौट भी जाएगा, और वह इस नगर में नहीं आने पाएगा, यहोवा की यही वाणी है।

35क्योंकि मैं इस नगर को अपने लिए और अपने दास दाऊद के निमित्त रक्षा करके बचाऊंगा।”

36तब यहोवा के दूत ने बाहर निकलकर अश्शूरियों की छावनी में एक लाख पचासी हजार को मौत के घाट उतार दिया। जब लोग तड़के सवेरे उठे तो क्या देखा कि ये सबके सब मरे पड़े है।

37इस प्रकार अश्शूर का राजा सन्हेरीब चला गया और लौटकर नीनवे में रहने लगा।

38और ऐसा हुआ कि जब वह अपने देवता निस्रोक के मन्दिर में पूजा कर रहा था तो उसके पुत्रों, अद्रम्मेलेक और शरेसेर ने उसे तलवार से मार डाला और वे अरारात देश में भाग गए। और उसका पुत्र एसर्हद्दोन उसके स्थान पर राजा बना।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)