पुराना नियम · यिर्मयाह · अध्याय 15 / 52
यिर्मयाह 15
1तब यहोवा ने मुझसे कहा, “यदि मूसा और शमूएल भी मेरे सम्मुख खड़े होते, फिर भी मेरा मन इन लोगों की ओर न फिरता; इन्हें मेरे सामने से दूर करो और जाने दो!
2और ऐसा हो कि जब वे तुझसे पूछें, ‘हम कहां जाएं?’ जब तू कहना, ‘यहोवा यों कहता हैः “जिनके लिए मरना नियत है वे मरने को, जिनके लिए तलवार नियत है वे तलवार से मरने को, जिनके लिए अकाल से मरना नियत है वे अकाल से मरने को और जिनके लिए बन्दी होना नियत है, वे बन्धुवाई में जाए।”
3यहोवा की वाणी है, मैं उन पर चार प्रकार के विनाश नियुक्त करूंगा, अर्थात् काट डालने के लिए तलवार, घसीटने के लिए कुत्ते, नोच खाने तथा नष्ट करने के लिए आकाश के पक्षी और मैदान के हिंसक पशु
4और यह हिजकिय्याह के पुत्र, यहूदा के राजा मनश्शे के उन कार्यों के कारण होगा जो उसने यरूशलेम में किए हैं और मैं ऐसा करूंगा कि वे पृथ्वी के राज्य-राज्य में आतंकित होकर मारे-मारे फिरेंगे।
5“सचमुच, हे यरूशलेम, कौन तुझ पर तरस खाएगा या कौन तेरे लिए विलाप करेगा, या कौन तेरा कुशल-क्षेम पूछने तेरी ओर लौटेगा?”
6यहोवा की यह वाणी है, “तूने मुझे त्याग दिया है और पीछे हटती चली जा रही है। इसलिए मैं तेरे विरफ़द्ध अपना हाथ बढ़ाऊंगा और तुझे नष्ट कर डालूंगा; मैं तरस खाते-खाते ऊब गया हू।
7मैं उनको देश के फाटकों पर सूप से फटक दूंगा; मैं उनसे उनकी सन्तानों को छीन लूंगा; मैं अपनी प्रजा को नष्ट कर डालूंगा; उन्होंने अपनी चाल से मन नहीं फिराया।
8उनकी विधवाओं की संख्या मेरे देखते समुद्र के बालू से भी अधिक हो जाएगी; मैं उनके विरफ़द्ध अर्थात् उनके जवानों की माता के विरफ़द्ध भरी दुपहरी में एक विनाशक ले आऊंगा और अचानक उस पर व्याकुलता और घबराहट लें आऊँगा।
9वह भी जिसने सात लड़कों को जन्म दिया निढाल हो गई और उसके प्राणपखेरू उड़ गए। दिन दोपहर ही उसका सूर्य अस्त हो गया; वह लज्जित और अपमानित हो गई। अतः मैं शेष बचे हुओं को उनकेे शत्रुओं के सामने तलवार का कौर कर दूंगा,” यहोवा की यह वाणी है।
10हे मेरी माता, मुझ पर हाय कि तूने मुझे देश भर में फसादी और झगड़ालू मनुष्य के रूप में उत्पन्न किया। न तोे मैंने किसी को रफ़पये उधार दिए और न किसी ने मुझे उधार दिए, फिर भी प्रत्येक मुझे कोसता है।
11यहोवा ने कहा, “निश्चय मैं भलाई के कार्यों के लिए तुझे स्वतंत्र करूंगा; घोर विपदा और संकट के समय मैं निश्चय ही तेरे शत्रुओं को तुझसे अनुनय-विनय करने के लिए बाध्य करूंगा।
12“क्या कोई लोहे को अर्थात् उत्तर दिशा के लोहे या कांसे को चकनाचूर कर सकता है?
13मैं तेरे सब पापों के कारण जो तेरे सब सिवानों के भीतर किए गए, तेरी धन-सम्पत्ति और तेरे ख़जाने को बिना दाम के लुट जाने दूंगा।
14तब मैं ऐसा होने दूंगा कि तेरे शत्रु इस सम्पत्ति को ऐसे देश में ले जाए जिसे तू नहीं जानती क्योंकि मेरे क्रोध की अग्नि भड़क उठी है जो तुझे भस्म कर डालेगी।”
15हे यहोवा तू जो जानता है, मुझे स्मरण कर और मुझ पर ध्यान दे और मेरे सताने वालों से मेरा बदला ले। तू तो सहनशील है, अतः मुझे उठा न ले; जान ले कि तेरे ही कारण मेरी निन्दा हुई है।
16तेरे वचन पाकर मैंने उन्हें खा लिया और तेरे वचन मेरे हृदय के लिए आनन्द और हर्ष के कारण बने; क्योंकि हे सेनाओं के यहोवा परमेश्वर, मैं तेरे नाम का कहलाता हू।
17मैं रंगरलियां करने वालों के साथ नहीं बैठा, न ही मैंने आनन्द मनाया। इसलिए कि तेरा हाथ मुझ पर था मैं अकेला बैठा रहा। तूने मुझे रोष से भर दिया था।
18मेरी पीड़ा क्यों निरन्तर बनी रहती है और मेरा घाव क्यों असाध्य है जो चंगा नहीं हो रहा है? क्या तू वास्तव में मेरे लिए धोखा देने वाली उस नदी के समान है जिसके जल पर भरोसा नहीं किया जा सकता?
19इस कारण यहोवा यों कहता है, “यदि तू लौट आए तो मैं तुझे चंगा करूंगा, तू मेरे सम्मुख खड़ा रहा करेगा और यदि तू निकम्मों में से अनमोल को निकाल लाए तो तू मेरा प्रवक्ता बनेगा। वे तो तेरी ओर फिरेंगे, पर तू उनकी ओर कदापि न फिरना।
20तब मैं तुझे इस प्रजा के लिए कांसे की दृढ़ शहरपनाह बनाऊंगा; और यघपि वे तेरे विरफ़द्ध युद्ध करेेंगे पर तुझ पर प्रबल न होंगे, क्योंकि मैं तुझे बचाने और तुझे छुड़ाने के लिए तेरे साथ हूं,” यहोवा की यह वाणी है,
21“अतः मैं तुझे दुष्ट के हाथ से बचा लूंगा और उपद्रवी के चंगुल से छुड़ा लूंगा।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)