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पुराना नियम · यिर्मयाह · अध्याय 19 / 52

यिर्मयाह 19

1यहोवा ने यों कहा, “जाकर कुम्हार से मिट्टी की बनी एक सुराही मोल ले और प्रजा के कुछ पुरनियों और याजकों में से कुछ प्राचीनों को लेकर,

2बेन-हिन्नोम की तराई में फाटक के उस ओर जा जहां ठीकरे फेंके जाते है। वहां जो वचन मैं तुझसे कहूं उसे प्रचार कर,

3और कह, ‘हे यहूदा के राजाओ और यरूशलेम के निवासियो, यहोवा का वचन सुनो। सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर यों कहता हैः “देखो, मैं इस स्थान पर ऐसी विपत्ति डालने पर हूं कि प्रत्येक जो इसका समाचार सुनेगा उसके कानों में सनसनाहट छा जाएगी।

4क्योंकि इन लोगों ने मुझे त्याग दिया है और इस स्थान में, पराए देवताओं के लिए जिन्हें न तो स्वयं उन्होंने न उनके पूर्वजों ने और न उनके राजाओं ने कभी जाना धूप जलाकर इसे पराया देश बना डाला है, और क्योंकि इन लोगों ने इस स्थान को निर्दोषों के लहू से भर दिया है

5और बाअल के लिए ऊंचे स्थान बनाए हैं कि अपने लड़कों को बाअल के लिए होमबलि चढ़ाएं, ऐसा कार्य जिसे करने की न तो मैंने कभी आज्ञा दी और न कभी चर्चा की और न कभी मेरे मन में ही आया;

6यहोवा की यह वाणी है, “इसलिए देखो, वे दिन आ रहे हैं,” जबकि यह स्थान तोपेत या हिन्नोमियों की तराई फिर कभी नहीं कहलाएगा वरन् इसके विपरीत घात की तराई ही कहलाएगा।

7मैं इस स्थान में यहूदा और यरूशलेम की युक्तियों को निष्फल कर दूंगा और मैं उनके प्राणों के प्यासे शत्रुओं के सम्मुख उन्हीं के हाथों तलवार से घात होने दूंगा और मैं उनके शवों को आकाश के पक्षियों और वन के पशुओं का आहार कर दूंंगा।

8मैं इस नगर को उजाड़ और उपहास का विषय बना डालूंगा; प्रत्येक व्यक्ति जो इसके समीप होकर जाएगा इस पर पड़ी घोर विपत्ति के कारण आश्चर्य-चकित होगा और इसका ठट्ठा करेगा।

9उनके शत्रु और वे जो उनके प्राणों के प्यासे हैं जब उन्हें घेर लेंगे और वे संकट में पड़े हाेंंगे उस समय मैं ऐसा करूंगा कि मैं उनको उनके बेटे-बेटियों का मांस खिलवाऊंगा और एक-दूसरे का भी मांस खिलवाऊंगा।”

10“तब तू उन मनुष्यों के जो तेरे साथ चलेंगे देखते हुए उस सुराही को तोड़ डालना।

11और उनसे कहना, ‘सेनाओं का यहोवा यों कहता हैः “मैं भी इस देश के लोगों को और इस नगर को इसी प्रकार तोड़ डालूंगा ठीक जिस प्रकार कोई मनुष्य कुम्हार के बर्तन को तोड़ डालता है और जो फिर बनाया नहीं जा सकता; और वे तोपेत की तराई में ही गाड़े जाएंगे क्योंकि गाड़ने के लिए कोई दूसरा स्थान न रहेगा।”

12यहोवा की यह वाणी है, “मैं इस स्थान और इसके निवासियों के साथ ऐसा ही व्यवहार करूंगा कि यह नगर भी तोपेत के समान बन जाए।

13और यरूशलेम के भवन और यहूदा के राजाओं के महल, तोपेत के समान ही भ्रष्ट हो जाएंगे क्योंकि उन्होंने सब भवनों की छतों पर आकाश की समस्त सेनाओं के लिए धूप जलाई और अन्य देवताओं के लिए तपावन चढ़ाया।”’”

14तब यिर्मयाह तोपेत से लौटा जहां यहोवा ने उसे नबूवत करने भेजा था और यहोवा के भवन के आंगन में खड़े होकर उसने सब लोगों से कहाः

15“सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है, ‘देखो, मैं इस नगर और इसके सब गांवों पर उन समस्त विपत्तियों को डालूंगा जिनके विषय में मैं कह चुका हूं, क्योंकि इन लोगों ने हठ किया है कि मेरे वचनों को न माने।’”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)