पुराना नियम · यिर्मयाह · अध्याय 14 / 52
यिर्मयाह 14
1तब यहोवा का वचन सूखे वर्ष के सम्बन्ध में यिर्मयाह के पास पहुंचाः
2“यहूदा विलाप करता है, उसके फाटक उदास पड़े हैं, लोग भूमि पर बैठ कर विलाप करते हैं और यरूशलेम की चिल्लाहट आकाश तक पहुंच गई है।
3उनके कुलीनों ने अपने दासों को पानी लाने भेजा है; वे कुंड तक तो पहुंचे परन्तु उन्हें जल न मिला; वे खाली बरतन लेकर लौट आए हैं; वे लज्जित और अपमानित होकर अपने-अपने सिर ढांप लेते है।
4देश में वर्षा न होने से भूमि में दरारें पड़ गई हैं और किसानों ने भी लज्जित होकर अपने-अपने सिर ढांप लिए है।
5मैदान में घास न होने के कारण हरिणी ने भी बच्चे को जन्म देकर त्याग दिया है।
6जंगली गदहे मुण्डे टीलों पर खड़े होकर लोमड़ियों के समान हांफते हैं, उनकी आंखें धुंधला गई हैं क्योंकि कहीं भी हरियाली नही।
7यघपि हमारे अधर्म के काम हमारे विरफ़द्ध गवाही देते हैं, निःसन्देह हमने बार-बार तुझे त्यागा है, हमने तेरे विरफ़द्ध पाप किया है, फिर भी हे यहोवा, अपने नाम के निमित्त कुछ कर!
8हे इस्राएल की आशा तथा संकट के समय उसका उद्धारकर्ता! तू क्यों इस देश में परदेशी या उस यात्री के समान है जिसने रात बिताने के लिए अपना तम्बू गाड़ा हो?
9तू क्यों एक मनुष्य के समान हताश है, ऐसे बलवान मनुष्य के समान जो बचा नहीं सकता? फिर भी हे यहोवा, तू हमारे मध्य में है और हम तेरे ही नाम के कहलाते हैं, तू हमें त्याग न दे।
10इन लोगों से यहोवा यों कहता है, “इस पर भी उन्होंने भटकना ही प्रिय जाना; उन्होंने अपने पैरों की चौकसी नहीं की। इस कारण यहोवा उनको ग्रहण नहीं करता; अब वह यहोवा उनके अधर्म को स्मरण करेगा और उनके पापों का लेखा लेगा।”
11अतः यहोवा ने मुझसे कहा, “इस प्रजा की भलाई के लिए प्रार्थना मत कर।
12जब वे उपवास करें तो मैं उनकी पुकार को नहीं सुनूंगा और जब वे होमबलि और अन्नबलि चढ़ाएं तो मैं उन्हें स्वीकार नहीं करूंगा; वरन् मैं तलवार, अकाल और मरी से उनका अन्त कर दूंगा।”
13परन्तु मैंने कहा, “हाय, प्रभु यहोवा! देख, नबी तो इनसे कहते हैं कि न तो तुम पर तलवार चलेगी, न तुम पर अकाल पड़ेगा पर तुमको मैं इसी स्थान पर अनन्त शान्ति दूंगा।”
14तब यहोवा ने मुझसे कहा, “ये नबी मेरे नाम से झूठी नबूवत कर रहे है। मैंने न तो इनको भेजा, न इनको कोई आज्ञा दी और न इनसे कोई बात की है; ये झूठा दर्शन, झूठी नबूवत, यहां तक कि अपने ही मन के छल को नबूवत के रूप में तुम पर प्रकट करते है।
15इस कारण उन नबियों के सम्बन्ध में जिनको मैंने नहीं भेजा और जो मेरे नाम से नबूवत करते हैं कि इस देश में न तो तलवार चलेगी और न अकाल पड़ेगा-यहोवा यों कहता है कि उन नबियों का अन्त तलवार और अकाल से ही होगा!
16वे लोग भी जिनसे उन्होंने नबूवत की-तलवार और अकाल के कारण मारे जाने पर यरूशलेम की गलियों में फेंंक दिए जाएंगे और उन्हें मिट्टी देने वाला कोई नहीं रहेगा-न तो उनको, न उनकी पत्नियों को, न उनके बेटों और न उनकी बेटियों को-क्योंकि मैं उन पर स्वयं उनकी दुष्टता को उंडेलूंगा।
17तू उनसे यह वचन कह, ‘मेरी आंखों से आंसू रात-दिन बहते रहें और वे न रफ़कें, क्योंकि मेरे लोगों की कुंवारी बेटी निर्दयतापूर्वक कुचली गई है, और उसके अत्यधिक संक्रमित घाव बन गये है।
18यदि मैं नगर से बाहर जाऊं तो देखो, वहां तलवार से मारे हुओं की लोथें है! और यदि नगर में आऊं तो देखो, वहां अकाल से पीड़ित हैं क्योंकि नबी और याजक दोनों ही ऐसे देश में भटकते फिरते हैं जिसे वे नहीं जानते’।”
19क्या तूने यहूदा को बिल्कुल ही त्याग दिया है? अथवा क्या तू सिय्योन से घृणा करता है? तूने हमें क्यों ऐसे मारा है कि हम चंगे हो ही नहीें सकते? हमने शान्ति की प्रतीक्षा की पर कुछ भी भला नहीं हुआ; और चंगाई की आस लगाई पर आतंक ही हाथ लगा!
20हे यहोवा, हम अपनी दुष्टता और अपने पूर्वजों के अधर्म को जानते हैं, क्योंकि हमने तेरे विरफ़द्ध पाप किया है।
21अपने नाम के कारण तू हमें तुच्छ न जान, न अपने ज्योतिर्मय सिंहासन को अपमानित होने दे; हमारे साथ बांधी हुई अपनी वाचा को स्मरण कर, उसे तोड़ न दे।
22क्या अन्य जातियों की मूरतों में से कोई है जो वर्षा कर सकता है? अथवा क्या आकाश झड़ियां लगा सकता है। हे हमारे परमेश्वर यहोवा क्या वह तू ही नहीं जो सब कुछ करता है? इसी कारण हम तुझ पर आशा रखते हैं, क्योंकि तूने ही यह सब कुछ किया है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)