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पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 5 / 66

यशायाह 5

1अब मैं अपने अतिप्रिय के लिए उसकी दाख की बारी के विषय में अपने प्रियतम का गीत गाऊंगा। मेरे अतिप्रिय की दाख की बारी एक उपजाऊ पहाड़ी पर थी।

2उसने चारों ओर मिट्ठी को खोदकर उसके कंकड़-पत्थरों को दूर किया, और उसमें उत्तम जाति की एक दाख लता लगाई, फिर उसके बीच में एक गुम्मट बनाया, और दाखरस के लिए एक कुंड भी खोदा; तब उसने अच्छे अंगूर प्राप्त करने की आशा की, परन्तु उसमें घटिया अंगूर ही मिले।

3हे यरूशलेम के निवासियों और यहूदा के लोगों, अब तुम ही मेरे और मेरी दाख की बारी में न्याय करो।

4मेरी दाख की बारी के लिए और क्या करना रह गया था, जो मैंने नहीं किया? और जब मैंने अच्छे अंगूर पाने की आशा की तो उसमें घटिया फल क्यों मिले?

5अब मैं तुम्हें बताता हूं कि मैं अपनी दाख की बारी से क्या करूंगाः मैं उसके बाड़े को हटा दूंगा कि वह नष्ट हो जाए; मैं उसकी दीवारों को ढा दूंगा कि वह रौंदी जाए।

6मैं उसको उजाड़ दूंगा; वह न तो छांटी और न ही गोड़ी जाएगी, पर उसमें झाड़ियां और कांटे उग आएंगे। मैं मेघों को भी आदेश दूंगा कि वे उस पर जल न बरसाए।

7सेनाओं के यहोवा की दाख की बारी तो इस्राएल का घराना है, और उसका मनभावन पौधा यहूदा के लोग है। उसने तो न्याय की आशा की, पर देखो, रक्तपात ही देखने को मिला; धार्मिकता की आशा की; परन्तु देखो, चीत्कार ही सुन पड़ी।

8उन पर हाय, जो घर से घर और खेत से खेत ऐसे मिलाते जाते हैं कि कोई स्थान शेष नहीं रहता, जिससे वे भूमि पर अकेले रहने पाए।

9सेनाओं के यहोवा ने मुझसे शपथ खाकर यह कहा, “निश्चय ही बहुत से घर उजड़ जाएंगे, यहां तक कि विशाल और अति सुन्दर घर भी निर्जन हो जाएंगे।

10क्योंकि दस बीघे दाख की बारी से एक ही बत दाखरस मिलेगा, और एक होमेर बीज से एक ही एपा अन्न उपजेगा।”

11हाय उन पर जो बड़े सवेरे उठकर मदिरा पीने लगते हैं, जो देर रात तक मदिरा पीते हैं कि उनको नशा चढ़ जाए!

12उनके प्रीतिभोजों में वीणा, सारंगी, डफ, बांसुरी और मदिरा पाए जाते हैं; परन्तु वे यहोवा के कार्यों पर ध्यान नहीं देते, और न ही वे उसके हाथ के कार्यों पर दृष्टि करते है।

13इसलिए मेरी प्रजा के लोग अपनी अज्ञानता के कारण बन्धुवाई में जाते हैं; उनके प्रतिष्ठित पुरुष भूखे मरते और उनके जनसाधारण प्यास से व्याकुल होते है।

14इसलिए अधोलोक ने अत्यन्त लालसा करके अपना मुंह बेपरिमाण पसारा है। यरूशलेम का वैभव, उसकी आमोद-प्रमोद करती भीड़ तथा आनन्द मनाने वाले सब लोग उसमें उतर जाते है।

15अतः साधारण मनुष्य दीन किया जाएगा तथा महत्वपूर्ण व्यक्ति झुकाया जाएगा, घमंडी की आंखें नीची की जाएंगी।

16परन्तु सेनाओं का यहोवा न्याय करने के कारण महान् ठहरेगा और पवित्र परमेश्वर धार्मिकता में अपने आप में पवित्र प्रमाणित करेगा।

17तब मेमने मानो अपने ही चरागाह में चरेंगे, तथा धनवानों के उजड़े स्थान में परदेशी खाने पाएंगे।

18हाय उन पर जो अधर्म को झूठ की रस्सियों से और पाप को मानो गाड़ी के रस्सों से खींचते हैं;

19जो कहते हैं, “वह फुर्ती करे और अपने कार्य को शीघ्र पूरा करे कि हम उसे देखें; तथा इस्राएल के पवित्र की योजना निकट आकर शीघ्र पूरी हो, कि हम उसे जाने।”

20हाय उन पर जो बुरे को भला और भले को बुरा कहते हैं, जो अन्धकार को प्रकाश और प्रकाश को अन्धकार ठहराते, जो कड़वे को मीठा और मीठे को कड़वा मानते हैं!

21हाय उन पर जो अपनी दृष्टि में बुद्धिमान और चतुर हैं!

22हाय उन पर जो दाखमधु पीने में वीर और मदिरा मिलाने में बहादुर हैं,

23जो घूस लेकर दुष्ट को निर्दोष ठहराते और निर्दोष को उसके अधिकार से वंचित कर देते हैं!

24इसलिए जैसे अग्नि-ज्वाला से खूंटी भस्म हो जाती और सूखी घास लपटों से नष्ट हो जाती है, वैसे ही उनकी जड़ सड़ जाएगी और उनकी कली धूल के समान उड़ जाएगी। क्योंकि उन्होंने सेनाओं के यहोवा की व्यवस्था का तिरस्कार किया तथा इस्राएल के पवित्र के वचन को तुच्छ जाना है।

25इसी कारण यहोवा का क्रोध उसकी प्रजा पर भड़क उठा और उसने उनके विरुद्ध हाथ बढ़ाया और उन पर प्रहार किया है। और पहाड़ कांप उठे, और लोगों की लाशें सड़कों के बीच कूड़ा-करकट सी पड़ी रही। इतने पर भी उसका क्रोध शान्त नहीं हुआ वरन् अब तक उसका हाथ बढ़ा हुआ है।

26वह दूर-दूर की जातियों के लिए झंडा खड़ा करेगा, और सीटी बजाकर उनको पृथ्वी के छोर से बुलाएगा। और देखो, वे फुर्ती करके वेग से आ जाएंगे।

27न कोई उनमें थकेगा न ठोकर खाएगा, न कोई ऊंघेगा और न सोएगा, न उनमें से किसी का कमरबन्ध ढीला होगा, और न उनके जूतों के बन्धन ही टूटेंगे।

28उनके तीर तेज और उनके धनुष चढ़े हुए होंगे। उनके घोड़ों के खुर वज्र के समान और उनके रथों के पहिये बवंडर के समान होंगे।

29उनकी गर्जन शेरनी के समान है, हां, वे जवान सिंह के समान दहाड़ते है। वे गुर्राकर अपने अहेर को दबोच लेते हैं और उसको ऐसे लेकर भागते हैं कि कोई उसे उनसे छुड़ा नहीं सकता।

30और उस दिन वे उस पर समुद्र की गर्जन के समान गरजेंगे। यदि कोई उस देश पर दृष्टि डाले तो देखो अन्धकार और विनाश ही दिखाई पड़ेगा, यहां तक कि प्रकाश मेघों से छिपा होगा।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)