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पुराना नियम · यिर्मयाह · अध्याय 12 / 52

यिर्मयाह 12

1हे यहोवा, तू तो धर्मी है जिससे कि मैं अपना मुकद्दमा तेरे सम्मुख लड़ूं; वास्तव में मैं न्याय की बातों का तेरे साथ विवाद करूंगा; दुष्टों का मार्ग क्यों सफल होता है? क्या कारण है कि जो विश्वासघात करते हैं वे सुख से रहते हैं?

2तूने उनको रोपा, वे जड़ भी पकड़ते हैं; वे बढ़ते हैं और फलवन्त भी होते है। तू उनके मुंह के निकट तो है पर उनके मन से दूर है।

3परन्तु हे यहोवा, तू तो मुझे जानता है; तू मुझे देखता है; और तू अपने प्रति मेरे हृदय की भावनाओं को जांचता है। वध होने वाली भेड़ों के समान उन्हें घसीट ले और घात के दिन के लिए अलग कर!

4कब तक देश विलाप करता रहेगा और मैदान की हरियाली मुर्झाती रहेगी? देश में रहने वालों की दुष्टता के कारण पशु-पक्षी सब नष्ट हो गए हैं; क्योंकि लोगों ने कहा, “वह हमारे आने वाले अन्त को न देखेगा।”

5“यदि तू पैदल सेना के साथ दौड़ा और उन्होंने तुझे थका दिया तो तू घोड़ों का मुकाबला कैसे कर सकता है? यदि तू शान्ति के देश में ही पराजित होता है तो यरदन की बाढ़ में क्या करेगा?

6तेरे भाइयों और तेरे पिता के घराने ने हां, उन्होंने तेरे साथ विश्वासघात किया है, उन्होंने तुझे तेरे पीछे ललकारा है, यघपि वे तुझसे मीठी-मीठी बातें करें, तू उन पर विश्वास न करना।”

7मैंने अपना घर छोड़ दिया, मैंने अपनी मीरास को त्याग दिया है, मैंने अपनी प्राण-प्रिया को उसके शत्रुओं के हाथ में दे दिया है।

8मेरी मीरास मेरे लिए वन की शेरनी के समान हो गई है, वह मुझ पर गरजी है, इसलिए मैंने उससे घृणा की है।

9क्या मेरी मीरास मेरे लिए उस चित्तेदार पक्षी के समान नहीं है जिसे शिकारी पक्षी चारों ओर से घेरे हुए हैं? जाओ, मैदान के सब पशुओं को इकट्ठा करो और बुला लाओ कि निगल जाए।

10बहुत से चरवाहों ने मेरी दाख की बारी को बर्बाद कर दिया, उन्होंने मेरे खेत को रौंद डाला; उन्होंने मेरे मनोहर खेत को उजड़ा हुआ जंगल बना डाला।

11वह उजाड़ दिया गया है, और उजड़ कर मेरे सम्मुख विलाप कर रहा है। समस्त देश उजाड़ दिया गया है, क्योंकि कोई मनुष्य इसके बारे में नहीं सोचता।

12जंगल के सब मुंडे टीलों पर विनाश करने वाले चढ़ आए हैं, देश के एक छोर से लेकर दूसरे छोर तक यहोवा की तलवार निगलती चली जा रही है; किसी को शान्ति नहीं है।

13उन्होंने गेहूं तो बोया परन्तु कांटों की फसल काटी, उन्होंने बहुत परिश्रम तो किया परन्तु उससे कुछ लाभ नहीं हुआ। यहोवा के भयंकर क्रोध के कारण अपनी फसल के लिए लज्जित होओ।”

14यहोवा अपने उन दुष्ट पड़ोसियों के सम्बन्ध में यों कहता है, वे उस मीरास पर धावा बोलते हैं जिसे मैंने अपनी प्रजा इÐाएल को दिया था। “देखो अब मैं उनको उनके देश से उखाड़ने पर हूं और यहूदा के घराने को भी उनके मध्य से उखाड़ फेंकूंगा।

15और ऐसा होगा कि उनको उखाड़ने के पश्चात् मैं उन पर फिर से तरस खाऊंगा; मैं उनमें से प्रत्येक को उसकी मीरास और उसके देश में लौटा ले आऊंगा।

16तब ऐसा होगा कि जैसा उन्होंने मेरी प्रजा को बाअल की सौगंध खाना सिखाया था वेैसा ही यदि वे सचमुच मेरी प्रजा की चाल सीख कर मेरे नाम की सौगंध खाएं, अर्थात् यहोवा के जीवन की सौगंध, तब वे मेरी प्रजा के मध्य बसाए जाएंगे।

17परन्तु यदि वे न मानें तब मैं उस जाति को उखाड़ डालूंगा और उखाड़कर नष्ट कर डालूंगा,” यहोवा की यह वाणी है।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)