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पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 65 / 66

यशायाह 65

1जो मुझे पूछते भी न थे, उनको मैंने अपने खोजी बनने दिया। जो मुझे खोजते भी न थे उनसे मैं मिला। जिस जाति ने मुझे नाम लेकर नहीं पुकारा उससे मैंने कहा, “मैं यहां हूं, यहा।”

2मैं एक विद्रोही प्रजा के लोगों की ओर दिन भर हाथ फैलाए रहा, जो अपनी ही इच्छा से ऐसे मार्ग पर चलते हैं जो ठीक नहीं

3एक ऐसी जाति जो मेरे सामने ही पूजा-उघान में बलि चढ़ा-चढ़ाकर और ईंटों पर धूप जला-जलाकर लगातार मुझे क्रोध दिलाती है;

4जो कब्रों के मध्य बैठते और गुप्त स्थानों में रात बिताते हैं; जो सूअर का मांस खाते, और अशुद्ध मांस का शोरबा अपने बर्तनों में रखते है।

5ये कहते हैं, ‘दूर हट, मेरे निकट मत आ, क्योंकि मैं तुझसे अधिक पवित्र हूं!’ ये मेरी नाक में धुएं और उस आग के समान हैं जो दिन भर जलती रहती है।

6देखो, यह मेरे सामने लिखा गया, मैं चुप न रहूंगा परन्तु मैं बदला लूंगा, हां, मैं उनकी गोद में ही बदला डालूंगा-

7तुम्हारे अधर्म के कामों और तुम्हारे पुरखों दोनों के अधर्म के कामों का बदला लूंगा,” यहोवा की यही वाणी है। “क्योंकि उन्होंने पर्वतों पर धूप जलाया और पहाड़ियों पर मेरा अनादर किया, इसलिए मैं उनके पिछले कामों को तोलकर उन्हीं की गोद में डाल दूंगा।”

8यहोवा यों कहता है, “जब दाख के गुच्छे में रस मिलता है तब लोग कहते हैं, ‘उसे नष्ट न करो, क्योंकि यह अभी काम का है। इसी प्रकार मैं अपने दासों के लिए करूंगा जिससे कि उन सबको नष्ट न करू।

9मैं याकूब में सेे एक वंश और यहूदा में से अपने पर्वतों के लिए एक वारिस उत्पन्न करूंगा; मेरे चुने हुए उसके उत्तराधिकारी होंगे और मेरे दास वहां निवास करेंगे।

10मेरी प्रजा जो मुझे खोजती है, उसकी भेड़-बकरियों के लिए शारोन चरागाह होगा, और गाय-बैलों के लिए आकोर की तराई विश्राम-स्थल होगी।

11परन्तु तुम जो यहोवा को त्याग देते और मेरे पवित्र पर्वत को भूल जाते हो, जो भाग्य देवता के लिए मेज सजाते और भावी देवी के लिए मसाला मिली मदिरा अर्पित करते हो,

12मैं तुम्हें तलवार का कौर होने के लिए ठहराऊंगा, और तुम सब घात होने के लिए झुकोगे। क्योंकि मैंने पुकारा, परन्तु तुमने उत्तर न दिया, मैं बोला, परन्तु तुमने न सुना। जो मेरी दृष्टि में बुरा है वही तुमने किया और जिससे मैं अप्रसन्न था वही तुमने चुना।”

13इसलिए, प्रभु यहोवा यों कहता है, “देखो, मेरे दास तो खाएंगे, पर तुम भूखे रहोगे। देखो, मेरे दास पीएंगे, पर तुम प्यासे रहोगे। देखो, मेरे दास आनन्द मनाएंगे, पर तुमको लज्जित होना पड़ेगा।

14देखो, मेरे दास हर्षित मन से जय जयकार करेंगे, परन्तु तुम खेदित हृदय से चिल्लाओगे और टूटे मन से हाय-हाय करोगे।

15तुम अपना नाम मेरे चुने हुओं के लिए शाप स्वरूप छोड़ जाओगे, और प्रभु यहोवा तुम्हारा वध करेगा। परन्तु वह अपने दासों का दूसरा नाम रखेगा।

16क्योंकि जो कोई पृथ्वी पर आशीष मांगे, वह सच्चे परमेश्वर के नाम से ही मांगेगा, और जो पृथ्वी पर शपथ खाए वह सच्चे परमेश्वर के नाम से ही शपथ खाएगा। क्योंकि पिछले कष्ट भुला दिए गए, वे मेरी दृष्टि से छिपे हुए हैं!

17“क्योंकि देखो, मैं नया आकाश और नई पृथ्वी को सृजता हूं; और पहली बातें स्मरण न की जाएंगी अथवा सोच-विचार में भी न आएंगी।

18परन्तु जो मैं सृजने वाला हूं उसमें सर्वदा के लिए आनन्दित और हर्षित हो; क्योंकि देखो, मैं यरूशलेम को आनन्द का और उसकी प्रजा को हर्ष का कारण होने के लिए सृजूंगा।

19मैं यरूशलेम के कारण आनन्दित और अपनी प्रजा के कारण हर्षित होऊंगा; उसमें रोने का शब्द और चिल्लाने की आवाज फिर कभी सुनाई न पड़ेंगी।

20उसमें न तो कोई ऐसा शिशु होगा जो थोड़े दिन जीए और न ऐसा वृद्ध जो अपनी आयु के दिन पूरे न कर पाए; क्योंकि जो सौ वर्ष की आयु पूरी करके मरेगा उसे जवान समझा जाएगा और जो सौ वर्ष की आयु पूरी न कर पाए उसे शापित समझा जाएगा।

21वे घर बनाकर उनमें रहेंगे, वे दाख की बारियां लगाकर उनके फल खाएंगे।

22ऐसा नहीं होगा कि वे बनाएं और कोई दूसरा आकर रहे, वे लगाएं और दूसरा आकर खाए, क्योंकि मेरी प्रजा की आयु वृक्षों के समान लम्बी होगी, और मेरे चुने हुए अपने हाथों के कार्यों का पूरा-पूरा लाभ उठाएंगे।

23उनका परिश्रम व्यर्थ न होगा, न उनके बच्चे संकट के लिए उत्पन्न होंगे, क्योंकि वे यहोवा के धन्य लोग ठहरेंगे।

24तब ऐसा होगा कि उनके पुकारने से पहले ही मैं उत्तर दूंगा, और उनके मांगते ही मैं सुन लूंगा।

25भेड़िया और मेमना एक साथ चरेंगे, और सिंह-बैल के समान भूसा खाएगा; और सर्प का आहार मिट्टी ही रहेगा। मेरे सम्पूर्ण पवित्र पर्वत पर न तो कोई किसी को दुख देगा और न ही हानि पहुंचाएगा,” यहोवा की यही वाणी है।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)