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पुराना नियम · यिर्मयाह · अध्याय 33 / 52

यिर्मयाह 33

1तब यहोवा का यह वचन दूसरी बार यिर्मयाह के पास पहुंचा जबकि वह पहरे के आंगन में बन्दी था,

2“यहोवा जिसने पृथ्वी को बनाया, हां, यहोवा जिसने उसे स्थापित करने के लिए उसे रूप दिया- उसका नाम यहोवा है, वह यों कहता हैः

3‘ मुझसे प्रार्थना कर और मैं तेरी सुनूंगा, मैं तुझे बड़ी बड़ी और गूढ़ बातें बताऊंगा जिन्हें तू नहीं जानता।

4इस नगर के घर और यहूदा के राजाओं के भवन जो दमदमों और तलवारों के विरुद्ध रक्षा के लिए गिरा दिए गए हैं उनके विषय में इस्राएल का परमेश्वर यहोवा इस प्रकार कहता है,

5जबकि वे कसदियोें से युद्ध करने को आ रहे हैं, कि वे उन स्थानों को उन मनुष्यों की लोथों से भर दें जिन्हें मैंने अपने क्रोध और प्रकोप में मार डाला है और मैंने इस नगर से इसकी सब दुष्टता के कारण अपना मुंह छिपा लिया हैः

6देखो, मैं इन नगर को स्वास्थ्य और चंगाई दूंगा और मेैं उनको चंगा करूंगा, और मैं उन पर सच्चाई और शान्ति को बहुतायत से प्रकट करूंगा।

7और मैं इस्राएल और यहूदा के बन्धुवों को लौटा ले आऊंगा और मैं उनको पुनः प्रतिष्ठित करूंगा।

8मैं उनको उनके सारे अधर्म से जिनके द्वारा उन्होंने मेरे विरफ़द्ध पाप किया है, शुद्ध करूंगा, और मैं उनके सारे अधर्मों को जो उन्होंने मेरे विरफ़द्ध पाप करके किए हैं और जिनके द्वारा मेरे विरफ़द्ध अपराध किया है, क्षमा करूंगा।

9यह नगर मेरे लिए पृथ्वी की उन सब जातियों के सामने हर्ष, स्तुति और महिमा का कारण होगा जो उन सब भलाइयों की चर्चा सुनेंगी जो मैं उनके लिए करता हूं, और वे इसके लिए समस्त भलाई और शान्ति के कार्यों के बारे में सुनेंगी और भयभीत होकर थरथराएंगी।

10“यहोवा यों कहता है, ‘इस स्थान में, जिसके विषय में तुम कहते हो कि यह तो उजाड़ है, यहां न तो मनुष्य रहते हैं और न पशु ही अर्थात् यहूदा के नगरों और यरूशलेम की गलियों में जिनके विषय में तुम कहते हो कि ये जो उजाड़ है। यहां न तो किसी मनुष्य का न किसी पशु का और न किसी और का निवास है।

11हर्ष और उल्लास का शब्द, दुल्हे-दुलहन का शब्द, और उन लोगों का शब्द सुनाई देगा जो कहते हैं, “सेनाओं के यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि यहोवा भला है, क्योंकि उसकी करफ़णा सदा-सर्वदा की है;” और उनका शब्द भी सुनाई देगा जो यहोवा के भवन में धन्यवाद-बलि लाते है। क्योंकि मैं उनको बन्धुवाई से लौटा ले आऊंगा और उनके दिन पहले के समान ही हो जाएंगे,’ यहोवा की यही वाणी है।

12“सेनाओं का यहोवा यों कहता है, ‘इस स्थान में जो उजड़ गया है और जिसमें न तो मनुष्य और न पशु रह गये है, और इसके सब नगरों में फिर चरवाहों की चरागाहे होंगी जो अपनी भेड़ों को उसमें बिठाया करेंगे।

13पहाड़ी पर बसे नगरों में, घाटी के नगरों में, दक्षिण के नगरों मेंं, बिन्यामीन के देश में और यरूशलेम के आस-पास तथा यहूदा के नगरों में फिर से भेड़-बकरियां गिनती करने वाले के हाथों द्वारा गिनकर ही गुजरा करेंगी,’ यहोवा की वाणी है। याजकों तथा राजाओं का पुनर्स्थापन

14“ यहोवा की वाणी है, ‘देखो, वे दिन आने वाले हैं जबकि मैं उस भलाई के वचन को जिसे मैंने इस्राएल और यहूदा के घरानों के सम्बन्ध में कहा था पूरा करूंगा।

15उन्हीं दिनों में और उसी समय मैं दाऊदवंशी एक धर्मी डाली को प्रस्फुटित करूंगा और वह पृथ्वी पर न्याय और धार्मिकता के कार्य करेगा।

16उन दिनों यहूदा का उद्धार होगा और यरूशलेम सुरक्षित बसी रहेगी; वह इस नाम से जानी जाएगी अर्थात् “यहोवा हमारी धार्मिकता है”।’

17क्योंकि यहोवा यों कहता है ‘दाऊद के कुल में इस्राएल के घराने की राजगद्दी पर बैठने वाले सदैव बने रहेंगे;

18और लेवीय याजकों में से मेरे लिए प्रतिदिन होमबलि, अन्नबलि और मेलबलि चढ़ाने वाले सदैव बने रहेंगे’।”

19फिर यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा,

20“यहोवा यों कहता है, ‘यदि तुम मेरी वाचा जो मैंने दिन के और रात के विषय में बांधी है, तोड़ सको कि दिन और रात अपने-अपने निर्धारित समयों पर न हों,

21तब ही मेरी वह वाचा भी जो मैंने अपने दास दाऊद के साथ बांधी थी, टूट सकेगी और उसकी राजगद्दी पर विराजने के लिए उसका कोई राजकुमार न होगा और न मेरी वाचा मेरी सेवा-टहल करने वाले लेवीय याजकों के साथ बंधी रह सकेगी।

22जिस प्रकार न तो आकाश के गणों की गिनती हो सकती है और न समुद्र की बालू का नाप-जोख हो सकता है उसी प्रकार मैं अपने दास दाऊद और अपने टहलुए लेवियों के वंशजों को अनगिनत कर दूंगा’।”

23तब यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचाः

24“क्या तूने इस पर ध्यान नहीं दिया कि इन लोगों ने क्या कहा है, ‘यहोवा ने जिन दो कुलों को चुना था, उन्हें उसने त्याग दिया है’? इस प्रकार वे मेरी प्रजा को तुच्छ जानते हैं और वे मानो अब उनकी दृष्टि में एक जाति है ही नही।

25यहोवा यों कहता हैः ‘यदि दिन और रात के विषय में मेरी वाचा स्थिर न रहे और आकाश और पृथ्वी के सम्बन्ध में मैंने नियम निर्धारित नहीं किए,

26तब ही मैं याकूब और अपने दास दाऊद के वंश को त्याग दूंगा और उसके किसी वंशज को इब्राहीम, इसहाक और याकूब के वंशजों पर प्रभुता करने के लिए नहीं ठहराऊंगा। परन्तु मैं तो उन्हें बन्धुवाई से लौटा लाऊंगा और उन पर दया करूंगा’।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)