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यिर्मयाह 29:11

यहोवा कहता है कि मैं उन योजनाओं को जानता हूं जो मैंने तुम्हारे लिए बनाई हैं ऐसी योजनाएं जो हानि की नहीं परन्तु तुम्हारे कुशल की हैं, कि तुम्हें उज्ज्वल भविष्य और आशा दू।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)

संदर्भ: यिर्मयाह 29

8सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है कि तुम्हारे मध्य जो नबी और शकुनिए हैं वे तुम्हें छलने न पाएं और न उनके स्वप्नों पर कान लगाओ जिन्हेंं वे देखा करते है।

9क्योंकि वे मेरा नाम लेकर तुमसे झूठी नबूवत करते हैं, मैंने उन्हेंं नहीं भेजा है, यहोवा यह कहता है।

10यहोवा पुनः यों कहता है कि जब बेबीलोन के सत्तर वर्ष पूरे हो जाएंगे, तब मैं तुम्हारी सुधि लूंगा और उस अपने मनभावने वचन को पूरा करूंगा कि मैं तुम्हें इसी स्थान में लौटा ले आऊंगा।

11यहोवा कहता है कि मैं उन योजनाओं को जानता हूं जो मैंने तुम्हारे लिए बनाई हैं ऐसी योजनाएं जो हानि की नहीं परन्तु तुम्हारे कुशल की हैं, कि तुम्हें उज्ज्वल भविष्य और आशा दू।

12तब तुम मुझे पुकारोगे और मेरे पास आकर मुझसे प्रार्थना करोगे और मैं तुम्हारी सुनूंगा।

13तुम मुझे ढूं़ढ़ोगे और पाओगे क्योंकि तुम सम्पूर्ण हृदय से मुझे ढूंढोगे।

14यहोवा कहता है कि मैं तुम्हें मिल जाऊंगा और मैं तुम्हें बन्धुवाई से लौटा ले आऊँगा। मैं तुम्हें उन सब जातियों और उन सब स्थानों से जहां मैंने तुम्हें खदेड़ दिया था, इकट्ठे करके ले आऊंगा। मैं तुम्हें उसी स्थान में लौटा ले आऊंगा जहां से मैंने तुम्हें बन्दी बनाकर निकाला था, यहोवा की यही वाणी है।”

पूरा अध्याय पढ़ें: यिर्मयाह 29

संबंधित पद

  • यशायाह 55:8–12

    यहोवा कहता है, “मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं हैं, न ही तुम्हारे मार्ग और मेरे मार्ग एक जैसे है।

  • मीका 4:12

    परन्तु वे यहोवा के विचारों को नहीं जानते और न उसके उद्देश्य को समझते है। उसने तो उन्हें ऐसे बटोर लिया है जैसे खलिहान में पूले।

  • अय्यूब 23:13

    परन्तु वह तो अद्वितीय है, उसे कौन विमुख कर सकता है? और जो उसका जी चाहता है, वही वह करता है।

  • विलापगीत 3:26

    यहोवा से उद्धार पाने की आशा लगाकर चुपचाप रहना भला है।

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