याकूब 5:16
इसलिए तुम परस्पर अपने पापों को मान लो और एक दूसरे के लिए प्रार्थना करो, जिससे कि चंगाई प्राप्त हो। धर्मी जन की प्रभावशाली प्रार्थना में बहुत कुछ हो सकता है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)
संदर्भ: याकूब 5
13क्या तुम में कोई दुखी है? तो वह प्रार्थना करे। क्या कोई प्रसन्न है? तो वह स्तुति के भजन गाए।
14क्या तुम में कोई रोगी है? यदि है तो कलीसिया के प्राचीनों को बुलाए और वे उस पर तेल मल कर प्रभु के नाम से उसके लिए प्रार्थना करें,
15और विश्वासपूर्ण प्रार्थना के द्वारा रोगी चंगा हो जाएगा और प्रभु उसे उठा खड़ा करेगा; और यदि उसने पाप किए हों तो वे भी क्षमा कर दिए जाएंगे।
16इसलिए तुम परस्पर अपने पापों को मान लो और एक दूसरे के लिए प्रार्थना करो, जिससे कि चंगाई प्राप्त हो। धर्मी जन की प्रभावशाली प्रार्थना में बहुत कुछ हो सकता है।
17एलिय्याह भी हमारे ही जैसे स्वभाव का मनुष्य था; और उसने वर्षा न होने के लिए गिड़गिड़ा कर प्रार्थना की; और साढ़े तीन वर्षों तक धरती पर वर्षा न हुई।
18उसने फिर प्रार्थना की, और आकाश से भारी वर्षा हुई, और भूमि ने अपनी उपज दी।
19मेरे भाइयो, यदि तुम में से कोई सत्य से भटक जाए और कोई उसको फेर लाए,
संबंधित पद
- यिर्मयाह 29:12–13
तब तुम मुझे पुकारोगे और मेरे पास आकर मुझसे प्रार्थना करोगे और मैं तुम्हारी सुनूंगा।
- नीतिवचन 15:29
यहोवा दुष्टों से दूर है, परन्तु वह धर्मियों की प्रार्थना को सुनता है।
- मत्ती 21:22
और जो कुछ तुम प्रार्थना में विश्वास से मांगोगे वह तुम्हें मिलेगा।”
- यूहन्ना 9:31
हम जानते हैं कि परमेश्वर पापियों की नहीं सुनता, परन्तु यदि कोई परमेश्वर का भय माननेवाला हो, और उसकी इच्छा पूरी करता हो तो वह उसकी सुनता है।
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