पुराना नियम · यिर्मयाह · अध्याय 7 / 52
यिर्मयाह 7
1यहोवा की ओर से यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचाः
2“यहोवा के भवन के फाटक पर खड़ा हो जा और वहां इस वचन का प्रचार करते हुए कह, ‘हे यहूदा के लोगो, तुम जो यहोवा को दण्डवत् करने इन फाटकों से प्रवेश करते हो, यहोवा का यह वचन सुनो!’”
3सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है, “अपनी-अपनी चाल और अपने कार्य सुधारो, तब मैं तुमको इस स्थान में बसने दूंगा।
4उन छल भरी बातों पर भरोसा मत करो जो कहती हैं, ‘यही यहोवा का मन्दिर है, यहोवा का मन्दिर, यहोवा का मन्दिर।’
5यदि तुम सचमुच अपनी-अपनी चाल और अपने कार्य सुधारो; यदि तुम सचमुच मनुष्य-मनुष्य के बीच न्याय करो,
6यदि तुम परदेशी, अनाथ, और विधवा को न सताओ और इस स्थान पर निर्दोष का खून न बहाओ, और तुम्हारे अपने ही सर्वनाश करने वाले पराए देवताओं के पीछे न चलो,
7तब मैं इस देश में जिसे मैंने तुम्हारे पूर्वजों को युग युग के लिए दिया था तुम्हें बसने दूंगा।
8“देखो तुम व्यर्थ ही छल की बातों पर भरोसा रखते हो।
9क्या तुम चोरी, हत्या और व्यभिचार करोगे, झूठी शपथ खाओगे, बाअल देवता के लिए धूप जलाओगे और उन देवताओं के पीछे चलोगे जिन्हें तुम नहीं जानते हो,
10तब मेरे इस भवन में आकर जो मेरा कहलाता है मेरे सम्मुख खड़े होओगे, और कहोगे, कि ‘हमारा छुटकारा हो गया है!’ कि हम इन सब घृणित कामों को करें?
11क्या यह भवन जो मेरे नाम का कहलाता है तुम्हारी दृष्टि में डाकुओं की खोह बन गया है? देखो, मैंने स्वयं इसे देखा है,” यहोवा की यह वाणी है।
12“परन्तु मेरा जो स्थान शीलो में था जिसमें मैंने अपने नाम को पहले बसाया था, वहां जाकर देखो कि मैंने अपनी प्रजा इस्राएल की दुष्टता के कारण उसकी क्या दशा कर दी है।”
13यहोवा की यह वाणी है, “क्योंकि अब तुमने भी वह सब काम किए हैं; यघपि मैंने तुमसे बड़े तड़के उठते समय बातें कीं परन्तु तुमने नहीं सुना, मैंने तुम्हें पुकारा पर तुमने उत्तर नहीं दिया,
14इस कारण यह भवन जो मेरे नाम का कहलाता है और जिस पर तुम भरोसा रखते हो और यह स्थान जिसे मैंने तुमको और तुम्हारे पूर्वजों को दिया था, इसकी दशा भी शीलो के समान कर दूंगा।
15और मैं तुम्हें भी उसी प्रकार अपनी दृष्टि से दूर कर दूंगा जैसे तुम्हारे सब भाइयों को अर्थात् एप्रैम के वंशजों को अपनी दृष्टि से दूर कर दिया था।
16तू इस प्रजा के लिए प्रार्थना मत कर, न उनके लिए ऊंचे स्वर से पुकार न निवेदन कर, और न मध्यस्थ होकर प्रार्थना कर, क्योंकि मैं तेरी नहीं सुनूंगा।
17क्या तू नहीं देखता कि वे यहूदा के नगरों में और यरूशलेम की गलियों में क्या कर रहे हैं?
