पुराना नियम · यिर्मयाह · अध्याय 13 / 52
यिर्मयाह 13
1यहोवा ने मुझसे यों कहा, “जा, अपने लिए सन से बना एक अंगोछा मोल ले और उससे अपनी कमर बान्ध, परन्तु उसे पानी में न भीगने देना।”
2तब मैंने यहोवा के वचन के अनुसार एक अंगोछा मोल लिया और उसे अपनी कमर में बांधा।
3तब यहोवा का यह वचन दूसरी बार मेरे पास पहुंचा,
4“तूने जिस अंगोछे को मोल लिया है और जो तेरी कमर से बन्धा है, उसे लेकर प़फ़रात के किनारे चला जा और वहां किसी चट्टान की दरार में उसे छिपा दे।”
5अतः जैसी आज्ञा यहोवा ने मुझे दी थी उसी के अनुसार मैंने अंगोछे को फरात के तीर पर छिपा दिया।
6और ऐसा हुआ कि बहुत दिनों के पश्चात् यहोवा ने मुझसे कहा, “उठ, प़फ़रात के तीर पर जा और उस अंगोछे को जिसे वहां छिपाने के लिए मैंने तुझसे कहा था, “निकाल कर ला।”
7तब मैं प़फ़रात नदी के तीर पर गया जहां मैंने अंगोछा छिपा रखा था उस स्थान से उसे खोद कर निकाला, देखो, वह अंगोछा तो नष्ट हो गया था और बिल्कुल किसी काम का न था।
8तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचाः
9“यहोवा यों कहता है कि ठीक इसी प्रकार मैं यहूदा के घमंड और यरूशलेम के अहंकार को नष्ट कर दूंगा।
10ये दुष्ट लोग जो मेरे वचन को सुनने से इनकार करते हैं, जो अपने हृदय के हठीलेपन के अनुसार चलते हैं और जिन्होंने अन्य देवताओं के पीछे चलकर उनकी उपासना की और उनको दण्डवत् किया है, वे ठीक इस अंगोछे के समान हो जाएं अर्थात् किसी भी काम के न रह जाए।
11क्योंकि जिस प्रकार अंगोछा मनुष्य की कमर से चिपका रहता है उसी प्रकार मैंने भी इस्राएल के समस्त घराने और यहूदा के समस्त घराने को लपेट लिया था कि वे मेरे लिए एक ऐसी प्रजा बनें जो मेरे नाम के लिए, मेरी प्रशंसा के लिए और मेरी महिमा के लिए हों; परन्तु उन्होंने मेरी नहीं सुनी,” यहोवा की यही वाणी है।
12इसलिए तुझको यह वचन उनसे कहना हैः “इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है, ‘प्रत्येक मटका दाखमधु से भरा जाए।’” और जब वे तुझसे कहें, ‘क्या हम यह अच्छी तरह नहीं जानते कि प्रत्येक मटका दाखमधु से भरा जाता है?’
13तब उनसे कहना, ‘यहोवा यों कहता हैः देखो, मैं इस देश के सब निवासियों को अर्थात् राजाओं को दाऊद की गद्दी पर विराजमान होते हैं, याजकों को, नबियों को और यरूशलेम के सब निवासियों को मतवाला कर दूंगा।
14और मैं उन्हें एक दूसरे से टकरा दूंगा- बाप को बेटे से और बेटे को बाप से। मैं उनको नष्ट करने में न तो करफ़णा करूंगा, न दुखी होऊंगा, और न तरस खाऊंगा,” यहोवा की यही वाणी है।
15सुनो और ध्यान दो, अहंकारी न बनो, क्योंकि यहोवा ने कहा हैः
16अपने यहोवा परमेश्वर को महिमा दो इससे पहले कि वह अन्धकार लाए और इससे पहले कि तुम्हारे पांव काले पर्वतों पर फिसल जाएं और जब तू ज्योति की आशा लगाए तो वह उसे घनघोर अंधकार बनाए और विषाद में बदल डाले।
17और यदि तुम इसे न सुनो तो तुम्हारे गर्व के कारण मेरा मन मेरे भीतर ही भीतर सिसकता रहेगा और फूट-फूटकर रोने के कारण मेरी आंखों से अश्रु-धारा बहती रहेगी, क्योंकि यहोवा की भेड़े बन्दी बना ली गई है।
18राजा और राजमाता से कह, “नीचे बैठ जाओ, क्योंकि तुम्हारे सिर से वे शोभायमान मुकुट उतार दिए गए है।”
19दक्षिण के नगरों पर ताला पड़ गया है, उन्हें खोलने वाला कोई न रहा; सम्पूर्ण यहूदा बन्दी बना लिया गया है और सम्पूर्ण बन्धुवाई में चला गया है।
20“अपनी आंखें उठा कर उनको देख जो उत्तर से चले आ रहे है। वह झुंड जो तुझे दिया गया था अर्थात् वे सुन्दर भेंड़ें कहां हैं?
21जब वह तेरे पूर्व मित्रों को जिन्हें तूने ही स्वयं सिखाया है तेरे ऊपर और तुझ पर प्रधान नियुक्त करेगा, तब तू क्या कहेगी? क्या तुझे जच्चा की-सी पीड़ाएं नहीं उठेंगी?
22तब यदि तू अपने मन में सोचे, ‘ये बातें मुझ पर क्यों बीत रही हैं? तेरे बहुत बड़े अधर्म के कारण तेरा लहंगा उठा दिया गया है और तेरी एड़ियां जबरन नंगी कर दी गई है।
23यदि हब्शी अपना चमड़ा या चीता अपने धब्बे बदल सकता है? तो तू भी जिसे बुराई करने की आदत पड़ी हुई है, भलाई कर सकती है!
24इसलिए मैं उनको ऐसे छितराऊंगा जैसे जंगल के पवन से भूसा उड़ाया जाता है।
25यही तुम्हारा भाग है अर्थात् मेरी ओर से तुम्हारे लिए ठहराया हुआ हिस्सा।” यहोवा की वाणी है, “क्योंकि तुम मुझे भूल गए हो और तुमने झूठ पर भरोसा रखा है।
26इसीलिए मैंने स्वयं तेरे लहंगे को तेरे मुंह तक उठा दिया है कि तेरी लज्जा दिखाई पड़े।
27तेरे व्यभिचार, तेरी कामुकता पूर्ण उच्छृंखलता और वेश्यावृत्ति की लम्पटता जो तूने मैदानी टीलों पर किए मैंने तेरे इन घृणित कार्यों को देख लिया है। हे यरूशलेम, तुझ पर हाय। तू कब तक अशुद्ध बनी रहेगी?”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)