पुराना नियम · यिर्मयाह · अध्याय 16 / 52
यिर्मयाह 16
1यहोवा का यह वचन भी मेरे पास पहुंचाः
2तू न तो अपने लिए कोई पत्नी ब्याह लाएगा और न इस स्थान में बेटे-बेटियां जन्माएगा।”
3क्योंकि उन बेटे-बेटियों के सम्बन्ध में जो इस स्थान में जन्म लें, और उन माताओं के सम्बन्ध में जो उन्हें जन्म दें और वे पिता जो उन्हें जन्माएं उनके सम्बन्ध में यहोवा यों कहता हैः
4“वे घातक बीमारियों से मरेंगे। उनके लिए न विलाप किया जाएगा न वे गाड़े जाएंगे। वे भूमि पर खाद के समान पड़े रहेंगे। तलवार और अकाल से उनका अन्त होगा। उनके शव आकाश के पक्षियों और पृथ्वी के पशुओं का भोजन हाेंंगे।”
5क्योंकि यहोवा यों कहता है, “जिस घर में विलाप हो रहा हो उसमें शोक मनाने या सांत्वना देने मत जाना; क्योंकि मैंने इस प्रजा पर से अपनी शान्ति और अपनी करफ़णा और तरस को भी हटा लिया है,” यहोवा की यह वाणी है।
6“इस देश में छोटे-बड़े दोनों मरेंगे। वे गाड़े नहीं जाएंगे, न उनके लिए शोक मनाया जाएगा, न कोई अपना शरीर घायल करेगा और न उनके लिए अपना सिर मुड़ाएगा।
7न तो मनुष्य विलाप करके उनके लिए रोटी तोड़ेंगे कि मरे हुए के लिए किसी को सांत्वना दें और न किसी को शान्ति का प्याला ही पिलाएंगे कि वे माता-पिता की मृत्यु के दुख को भूल जाए।
8इसके अतिरिक्त तू उनके साथ खाने-पीने के लिए भोज में न जाना।”
9क्योंकि सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है, “देखो, मैं तुम्हारे देखते-देखते, तुम्हारे ही समय में इस स्थान से आनन्द की वाणी और हर्षोल्लास की वाणी, दूल्हे की वाणी और दुल्हन की वाणी को मिटा देने वाला हू।
10“तब ऐसा होगा कि जब तू ये सब बातें इन लोगों से कहेगा तो वे तुझसे कहेंगे, ‘यहोवा ने किस कारण ऐसी भारी विपत्तियां हम पर डालने को कहा है? हमारा अधर्म क्या है अथवा हमने अपने यहोवा परमेश्वर के विरोध में क्या पाप किया है?’
11तब तू उनसे कहना, ‘यहोवा की वाणी है कि तुम्हारे पूर्वजों ने मुझे त्याग दिया है और अन्य देवताओं के पीछे चलकर उनकी उपासना की है और उनको दण्डवत् किया है परन्तु मुझे उन्होंने त्याग दिया है और मेरी व्यवस्था का पालन नहीं किया,
12तुमने अपने पुरखों से भी अधिक बुराई की है; क्योंकि देखो, प्रत्येक अपने बुरे हृदय की ढिठाई के अनुसार चाल चल रहा है और कोई मेरी नहीं सुनता।
13अतः मैं तुम्हें इस देश से ऐसे देश में फेंक दूंगा जिसे तुम जानते ही नहीं-न तुम, न तुम्हारे पूर्वज वहां तुम रात-दिन अन्य देवताओं की उपासना किया करोगे, क्योंकि मैं तुम पर कोई कृपादृष्टि नहीं करूंगा।”
14यहोवा यों कहता है, “देखो, ऐसे दिन आने वाले हैं जबकि कभी फिर यह नहीं कहा जाएगा, ‘यहोवा के जीवन की सौगंध जो इस्राएल की सन्तान को मिस्र देश से छुड़ा ले आया।’
15परन्तु यहोवा के जीवन की सौगंध जो इस्राएल की सन्तान को उत्तर के देश से और उन सब देशों से छुड़ा ले आया है जहां उसने उनको निर्वासित कर दिया था क्योंकि मैं उनको उनके अपने देश में लौटा लाऊंगा जिसे मैंने उनके पूर्वजों को दिया था।
16“यहोवा यों कहता है देखो, मैं बहुत से मछुओं को भेजने वाला हूं और वे उन्हें पकड़ लेंगे, तत्पश्चात् मैं बहुत से शिकारियों को भेजूंगा और वे उन्हें प्रत्येक पर्वत, प्रत्येक पहाड़ी, तथा चट्टान की दरारों में से ढूंढ़ निकालेंगे।
17क्योंकि मेरी आंखें उनके सारे चाल-चलन पर लगी हैं; न तो वे मुझसे छिपे हैं और न उनका अधर्म मेरी दृष्टि से गुप्त है।
18सर्वप्रथम मैं उनके अधर्म और उनके पाप का दूना दण्ड दूंगा; क्योंकि उन्होंने मेरे देश को भ्रष्ट कर दिया है और अपने घृणित वस्तुओं की लोथों और घृणित कार्यों से मेरे निज भाग को भर दिया है।”
19हे यहोवा, मेरे बल और दृढ़ गढ़, संकट के समय मेरे शरणस्थान, जाति-जाति के लोग तेरे पास पृथ्वी के छोर से आकर कहेंगे, “हमारे पूर्वजों ने तो मीरास में केवल झूठ, व्यर्थता और निष्फल वस्तुओं को ही पाया।”
20क्या मनुष्य अपने लिए ईश्वरों को बना सकता है जो ईश्वर हैं ही नहीं?
21देखो, इसी कारण मैं उन्हें बताने जा रहा हूं-मैं इस बार अपना भुजबल और अपना पराक्रम उन पर प्रकट करूंगा; और वे जान लेंगे कि मेरा नाम यहोवा है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)