पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 54 / 66
यशायाह 54
1“हे बांझ, तू जिसने पुत्र उत्पन्न नहीं किए, जय-जयकार कर; तू जिसे जच्चा-की-सी पीड़ा नहीं हुई, ऊंचे स्वर से जय-जयकार कर और जोर से पुकार; क्योंकि त्यागी हुई के लड़के सुहागिन के लड़कों से अधिक होंगे,” यहोवा की यही वाणी है।
2“अपने तम्बू का स्थान चौड़ा कर। तेरे निवास के पर्दे फैलाए जाएं, मत रुक। अपनी रस्सियों को लम्बी और अपनी खूंटियों को दृढ़ कर।
3क्योंकि तू दाहिने और बाएं फैलेगी, और तेरे वंशज जाति-जाति के अधिकारी होंगे, और वे इन उजाड़ नगरों को फिर से बसाएंगे।
4“मत डर, क्योंकि तू फिर अपमानित न होगी। हताश न हो, क्योंकि तू फिर लज्जित न होगी परन्तु अपनी जवानी की लज्जा को भ्ूाल जाएगी और अपने विधवापन के कलंक को फिर स्मरण न करेगी।
5क्योकि तेरा कर्ता ही तेरा पति है, जिसका नाम सेनाओं का यहोवा है। इस्राएल का पवित्र तेरा छुड़ाने वाला है, वह समस्त पृथ्वी का परमेश्वर कहलाता है
6क्योंकि यहोवा ने तुझे ऐसा बुलाया है मानो तू त्यागी हुई और मन में दुखी वरन् जवानी में त्यागी हुई पत्नी हो।” तेरे परमेश्वर की यही वाणी है।
7“क्षणभर के लिए मैंने तुझे त्याग दिया था, परन्तु अब बड़ी दया करके फिर तुझे रख लूंगा।
8अपने क्रोधावेश के कारण क्षण भर के लिए मैंने तुझसे मुख फेर लिया था, परन्तु अब अनन्त करुणा से मैं तुझ पर दया करूंगा।” तेरे छुड़ाने वाले यहोवा की यही वाणी है।
9“क्योंकि यह तो मेरे लिए नूह के दिनों के समान हैः जैसे मैंने शपथ खाई थी कि नूह के समय के समान जलप्रलय से पृथ्वी फिर न डूबेगी, वैसे ही मैंने यह शपथ खाई है कि न तो मैं तुझ पर क्रोधित होऊंगा और न ही तुमको झिड़कूंगा।
10चाहे पर्वत हट जाएं और पहाड़ियां टल जाएं, फिर भी मेरी करुणा तुझ पर से कभी न हटेगी, और शान्ति की मेरी वाचा न टलेगी।” यहोवा जो तुझ पर दया करता है उसकी यही वाणी है।
11“हे पीड़ित, तू जो आंधी-तूफान की मारी है और जिसे शान्ति नहीं दी गई, देख मैं तेरे पत्थरों को पच्चीकारी करके बैठाऊंगा और तेरी नींव नीलमणि से डालूंगा।
12यही नहीं, मैं तेरे परकोटों को माणिक्य से और तेरे नगरद्वार लालड़ियों से तथा तेरी शहरपनाह बहुमूल्य रत्नों से बनाऊंगा।
13तेरे सब वंशज यहोवा से शिक्षा पाएंगे, और उनको बड़ी शान्ति मिलेगी।
14तू धार्मिकता में स्थिर की जाएगी, तू अत्याचार से दूर रहेगी और भयभीत न होगी। तू आतंक से दूर रहेगी, वह तेरे निकट आने न पाएगा।
15यदि लोग तुझ पर अचानक टूट पड़ें तो यह मेरी ओर से न होगा। जो तुझ पर आक्रमण करेंगे वे तेरे कारण गिर पड़ेंगे।
16देख, लोहार को मैंने ही सृजा है जो कोयले की आग धधकाता और एक विशेष कार्य के लिए हथियार बनाता है। नष्ट करने वाले को भी मैंने नष्ट करने के लिए ही सृजा है।
17तेरी हानि के लिए बनाया कोई भी हथियार सफल न होगा, और जितनी भी जीभें तुझ पर दोष लगाएं तू उन्हें दोषी ठहराएगी। यहोवा के दासों का यही भाग होगा, और वे मेरे कारण निर्दोष ठहराए जाएंगे।” यहोवा की यही वाणी है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)