पुराना नियम · यिर्मयाह · अध्याय 6 / 52
यिर्मयाह 6
1“हे बिन्यामीनियो, यरूशलेम में से दूर कहीं सुरक्षित स्थान में भाग जाओ। तकोआ में नरसिंगा फूंको, बेथ-हक्केरेम पर झंडा ऊंचा करो; क्योंकि उत्तर दिशा से विपत्ति और एक बड़ा विनाश तुम पर आने वाला है।
2मैं सिय्योन की सुन्दर और सुकुमार बेटी को नष्ट कर दूंगा।
3चरवाहे अपनी-अपनी भेड़-बकरियां लेकर उस पर चढ़ जाएंगे और उसके चारों ओर अपने तम्बू खड़े करेंगे और अपने-अपने स्थान पर घास चराएंगे।
4उसके विरफ़द्ध युद्ध की तैयारी करोः उठो, दोपहर को हम उस पर आक्रमण करे। हाय, हम पर क्योंकि दिन ढलता जाता है, और सांझ की परछाई लम्बी होती जाती है!
5उठो, हम रात्रि में ही उस पर आक्रमण करें और उसके महलों को नष्ट कर डालें!”
6क्योंकि सेनाओं का यहोवा यूं कहता है, “उसके पेड़ों को काट कर यरूशलेम के विरूद्ध घेराबन्दी करो यह वह नगर है जिसको दण्ड देना है, इसमें अत्याचार ही अत्याचार भरा पड़ा है।
7जैसे कुआं अपना पानी ताजा रखता है वैसे ही वह भी अपनी दुष्टता ताजी बनाए रखती है, उसमें हिंसा और सर्वनाश सुनाई पड़ते हैं; रोग और घाव निरन्तर मेरे सम्मुख बने रहते है।
8हे यरूशलेम, चेत जा, कहीं मैं तुझसे अलग न हो जाऊं, तुझे उजाड़ न दूं और निर्जन देश का बना दू।”
9सेनाओं का यहोवा यूं कहता है, “ वे इस्राएल के बचे हुओं को दाखलता के अंगूरों की तरह सम्पूर्णतया बटोर लेंगे; दाख बटोरने वाले की तरह अपना हाथ फिर से डालियों पर लगा।”
10मैं किससे कहूं और किसको चेतावनी दूं कि वे सुनें? देखो, उनके कान तो बन्द हैं और वे सुन नहीं सकते। देखो, यहोवा का वचन उनके लिए निन्दा का कारण बन गया है; उसमें उनको आनन्द नहीं आता।
11परन्तु मैं तो यहोवा के कोप से भर गया हूं और उसे रोकते-रोकते थक गया हू।” गलियों में बच्चों और जवानों पर उनकी सभा में उसे उंडेल दे; क्योंकि पति और पत्नी दोनों ही तथा अधेड़ और बूढ़े सभी बन्दी बना लिए जाएंगे।
12उनके घर, उनके खेत, उनकी पत्नियों सहित दूसरों के हो जाएंगे; क्योंकि मैं अपना हाथ इस देश के निवासियों के विरफ़द्ध बढ़ाऊंगा,” यहोवा की यह वाणी है।
13क्योंकि उनमें छोटे से लेकर बड़े तक सब ही अत्यन्त लालची हैं, और नबियों से लेकर याजक तक भी प्रत्येक धोखा-धड़ी करता है।
14उन्होंने यह कह कर ‘शान्ति है शान्ति’ मेरी प्रजा के घावों को ऊपर से चंगा किया परन्तु शान्ति तो है ही नही।
15क्या वे अपने घृणित कार्यों के कारण लज्जित हुए? नहीं, वे कदापि लज्जित नहीं हुए? वे तो झेंपना भी नहीं जानते, इस कारण जो गिरते हैं उनके मध्य वे भी गिरेंगे; उस समय जब मैं उन्हें दण्ड दूंगा वे गिरा दिए जाएंगे,” यहोवा की यह वाणी है।
16यहोवा यों कहता है, “सड़कों पर खड़े होकर देखो, और पूछो कि प्राचीनकाल का मार्ग अर्थात् वह उत्तम मार्ग कहां है, और उस पर चलो; तब तुम अपने मन में चैन पाओगे, परन्तु उन्होंने कहा, ‘हम उस पर नहीं चलेंगे।’
17मैंने यह कहते हुए तुम पर पहरफ़ए नियुक्त किए, ‘नरसिंगे की आवाज सुनो।’ परन्तु उन्होंने कहा, ‘हम नहीं सुनेंगे’
18इसलिए हे जातियो, सुनो, और हे मंडली, जान ले कि उनके मध्य क्या हो रहा है।
19हे पृथ्वी सुन, देख मैं इस जाति पर विपत्ति ला रहा हूं जो उनकी अपनी ही युक्तियों का फल है, क्योंकि उन्होंने मेरे वचन नहीं सुने और जहां तक मेरी व्यवस्था का सम्बन्ध है उसे भी उन्होंने त्याग दिया है।
20मेरे पास शिबा से लोबान और दूर देश से मधुर नरकट आता है इसका क्या प्रयोजन है? तुम्हारी होमबलियां मुझे स्वीकार्य नहीं और न तुम्हारी मेलबलियां मुझे भाती है।”
21इस कारण यहोवा यों कहता है, “देखो, मैं इस प्रजा के आगे ठोकर रखूंगा, पिता और पुत्र एक साथ तथा पड़ोसी और मित्र सब उस पर ठोकर खाकर नष्ट होंगे।”
22यहोवा यों कहता है, “देखो, उत्तर के देश से एक जाति आ रही है और पृथ्वी के छोर से एक बड़ी जाति भड़क उठेगी।
23वे धनुष और भाला धारण किए हुए, क्रूर तथा निर्दयी हैं; उनकी वाणी समुद्र के गर्जन के समान है, वे घोड़ों पर सवार सशस्त्र योद्धा के समान, ‘हे सिय्योन की पुत्री’,तेरे विरुद्ध युद्ध करेंगे,
24हमने यह समाचार सूना और हमारे हाथ ढीले पड़ गए। हमें बड़ी वेदना, और प्रसव की सी पीड़ा उठी है।
25बाहर मैदान में मत निकलो, न मार्ग पर चलो क्योंकि शत्रु तलवार लिए है और चारों तरफ आतंक छाया हुआ है।
26हे मेरी प्रजा की पुत्री, टाट पहनकर राख में लोट; जैसे एकलौते पुत्र के लिए विलाप किया जाता है वैसे ही अत्यन्त दर्दनाक विलाप कर। क्योंकि हम पर अचानक विनाश करने वाला आ पड़ेगा।
27मैंने तुझे अपनी प्रजा के मध्य पारखी और जांच-कर्ता बनाया कि तू उनकी चाल को कसौटी पर परखे और जान ले।
28वे सबके सब हठीले और विद्रोही हैं और चुगलखोरी करते फिरते है। वे लोहा और ताँबा हैं और सबके सब भ्रष्ट है।
29धौंकनी बेतहाशा चल रही है, सीसा आग में भस्म हो गया है, शोधन का कार्य व्यर्थ ही चल रहा है, क्योंकि दुष्ट लोग निकाले नहीं जा रहे हैं!
30वे उन्हें खोटी चांदी कहते हैं, क्योंकि यहोवा ने उन्हें त्याग दिया है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)