Loading account

पुराना नियम · यिर्मयाह · अध्याय 32 / 52

यिर्मयाह 32

1यहूदा के राजा सिदकिय्याह के राज्य के दसवें वर्ष में जो नबूकदनेस्सेर के राज्य का अठारहवां वर्ष था, यहोवा की ओर सेे यिर्मयाह के पास यह वचन पहुंचा।

2उस समय बेबीलोन के राजा की सेना यरूशलेम को घेरे हुए थी, और यिर्मयाह नबी यहूदा के राजा के भवन में पहरे के आंगन में कैद था,

3क्योंकि यहूदा के राजा सिदकिय्याह ने यह कहकर उसे बन्दी बना लिया था, “तू ऐसा कहकर क्यों नबूवत करता है कि यहोवा यों कहता है, देखो, मैं इन नगर को बेबीलोन के राजा नबूकदनेस्सर के हाथ में देने वाला हूं और वह इसे ले लेगा;

4और यहूदा का राजा सिदकिय्याह कसदियों के हाथ से न बचेगा परन्तु निश्चय ही बेबीलोन के राजा के हाथ में दे दिया जाएगा और वह उससे आमने-सामने बातें करेगा और आंख में आंख डाल कर उसको देखेगा;

5और वह सिदकिय्याह को बेबीलोन ले जाएगा और जब तक मैं उसकी सुधि न लूं वह वहीं रहेगा; यदि तू कसदियों से युद्ध भी करेगा तो सफल न होगा, यहोवा की यही वाणी है?”

6तब यिर्मयाह ने कहा, “यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचाः

7देख, तेरे चाचा शल्लूम का बेटा हनमेल तेरे पास यह कहने आ रहा है कि “मेरा खेत जो अनातोत में है उसे तू अपने लिए मोल ले ले क्योंकि उसे मोल लेकर छुड़ाने का अधिकार तेरा ही है।

8तब यहोवा के वचन के अनुसार मेरा चचेरा भाई हनमेल, पहरे के आंगन में मेरे पास आया और उसने मुझसे कहा, ‘कृपा करके मेरे खेत को जो अनातोत में अर्थात् बिन्यामीन के क्षेत्र में है मोल ले ले, क्योंकि उस पर कब्जा करने का और उसे छुड़ाने का तेरा ही अधिकार है, अतः तू ही उसे मोल ले।’ तब मैंने जान लिया कि यह तो यहोवा ही का वचन है।

9तब मैंने उस खेत को जो अनातोत में था अपने चचेरे भाई हनमेल से मोल लिया और उसे चांदी के सत्रह शेकेल तौल कर दे दिए।

10फिर मैंने बैनामे पर हस्ताक्षर करके उस पर मुहर लगा दी, गवाहों को बुलाया और तराजू में चांदी तौल दी।

11तब मैंने खरीददारी के बैनामों को अर्थात् मुहर लगा बैनामा जिसमें शर्तं लिखी थीं और खुला बैनामा दोनों को ले लिया।

12फिर मैंने खरीददारी के बैनामे को अपने चचेरे भाई हनमेल तथा उन गवाहों के सामने जिन्होंने उस पर हस्ताक्षर किए थे तथा पहरे के आंगन में बैठे हुए सब यहूदियों के सामने नेरिय्याह के पुत्र बारूक को जो महसेयाह का पोता था, दे दिया।

13और मैंने उनके सामने यह कह कर बारूक को आज्ञा दी,

14इस्राएल का परमेश्वर सेनाओं का यहोवा यों कहता है, “इन बैनामों को अर्थात् मुहर लगे खरीददारी के बैनामें तथा खुले बैनामें दोनों को लेकर मिट्टी के मटके में डाल दे कि ये बहुत दिनों तक सुरक्षित रहे।”

15क्योंकि इस्राएल का परमेश्वर सेनाओं का यहोवा यों कहता है, “मकान, खेत और दाख की बारियां फिर से इस देश में खरीदी जाएंगी।”

16नेरिय्याह के पुत्र बारूक को खरीददारी के बैनामों को देने के पश्चात् मैंने यहोवा से यह प्रार्थना की,

17“हे प्रभु यहोवा, देख, तूने आकाश और पृथ्वी को अपने बड़े सामर्थ्य और अपनी बढ़ाई हुई भुजा से रचा है! तेरे लिए कुछ भी कठिन नही।

18तू हजारों पर करफ़णा करता है परन्तु पूर्वजों के अधर्म का बदला उनके बाद उनके वंशजों को देता है। हे महान् और पराक्रमी परमेश्वर, तेरा नाम सेनाओं का यहोवा है।

19तू युक्ति करने में महान् और कार्य करने में सामर्थी है। तेरी दृष्टि मनुष्य के पुत्रों के समस्त चाल-चलन पर लगी रहती है और तू प्रत्येक को उसके चाल-चलन और उसके कार्यों के अनुसार ही प्रतिफल देता है।

20तूने मिस्र में चिह्न और चमत्कार दिखाए और आज भी तू इस्राएलियों तथा सब मनुष्यों के मध्य वैसा ही करता है; इस प्रकार तूने अपने लिए ऐसा नाम किया है जो आज भी बना है।

21तू अपनी प्रजा इस्राएल को चिह्नों और चमत्कारों तथा अपने शक्तिशाली हाथ और बढ़ाई हुई भुजा और बड़े भयानक कार्यों के द्वारा मिस्र देश से छुड़ा लाया है;

22और उनको यह देश दिया है जिसे देने के लिए तूने उनके पूर्वजों से शपथ खाई थी अर्थात् वह देश जिसमें दूध और मधु की धाराएं बहती है।