18लड़के वाले लकड़ियां बटोरते, उनके पिता आग सुलगाते और स्रियां आटा गूंधती हैं कि आकाश की रानी के लिए रोटियां चढ़ाएं और मुझे चिढ़ाने के लिए अन्य देवताओं को तपावन देते है।
19“क्या वे मुझे क्रोध दिलाते हैं? क्या वे स्वयं ही लज्जा का कारण बनकर अपने आपको ही क्रोध नहीं दिलाते?” यहोवा की यह वाणी है।
20इस कारण प्रभु यहोवा यों कहता है, “देखो मेरा क्रोध और मेरे रोष की अग्नि इस स्थान, मनुष्य, पशु, मैदान के वृक्ष और भूमि की उपज पर ऐसी भड़क उठेगी जो जलकर बुझती नही।”
21सेनाओं का यहोवा जो इस्राएल का परमेश्वर है यों कहता हैः अपने मेल बलियों के साथ अपने होमबलि भी चढ़ाओ और मांस खाओ।
22क्योंकि जिस दिन मैं तुम्हारे पूर्वजों को मिस्र देश से निकाल लाया था उस दिन मैंने उनसे होमबलि और मेलबलि के सम्बन्ध में न तो बातें की और न उनको आज्ञा दी थी।
23परन्तु मैंने उन्हेंं यह आज्ञा दी थी, “मेरे वचन को मानो, तब मैं तुम्हारा परमेश्वर होऊंगा और तुम मेरी प्रजा होओगे; और उन सब मार्गों पर जिनकी मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं यदि तुम चलोगे तो तुम्हारा भला होगा।’
24फिर भी उन्होंने मेरी आज्ञा नहीं मानी, न अपना कान लगाया, परन्तु अपने हृदय के हठीलेपन पर अपनी ही युक्तियों के अनुसार वे चलते रहे और आगे बढ़ना छोड़कर पीछे हटे।
25जिस दिन से तुम्हारे पूर्वज मिस्र देश से निकलकर आए उस दिन से आज तक मैं तुम्हारे पास अपने सब दासों अर्थात् नबियों को बड़े यत्न से भेजता रहा।
26फिर भी उन्होंने मेरी नहीं सुनी, अथवा मेरी ओर कान नहीं लगाया, परन्तु हठी बन गए और अपने पूर्वजों से बढ़कर बुराई की।
27“तू ये सब बातें उनसे कहेगा पर वे तेरी नहीं सुनेंगे; तू उन्हें पुकारेगा परन्तु वे तुझे उत्तर नहीं देंगे।
28तब तू उनसे कहेगा, ‘यह वही जाति है जिसने अपने परमेश्वर यहोवा की नहीं मानी अथवा डांट-डपट को स्वीकार नहीं किया; सच्चाई नष्ट हो गई है और उनके मुंह से दूर कर दी गई है।
29अपना सिर मुंड़ाकर बालों को फेंक दे, और मुण्डे टीलों पर विलाप के गीत गा, क्योंकि यहोवा ने अपने क्रोध में इस पीढ़ी को अस्वीकार करके त्याग दिया है।’
30“क्योंकि यहूदियों ने वह किया है जो मेरी दृष्टि में बुरा है; उन्होंने उस भवन में जो मेरे नाम का कहलाता है घृणित वस्तुओं को स्थापित करके उसे अशुद्ध कर दिया है।” यहोवा की यह वाणी है।
31“उन्होंने हिन्नोमवंशियों की घाटी में तोपेत के ऊंचे-ऊंचे स्थान बनाए हैं कि अपने बेटों और बेटियों को अग्नि में जलाएं जिसकी मैंने न तो आज्ञा दी थी और न ही यह बात मेरे मन में आई थी।
32इसलिए देखो, वे दिन आ रहे हैं जब यह न तो तोपेत न हिन्नोमवंशियों की तराई कहलाएगी, परन्तु घात की तराई कहलाएगी, क्योंकि वे तोपेत में इतने मुर्दों को गाड़ेंगे कि कोई स्थान शेष न रह जाएगा।” यहोवा की यह वाणी है।
33“और इन लोगों के शव आकाश के पक्षियों और पृथ्वी के पशुओं का आहार होंगे और उन को कोई नहीं भगाएगा।
34तब मैं यहूदा के नगरों से और यरूशलेम की गलियों से हर्ष और आनन्द तथा दूल्हा और दुलहन के शब्दों को मिटा डालूंगा क्योंकि यह देश उजड़ जाएगा।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)