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पुराना नियम · यिर्मयाह · अध्याय 29 / 52

यिर्मयाह 29

1यिर्मयाह नबी ने यरूशलेम से इस आशय का पत्र बन्धुवाई में गए हुए शेष प्राचीनों, याजकों, नबियाेंं तथा उन सब लोगों को लिखा जिन्हेंं नबूकदनेस्सर यरूशलेम से बेबीलोन को बन्धुवा बनाकर ले गया था।

2यह बात तब हुई जब यकोन्याह राजा और राजमाता, राजदरबारी, यरूशलेम तथा यहूदा के अधिकारी समेत कारीगर व लोहार आदि सब यरूशलेम से चले गए थे।

3यह पत्र यहूदा के राजा सिदकिय्याह की ओर से शापान के पुत्र एलासा और हिल्किय्याह के पुत्र गमर्याह के हाथ बेबीलोन के राजा नबूकदनेस्सर के पास बेबीलोन को भेजा गया।

4उसमें लिखा था, “सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है, हे सब बन्दियों, जिन्हेंं मैंने यरूशलेम से बेबीलोेन को बन्दी बना कर भेजा है,

5घर बनाकर उनमें रहने लगो, बारियां लगाकर उनके फल खाओ।

6विवाह करके बेटे-बेटियां उत्पन्न करो, अपने बेटों के लिए पत्नियां ब्याह लो और अपनी बेटियों को ब्याह दो कि वे भी बेटे-बेटियां उत्पन्न करें और तुम संख्या में बढ़ते जाओ पर घटो नही।

7और जिस नगर में मैंने तुमको बन्दी बनाकर भेजा है उसकी कुशलता का प्रयास करो और यहोवा से उसके लिए प्रार्थना करो, क्योंकि उसकी कुशलता में ही तुम्हारी कुशलता होगी।

8सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है कि तुम्हारे मध्य जो नबी और शकुनिए हैं वे तुम्हें छलने न पाएं और न उनके स्वप्नों पर कान लगाओ जिन्हेंं वे देखा करते है।

9क्योंकि वे मेरा नाम लेकर तुमसे झूठी नबूवत करते हैं, मैंने उन्हेंं नहीं भेजा है, यहोवा यह कहता है।

10यहोवा पुनः यों कहता है कि जब बेबीलोन के सत्तर वर्ष पूरे हो जाएंगे, तब मैं तुम्हारी सुधि लूंगा और उस अपने मनभावने वचन को पूरा करूंगा कि मैं तुम्हें इसी स्थान में लौटा ले आऊंगा।

11यहोवा कहता है कि मैं उन योजनाओं को जानता हूं जो मैंने तुम्हारे लिए बनाई हैं ऐसी योजनाएं जो हानि की नहीं परन्तु तुम्हारे कुशल की हैं, कि तुम्हें उज्ज्वल भविष्य और आशा दू।

12तब तुम मुझे पुकारोगे और मेरे पास आकर मुझसे प्रार्थना करोगे और मैं तुम्हारी सुनूंगा।

13तुम मुझे ढूं़ढ़ोगे और पाओगे क्योंकि तुम सम्पूर्ण हृदय से मुझे ढूंढोगे।

14यहोवा कहता है कि मैं तुम्हें मिल जाऊंगा और मैं तुम्हें बन्धुवाई से लौटा ले आऊँगा। मैं तुम्हें उन सब जातियों और उन सब स्थानों से जहां मैंने तुम्हें खदेड़ दिया था, इकट्ठे करके ले आऊंगा। मैं तुम्हें उसी स्थान में लौटा ले आऊंगा जहां से मैंने तुम्हें बन्दी बनाकर निकाला था, यहोवा की यही वाणी है।”

15तुम तो कहते हो कि यहोवा ने हमारे लिए बेबीलोन में नबी खड़े किए हैं,

16पर यहोवा उस राजा के सम्बन्ध में जो दाऊद के सिंहासन पर विराजमान है यह कहता है और उन लोगों के सम्बन्ध में भी जो इस नगर में रहते हैं अर्थात् तुम्हारे भाई जो तुम्हारे साथ बन्धुवाई में नहीं गए-

