पुराना नियम · यिर्मयाह · अध्याय 20 / 52
यिर्मयाह 20
1इम्मेर का पुत्र पशहूर याजक यहोवा के भवन में मुख्य अधिकारी था। जब उसने यिर्मयाह को इन बातों की नबूवत करते सुना,
2तो पशहूर ने यिर्मयाह नबी को पिटवाया और उसे काठ में जकड़ दिया जो यहोवा के भवन के निकट बिन्यामीन फाटक के ऊपरी भाग में था।
3तब दूसरे दिन ऐसा हुआ कि जब पशहूर ने यिर्मयाह को काठ से मुक्त किया तो यिर्मयाह ने उससे कहा, “यहोवा ने तुझे जिस नाम से पुकारा वह पशहूर नहीं वरन् मागोर्मिस्साबीब है।
4क्योंकि यहोवा यों कहता है, ‘देख, मैं तुझे स्वयं तेरे लिए और तेरे सब मित्रों के लिए भय का कारण बनाने जा रहा हूं; और तेरे देखते-देखते वे अपने शत्रुओं की तलवार के कौर बन जाएंगे। इस प्रकार मैं सम्पूर्ण यहूदा को बेबीलोन के राजा के हाथों के वश में कर दूंगा और वह उन्हें बन्धुवा बनाकर बेबीलोन ले जाएगा और उन्हें तलवार के घाट उतारेगा।
5और मैं इस नगर की सारी धन-सम्पत्ति, सारी उपज, समस्त मूल्यवान वस्तुएं; यहां तक कि यहूदा के राजाओं के सम्पूर्ण ख़जाने को उनके शत्रुओं के हाथ में दे दूंगा और वे उन सबको लूटकर बेबीलोन ले जाएंगे।
6और हे पशहूर, तू और वे सब जो तेरे घर में रहते हैं साथ साथ बन्धुवाई में चले जाएंगे और बेबीलोन पहुंचेंगे। वहां तू मर जाएगा और अपने उन सब मित्रों के साथ, जिनसे तूने झूठी नबुवत की थी, गाड़ा जाएगा।’”
7हे यहोवा, तूने मुझे धोखा दिया और मैंने धोखा खाया, तूने मुझ पर आक्रमण किया और प्रबल हुआ। दिन भर मैं हंसी का पात्र बना रहता हू। हर एक मेरा ठट्ठा करता है।
8जब कभी मैं बोलता हूं, मैं ऊंचे स्वर से पुकार कर हिंसा और विनाश का प्रचार करता हूं, क्योंकि मेरे लिए यहोवा का वचन दिन भर मेरी निन्दा और मेेरे ठट्ठे का कारण हुआ है।
9परन्तु यदि मैं कहूं, “मैं उसकी चर्चा नहीं करूंगा और न उसके नाम से बोलूंगा,” तो मेरे हृदय में और मेरी हड्डियों के भीतर बन्द एक धधकती आग सी बन जाती है; और मैं इसे रोके-रोके थक गया हूं, अब मुझसे सहा नहीं जाता।
10क्योंकि मैंने बहुत लोगों की फुसफुसाहट सुनी है, “चारों ओर आतंक मचा हुआ है! उसकी भर्त्सना करो; हां, उसकी भर्त्सना करो।” मेरे सब मित्र जिन पर मैं भरोसा करता था मेरे पतन की राह देखते हुए कहते हैं, “कदाचित् वह धोखा खा जाए कि हम उस पर प्रबल होकर उससे अपना बदला ले।”
11परन्तु यहोवा मेरे साथ एक पराक्रमी योद्धा के समान है; इसलिए मेरे सताने वाले ठोकर खाकर गिर पड़ेंगे और प्रबल न होंगे। वे पूर्णतः लज्जित होंगे क्योंकि वे असफल हुए। उनका अपमान सदाकाल का होगा जो भुलाया न जाएगा।
12फिर भी, हे सेनाओं के यहोवा, तू जो धर्मियों को परखता है, तू जो मन और हृदय का प्रत्यक्षदर्शीर् है, उनसे जो बदला तू लेगा उसे मुझे देखने दे क्योंकि मैंने अपना मुकद्दमा तुझे सौंपा है।
13यहोवा के लिए गाओ, यहोवा की स्तुति करो! क्योंकि उसने दरिद्र के प्राण को कुकर्मियों के हाथ से छुड़ाया है।
14शापित हो वह दिन जिसमें मैं उत्पन्न हुआ; जिस दिन मेरी माता ने मुझे जन्म दिया वह धन्य न हो!
15शापित हो वह मनुष्य जिसने मेरे पिता के पास आकर कहा, “तेरे एक बेटा उत्पन्न हुआ है!” और उसे बहुत आनन्दित कर दिया।
16वह मनुष्य उन नगरों के समान हो जिनको यहोवा ने निर्दयतापूर्वक ढा दिया हो। वह प्रातःकाल चिल्लाहट और दोपहर को युद्ध की ललकार सुना करे।
17क्योंकि उसने मुझे जन्म लेने से पहले ही मार न डाला कि मेरी माता मेरी कब्र बन जाती और मैं उसमें सदा पड़ा रहता।
18मैंने गर्भ से जन्म ही क्यों लिया कि संकट और दुख को देखूं जिससे कि मेरे दिन लज्जा में ही व्यतीत हों?
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)