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पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 53 / 66

यशायाह 53

1हमारे संदेश का किसने विश्वास किया? और यहोवा का भुजबल किस पर प्रकट हुआ?

2क्योंकि वह उसके सामने कोमल अंकुर के समान और सूखी भूमि से निकली जड़ के समान उगा; उसमें न रूप था, न सौंदर्य कि हम उसे देखते, न ही उसका स्वरूप ऐसा था कि हम उसको चाहते।

3वह तुच्छ जाना गया और मनुष्यों का त्यागा हुआ था। वह दुखी पुरुष था और पीड़ा से उसकी जान पहचान थी। वह ऐसे मनुष्य के समान तुच्छ जाना गया जिससे लोग मुख फेर लेते हैं, और हमने उसका मूल्य न जाना।

4निश्चय उसने हमारी पीड़ाओं को आप सह लिया और हमारे दुखों को उठा लिया। फिर भी हमने उसे परमेश्वर का मारा-कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा।

5परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण बेधा गया, वह हमारे अधर्म के कामों के लिए कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिए उस पर ताड़ना पड़ी, उसके कोड़े खाने से हम चंगे हुए।

6हम तो सबके सब भेड़ों के समान भटक गए थे, हममें से प्रत्येक ने अपना-अपना मार्ग लिया, परन्तु यहोवा ने हम सबके अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया।

7वह सताया गया और उसे दुख दिया गया, फिर भी उसने अपना मुँह न खोला। जैसे मेमना वध होने के समय तथा भेेड़ अपने ऊन कतरने वाले के सामने शान्त रहती है, वैसे ही उसने भी अपना मुंह न खोला।

8अत्याचार करके और दोष लगाकर उसे ले जाया गया। और उस पीढ़ी के लोगों में से किसने इस पर ध्यान दिया कि वह जीव-लोक में से काट डाला गया? क्योंकि मेरे ही लोगों के अपराधों के कारण उस पर मार पड़ी।

9उसकी कब्र दुष्ट मनुष्यों के साथ ठहराई गई, फिर भी मृत्यु के समय वह धनवान का संगी हुआ, यघपि उसने किसी प्रकार का उपद्रव न किया था, और न उसके मुंह से कोई छल की बात निकली थी।

10फिर भी यहोवा को यही भाया कि उसे कुचले। उसी ने उसको पीड़ित किया यदि वह अपने आपको दोषबलि करके चढ़ाए तो वह अपना वंश देखेगा। वह बहुत दिन जीवित रहेगा और यहोवा की भली इच्छा उसके हाथ से पूरी हो जाएगी।

11अपनी मनोव्यथा के परिणाम स्वरूप वह उसे देखेगा और सन्तुष्ट होगा। अपने ज्ञान के द्वारा मेरा धर्मी दास बहुतों को धर्मी ठहराएगा, क्योंकि वह उनके अधर्म का बोझ आप उठा लेगा।

12इसलिए मैं उसे महान् लोगों के साथ भाग दूंगा, और वह सामर्थियों के संग लूट को बांट लेगा, क्योंकि उसने अपना प्राण मृत्यु के लिए उंडेल दिया, वह अपराधियों के संग गिना गया; फिर भी उसने बहुतों के पाप का बोझ स्वयं उठा लिया और अपराधियों के लिए विनती की।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)