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यशायाह 55:9

क्योंकि मेरे और तुम्हारे मार्गों में और मेरे और तुम्हारे सोच-विचारों में आकाश और पृथ्वी का अन्तर है।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)

संदर्भ: यशायाह 55

6जब तक यहोवा मिल सकता है तब तक उसकी खोज में रहो, जब तक वह निकट है तब तक उसे पुकारो।

7दुष्ट अपनी चाल-चलन और अनर्थकारी अपने सोच-विचार छोड़कर यहोवा की ओर फिरे, और वह उस पर दया करेगा, हां हमारे परमेश्वर की ओर, क्योंकि वह पूरी रीति से क्षमा करेगा।

8यहोवा कहता है, “मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं हैं, न ही तुम्हारे मार्ग और मेरे मार्ग एक जैसे है।

9क्योंकि मेरे और तुम्हारे मार्गों में और मेरे और तुम्हारे सोच-विचारों में आकाश और पृथ्वी का अन्तर है।

10जिस प्रकार आकाश से वर्षा और हिम गिरते हैं और पृथ्वी को सींचे बिना वापस नहीं जाते और भूमि को उपजाऊ और फलदाई बनाते हैं जिससे बोने वाले को बीज और खाने वाले को रोटी मिलती है,

11उसी प्रकार मेरे मुंह से निकलने वाला वचन होगा। वह व्यर्थ ठहरकर मेरे पास न लौटेगा, वरन् मेरी इच्छा पूरी करेगा और जिस काम के लिए मैंने उसको भेजा है उसे पूरा करके ही लौटेगा।

12क्योंकि तुम आनन्द के साथ निकलोगे और शान्ति के साथ तुम्हारी अगुवाई की जाएगी। तुम्हारे आगे-आगे पर्वत और पहाड़ियां गला खोलकर जय-जयकार करेंगी, और मैदान के सब वृक्ष आनन्द के मारे ताली बजाएंगे।

पूरा अध्याय पढ़ें: यशायाह 55

संबंधित पद

  • रोमियों 11:31–36

    इसी प्रकार अब वे भी अवज्ञाकारी हो गए, जिससे कि उस दया के कारण जो तुम पर की गई है, उन पर भी अब दया की जाए।

  • मत्ती 11:25

    उसी समय यीशु ने कहा, “हे पिता, स्वर्ग और पृथ्वी के प्रभु, मैं तेरी स्तुति करता हूँ कि तू ने ये बातें ज्ञानियों और बुद्धिमानों से छिपाकर रखीं और बच्चों पर प्रकट की है।

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