17सेनाओं का यहोवा यों कहता हैः देखो, मैं उन पर तलवार, अकाल और मरी भेजूंगा, और मैं उन्हें उन फटे हुए अंजीरों के समान बना डालूंगा जो सड़ाहट के कारण खाए नहीं जा सकते।

18मैं उन पर तलवार, अकाल और मरी भेजूंगा; और मैं उनको पृथ्वी के समस्त राज्यों में आतंक का कारण बनाऊंगा कि वह उन सब जातियों के मध्य जहां-जहां मैंने खदेड़ा है, शाप, आतंक, उपहास और कलंक का कारण बन जाएं,

19यहोवा कहता है कि उन्होंने मेरे उन वचनों को नहीं सुना, अर्थात् जिनको मैंने बार-बार अपने दास नबियों के द्वारा भेजा परन्तु तुमने उनको नहीं सुना, यहोवा की वाणी है।

20इस कारण, हे सब बन्दियो, जिन्हें मैंने यरूशलेम से बेबीलोन को बन्दी बनाकर भेजा है, यहोवा का यह वचन सुनोः

21“कोलायाह के पुत्र अहाब और मासेयाह के पुत्र सिदकिय्याह के सम्बन्ध में, जो मेरे नाम में तुमसे झूठी नबूवत करते हैं, सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर यों कहता हैः ‘देखो, मैं उन्हें बेबीलोन के राजा नबूकदनेस्सर के अधीन कर दूंगा और वह उनको तुम्हारी आंखों के सामने घात करेगा।

22और उनके कारण बेबीलोन में रहने वाले यहूदी बन्दी इस प्रकार शाप दिया करेंगे, “यहोवा तुम्हें सिदकिय्याह और अहाब के समान बनाए जिनको बेबीलोन के राजा ने आग में भून डाला था,”

23क्योंकि उन्होंने इस्राएल के मध्य मूढ़ता के कार्य किए और अपने पड़ोसियों की पत्नियों के साथ व्यभिचार किया और मेरे नाम से उन्होंने झूठे वचन कहे जिनकी आज्ञा मैंने उन्हें नहीं दी थी, मैं स्वयं इसका जानने वाला और साक्षी हूं, यहोवा यह कहता है।”

24नेहेलामी शमायाह को यह कह सुनाना,

25“सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर, यों कहता हैः ‘इसलिए कि तूने अपने ही नाम से यरूशलेम में सब रहने वालों को, मासेयाह के पुत्र सपन्याह याजक को तथा सब याजकों को, इस आशय के पत्र भेजे,

26यहोयादा याजक के स्थान पर यहोवा ने तुझे ही याजक बनाया है कि तू यहोवा के भवन में प्रत्येक सिर फिरे व्यक्ति का जो नबूवत करता है अधिकारी बने और उसके गले में लोहे का पट्टा डालकर उसे काठ में ठोंके,

27तो तूने यिर्मयाह अनातोती को जो तुमसे नबूवत करता है क्यों नहीं डांटा?

28क्योंकि उसने बेबीलोन में हमसे यह कहला भेजा है कि बन्धुवाई का समय लम्बा होगा अतः घर बनाकर उनमें बस जाओ और बारियां लगाओ और उनका फल खाओ।”

29तब सपन्याह याजक ने यह पत्र यिर्मयाह नबी को पढ़ कर सुनाया।

30तब यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा,

31सम्पूर्ण बन्दियों को यह कहला भेज कि नेहेलामी शमायाह के सम्बन्ध में यहोवा इस प्रकार कहता है कि यघपि मैंने शमायाह को नहीं भेजा फिर भी उसने नबूवत करके तुम्हें झूठी आशा दिलाई है,

32इसलिए यहोवा कहता है, “देखो, मैं नेहेलामी शमायाह और उनके वंशजों को दण्ड देने वाला हूं, इस प्रजा के मध्य उसका कोई भी जन जीवित न रहने पाएगा, और वह उस भलाई को जो मैं अपनी प्रजा के साथ करने पर हूं देखने न पाएगा; क्योंकि उसने यहोवा के विरफ़द्ध विद्रोह पूर्ण बातें कही है।” यहोवा की यह वाणी है।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)