पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 63 / 66
यशायाह 63
1यह कौन है जो एदोम से, हां, बोस्रा से किरमिजी वस्त्र पहने हुए चला आता है, जिसकी वेश-भूषा ऐश्वर्यवान है और जो अपने महान् सामर्थ्य में चला आता है? “यह मैं हूं, जो धार्मिकता में बोलता और उद्धार करने में सामर्थी हू।”
2तेरी वेश-भूषा लाल क्यों है, और तेरे वस्त्र उसके जैसेे क्यों हैं जो हौद में दाख रौंदता हो?
3“मैंने तो अकेले ही हौद में दाख रौंदी है, और जाति-जाति के लोगों में से कोई भी मेरेे साथ न था। मैंने उन्हें अपने क्रोध में रौंदा और अपने प्रकोप में कुचला; उनके लहू के छींटे मेरे वस्त्रों पर पड़े हैं, इससे मेरी सम्पूर्ण पोशाक पर धब्बे पड़ गए।
4क्योंकि पलटा लेने का दिन मेरे मन में था, और मेरे लिए छुटकारा देने का समय आ पहुंचा है।
5मैंने दृष्टि की पर कोई सहायक न मिला, मैं चकित हुआ पर कोई सम्भालने वाला नहीं था; अतः मेरे लिए मेरी अपनी भुजा उद्धार का कारण ठहरी और मेरे ही प्रकोप ने मुझे सम्भाला।
6हां, मैंने अपने क्रोध में देश देश के लोगों को लताड़ा, और अपने प्रकाेप में उन्हें मतवाला किया, और उनका लहू भूमि पर बहा दिया।”
7यहोवा ने जितने उपकार हम पर किए अर्थात् इस्राएल के घराने के प्रति जो अत्यन्त भलाई उसने अपनी बड़ी दया के अनुसार की और जो अपार करुणा उसने की, इन सबके अनुसार मैं यहोवा की करुणा का वर्णन और यहोवा का गुणानुवाद करूंगा।
8क्योंकि उसने कहा, “निश्चय, ये मेरी प्रजा के लोग हैं, ऐसे वंशज हैं जो धोखा न देंगे।” अतः वह उनका उद्धारकर्ता हो गया।
9उनके सब दुखों में उसने भी दुख उठाया, और उसकी उपस्थिति के स्वर्गदूत ने उनका उद्धार किया। अपने प्रेम और अपनी दया में उसने उन्हें छुड़ाया, और उठाया, तथा वह प्राचीनकाल से उन्हें लिए फिरा।
10परन्तु उन्होंने बलवा करके उसके पवित्र आत्मा को खेदित किया, इस कारण वह पलटकर उनका शत्रु बन गया, वह स्वयं उनके विरुद्ध लड़ा।
11तब उसकी प्रजा ने प्राचीनकाल अर्थात् मूसा के दिनों को स्मरण किया। वह कहां है जो उनको अपने झुंड के चरवाहों के द्वारा समुद्र में से निकाल लाया? जिसने उनके मध्य अपना पवित्र आत्मा डाला,
12जिसने अपनी महिमामय भुजा को मूसा के दाहिने हाथ कर दिया, जिसने उनके सामने जल को दो भाग करके सदाकाल के लिए नाम कमाया,
13जिसने समुद्र की गहराइयों में से उनकी अगुवाई की, वह कहां है? जैसे जंगल में घोड़े को, वैसे ही उनको भी ठोकर न लगी।
14जैसे तराई में उतरने वाले पशु को विश्राम मिलता है, वैसे ही यहोवा के आत्मा ने उनको भी विश्राम दिया। तूने अपनी प्रजा की अगुवाई इस प्रकार की कि तेरा नाम प्रतापी हो गया।
15स्वर्ग से दृष्टि कर, तथा अपने पवित्र और महिमायुक्त निवासस्थान से देख! तेरे उत्साह और पराक्रम के कार्य कहां रहे? मेरे प्रति तेरे हृदय की उत्तेजना और करुणा रोक दी गई है।
16तू तो हमारा पिता है। चाहे इब्राहीम हमें न जाने, और इस्राएल हमें न पहचाने, हे यहोवा, तू हमारा पिता है। प्राचीनकाल से तू हमारा छुड़ाने वाला कहलाता आया है।
17हे यहोवा, तू अपने मार्गों से हमें क्यों भटका देता है, और हमारे हृदय ऐसे कठोर करता है कि हम तेरा भय नहीं मानते? अपने दासों, अपने निज भाग के गोत्रों के कारण लौट आ।
18तेरी पवित्र प्रजा तो थोड़े ही समय के लिए तेरे पवित्रस्थान की अधिकारी रही पर हमारे विरोधियों ने उसे कुचल डाला है।
19हम तो उनके समान हो गए हैं जिन पर तूने कभी प्रभुता नहीं की, और उनके समान जो तेरे नाम के कहलाए ही नही।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)