23और उन्होंने आकर इस देश पर कब्जा किया, परन्तु उन्होंने न तो तेरी बात मानी न वे तेरी व्यवस्था पर चले, वरन् जिन बातों को तूने उन्हें करने की आज्ञा दी थी उनमें से उन्होंने कुछ भी नहीं किया; इसीलिए तूने उन पर इन सब विपत्तियों को आने दिया।

24देख, ये दमदमे नगर पर कब्जा करने के लिए तैयार हो चुके हैं और तलवार, अकाल तथा मरी के कारण यह नगर आक्रमणकारी कसदियों के हाथ में दे दिया गया है। तूने जो कुछ कहा वह पूरा हो गया हैः तू आप इसे देखता भी है।

25फिर भी हे प्रभु यहोवा, तूने मुझसे कहा है कि यघपि यह नगर कसदियों के हाथ में दे दिया गया है फिर भी उस खेत को मोल ले ले और गवाह ठहरा दे।”

26तब यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचाः

27“देख, मैं सब प्राणियों का परमेश्वर यहोवा हूं, क्या मेरे लिए कोई काम कठिन है?”

28इसलिए यहोवा यों कहता है, “देखो, मैं इस नगर को कसदियों अर्थात् बेबीलोन के राजा नबूकदनेस्सर के हाथ में दे देने वाला हूं, और वह इसे ले भी लेगा।

29और कसदी जो इस नगर के विरफ़द्ध युद्ध कर रहे हैं इस नगर में घुसेंगे और उन घरों समेत जिनकी छतों पर लोगों ने बाअल के लिए धूप जलाई और मुझे क्रोध दिलाने के लिए अन्य देवताओं को अर्घ उंडेला है, इस नगर में आग लगा कर इसे फूंंक देंगे।

30सचमुच इस्राएल और यहूदा के वंशज अपनी जवानी से ही मेरी दृष्टि में केवल दुष्टता के काम करते रहे हैं, क्योंकि इस्राएल अपने हाथ की बनाई वस्तु के द्वारा मुझे केवल क्रोध ही दिलाते रहे हैं,” यहोवा की यह वाणी है।

31“सचमुच, यह नगर जब से बसा है तब से लेकर आज तक मेरे क्रोध और प्रकोप को भड़काने का कारण ही बना है, अतः यह मेरे सामने से हटा दिया जाएगा,

32और यह इस्राएलियों और यहूदियों की दुष्टता के उन सब कार्यों के कारण होगा जिन्हें उन सबने अपने राजाओं, अधिकारियों, याजकों, नबियों और यहूदा के लोगों तथा यरूशलेम के निवासियों सहित मेरे क्रोध को भड़काने के लिए किए है।

33और उन्होंने मेरी ओर मुंह नहीं फेरा परन्तु अपनी पीठ ही फेरी है। यघपि मैं उन्हें बार-बार सिखाता रहा, उन्होंने न तो मेरी सुनी और न वे मेरी शिक्षाओं के अनुसार चले।

34परन्तु उन्होनें अपनी घृणित वस्तुएं उस भवन मेंं जो मेरे नाम का कहलाता है स्थापित करके उसे अशुद्ध किया।

35फिर उन्होंने बेन-हिन्नोम की तराई में बाअल के लिए ऊंचे-ऊंचे स्थान बनाए और अपने बेटे-बेटियों को मोलेक के लिए होम किया। मैंने उन्हें कभी इसकी आज्ञा नहीं दी थी न मेरे मन में यह बात आई थी कि वे ऐसा घृणित कार्य करें जिससे यहूदा पाप में फंस जाए।

36इसलिए अब इस नगर के सम्बन्ध में जिसके लिए तुम कहते हो कि यह तो तलवार, अकाल और मरी के कारण बेबीलोन के राजा के हाथ में दे दिया गया है, इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता हैः

37देखो, मैं उनको उन सब देशों से जिनमें मैंने उन्हें अपने क्रोध, प्रकोप और जलजलाहट में खदेड़ दिया था इकट्ठा करके इस स्थान में लौटा ले आऊंगा और ऐसा बसाऊंगा कि वे सुरक्षित रहे।

38और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे और मैं उनका परमेश्वर ठहरूंगा;

39और मैं उनको एक ही मन और एक ही मार्ग दूंगा कि वे सदा मेरा भय मानते रहें जिससे स्वयं उनका और उनके पश्चात् उनके वंशजों का भी भला हो।

40और मैं उनके साथ अनन्तकाल की यह वाचा बांधूंगा कि उनकी भलाई करने से कभी न फिरूंगा और मैं अपना भय उनके हृदयों में डालूंगा, जिससे वे मुझसे कभी विमुख न हो।

41और मैं आनन्दपूर्वक उनकी भलाई करूंगा और अपने सम्पूर्ण मन और सम्पूर्ण प्राण से सचमुच उन्हें इस देश में स्थापित करूंगा।

42क्योंकि यहोवा यों कहता है कि जैसे मैंने इस प्रजा पर ये सब विपत्तियां डाली हैं वैसे ही मैं इनके साथ वे सब भलाइयां भी करूंगा जिनकी मैं प्रतिज्ञा कर रहा हू।

43और जिस देश के लिए तुम कहते हो कि यह उजड़ गया है, इसमें न तो मनुष्य हैं और न पशु हैं, यह तो कसदियों के हाथ में दे दिया गया है, इसी देश में खेत मोल लिए जाएंगे।

44और बिन्यामीन के देश में, यरूशलेम के आसपास, यहूदा के नगरों में अर्थात् पहाड़ी, तराई, और दक्षिण देश के नगरों में लोग दाम लेकर खेत मोल लेंगे, बैनामों पर हस्ताक्षर करके मुहर करेंगे, और गवाह ठहराएंगे, क्योंकि मैं उनके दिनों को फेर दूंगा,” यहोवा की यही वाणी है।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)