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पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 38 / 66

यशायाह 38

1उन दिनों में हिजकिय्याह ऐसा रोगी हुआ कि मृत्यु के समीप पहुंच गया। और आमोस के पुत्र यशायाह नबी ने उसके पास आकर उससे कहा, “यहोवा यों कहता है; अपने परिवार की समुचित व्यवस्था कर ले, क्योंकि तू मर जाएगा, जीवित न बचेगा।”

2तब हिजकिय्याह ने दीवार की ओर मुंह फेरकर यहोवा से प्रार्थना की,

3और कहा, “हे यहोवा, मैं तुझसे विनती करता हूं, स्मरण कर कि मैं तेरे सामने सच्चाई और सम्पूर्ण मन से कैसे चला हूं और जो तेरी दृष्टि में ठीक है वही करता आया हू।” और हिजकिय्याह बिलख-बिलख कर रोया।

4तब यहोवा का यह वचन यशायाह के पास पहुंचाः

5“हिजकिय्याह से जाकर कह, कि तेरे पूर्वज दाऊद का परमेश्वर यहोवा यों कहता हैः मैंने तेरी प्रार्थना सुनी है, मैंने तेरे आंसुओं को देखा है। देख, मैं तेरे जीवन में पन्द्रह वर्ष और बढ़ा दूंगा।

6मैं अश्शूर के राजा के हाथ से तुझे और इस नगर को बचाऊंगा; और मैं इस नगर की रक्षा करूंगा।

7यहोवा अपने इस कहे हुए वचन को पूरा करेगा, यहोवा की ओर से इसका यह चिह्न होगाः

8“देख, धूप की छाया जो आहाज की धूपघड़ी में सूर्य के साथ-साथ ढल गई है, उसे मैं दस अंश पीछे लौटा दूंगा।” इस प्रकार सूर्य की जो छाया धूपघड़ी में ढल चुकी थी वह दस अंश पीछे लौट गई।

9यहूदा के राजा हिजकिय्याह का वह लेख जो उसने रोगी होने और चंगा होने के पश्चात् लिखा;

10मैंने कहा, “अपने जीवनकाल के बीच में ही मैं अधोलोक के फाटकों में प्रवेश करूंगा; मेरी आयु के शेष वर्ष मुझसे छीन लिए गए है।”

11मैंने कहा, “मैं याह को, हां, जीवितों के देश में याह को न देखने पाऊंगा; मैं इस लोक के निवासियों को फिर न देखने पाऊंगा।

12चरवाहे के तम्बू के समान मेरा निवास उखाड़कर मुझसे दूर किया जाता है; जुलाहे के समान मैंने अपने जीवन को लपेट लिया है। मुुझको तांत से काट डाला जाता है। दिन से रात तक तू मेरा अन्त कर डालता है।

13मैं सुबह तक अपने मन को शान्त करता रहा। सिंह के समान वह मेरी सब हड्डियों को तोड़ डालता है। दिन से रात तक तू मेरा अन्त कर डालता है।

14मैं अबाबील तथा सारस के समान च्यूं-च्यूं करता तथा फाख़ते के समान कराहता रहता हूं; मेरी आंखें ऊपर देखते-देखते पथरा गई हैं; हे यहोवा, मैं अत्यन्त पीड़ित हूं तू मेरा सहारा हो।

15“मैं क्या कहूं? क्योंकि उसी ने मुझसे कहा और उसे पूरा भी किया है। मैं अपने जीवन भर अपने प्राण की कड़वाहट के कारण मारा-मारा फिरूंगा।

16हे प्रभु, इन्हीं बातों से लोग जीवित रहते हैं, और इन्हीं सब बातों में मेरी आत्मा का जीवन है; तू ही मुझे चंगा कर जिससे कि मैं जी सकूं!

17देख, मेरी ही भलाई के लिए मुझे इतनी कड़वाहट मिली थी; पर तूने ही मेरे प्राण को विनाश के गड्हे से निकाला, क्योंकि तूने मेरे सब पापों को अपनी पीठ के पीछे फेंक दिया है।

18क्योंकि अधोलोक तेरा धन्यवाद नहीं कर सकता, न ही मृत्यु तेरी स्तुति कर सकती है। वे जो उस गड्हे में उतर जाते हैं तेरी सच्चाई की आशा नहीं रख सकते।

19जीवित हां, केवल जीवित ही तेरा धन्यवाद करता है, जैसा कि मैं आज कर रहा हू। पिता अपने पुत्रों को तेरी सच्चाई के विषय में बताता है।

20यहोवा निश्चय ही मुझे बचाएगा; अतः मेरी चंगाई के कारण हम अपने जीवन भर तारवाले बाजे बजा-बजाकर यहोवा के भवन में भजन करेंगे।”

21यशायाह ने तो कहा था, “अंजीरों की एक टिकिया बनाकर उसके फोड़े पर बान्धना कि वह चंगा हो जाए।”

22इस पर हिजकिय्याह ने पूछा था, “इस बात का क्या चिह्न है कि मैं यहोवा के भवन में जाऊंगा?”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)