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पुराना नियम · यिर्मयाह · अध्याय 9 / 52

यिर्मयाह 9

1भला होता कि मेरा सिर जल ही जल और मेरी आंखें आंसुओं का सोता होतीं कि मैं अपने लोगों के मारे हुओं के लिए रात-दिन रोता रहता।

2भला होता कि जंगल में मुझे बटोहियों का कोई डेरा मिल जाता कि मैं अपने लोगों को छोड़कर चला जाता! क्योंकि वे सबके सब व्यभिचारी हैं और विश्वासघातियों का समाज है।

3“वे अपनी जीभ धनुष की भांति ढेढ़ी करते हैं और उनके देश में सच्चाई की नहीं, झूठ का ही बोलबाला है; क्योंकि वे बुराई पर बुराई करते चले जाते हैं और वे मुझे नहीं जानते,” यहोवा की यही वाणी है।

4“प्रत्येक व्यक्ति अपने पड़ोसी से सतर्क रहे, अपने किसी भाई का भरोसा न करो; क्योंकि हर भाई धूर्तता का व्यवहार करता है, और हर पड़ोसी निन्दा करता फिरता है।

5प्रत्येक व्यक्ति अपने पड़ोसी से छल करता है और सच नहीं बोलता, वे अपनी जीभ से झूठ बोलने के अभ्यस्त हो गए हैं; वे अधर्म करते-करते अपने को थका देते है।

6तुम्हारा निवास छल के मध्य है; छल के कारण ही वे मुझे जानने से इनकार करते हैं,” यहोवा की यह वाणी है।

7इस कारण सेनाओं का यहोवा यों कहता है, “देखो, मैं उन्हें तपाकर शुद्ध करूंगा और परखूंगा; अपनी प्रजा की पुत्रियों के लिए मैं और क्या कर सकता हूं?

8उनकी जीभ प्राणघातक तीर है; वह छल की बातें करती है; अपने मुंह से तो वह अपने पड़ोसी से मेल की बातें करता है, परन्तु मन ही मन उसके विरफ़द्ध घात लगाता है।

9क्या मैं उनको इन सब कार्यों के लिए दण्ड न दूं?” यहोवा की यह वाणी है, “क्या मैं ऐसी जाति से अपना बदला न लूं?

10“पर्वतों के लिए मैं रोऊ्रंगा और विलाप करूंगा, और वन के चरागाहों के लिए मैं शोक-गीत गाऊंगा क्योंकि वे ऐसे उजाड़ दिए गए हैं कि कोई भी उनमें से नहीं गुजरता, उनमें पशुओं कि आवाज नहीं सुनाई पड़ती, आकाश के पक्षी और वन-पशु दोनों ही भाग गए हैं; कुछ भी न रहा।

11मैं यरूशलेम को खंडहर का ढेर बना डालूंगा अर्थात् गीदड़ों का अड्डा और मैं यहूदा के नगरों को ऐसे उजाड़ दूंगा कि कोई भी निवासी न रह जाएगा।”

12वह बुद्धिमान मनुष्य कौन है जो इसे समझ सके? और वह कौन है जिससे यहोवा ने अपने मुख की बातें की कि वह प्रचार करे? यह देश क्यों उजड़ गया है, और जंगल की तरह बर्बाद हो गया है कि कोई भी वहां से नहीं गुजरता?

13और यहोवा ने कहा, “क्योंकि उन्होंने मेरी व्यवस्था को जिसे मैंने उनके सम्मुख रखा था, त्याग दिया है और न मेरी बातों को माना है, न उसके अनुसार चले हैं,

14परन्तु अपने हृदय की ढिठाई के अनुसार और जैसे उनके पूर्वजों ने उनको सिखाया बाल देवताओं के पीछे चलते रहे।”

15इसलिए सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर यों कहता हैः “देख, मैं इस प्रजा को नागदौना खिलाऊंगा और उनको विषैला पानी पिलाऊंगा।

16और मैं उनको ऐसी जातियों मेें तितर-बितर कर दूंगा, जिन्हें न तो वे, न उनके पूर्वज जानते हैं; और जब तक मैं उनका सर्वनाश न कर डालूं, तब तक तलवार उनका पीछा करती रहेगी।”

17सेनाओं का यहोवा यों कहता है, “विचार करो और शोक करने वाली स्रियों को बुला लाओ कि वे आए; और विलाप करने वाली स्त्रियों को बुला लाओ कि वे आए!

18वे फुर्ती करके हमारे लिए विलाप करें कि हमारी आंखों से आंसू बह निकले और हमारी पलके जल बहाए।

19सिय्योन से यह विलाप-गीत सुनाई पड़ता है, ‘हम कैसे नष्ट हुए हैं! हम बहुत लज्जित कर दिए गए हैं; हमने अपने देश को छोड़ दिया है क्योंकि उन्होंने हमारे निवासस्थानों को ढा दिया है।’”

20हे स्रियों, यहोवा का यह वचन सुनो और उसके मुख के वचन पर अपने कान लगाओ, अपनी पुत्रियों को विलाप करना और प्रत्येक अपनी पड़ोसिन को शोक का गीत गाना सिखाए!

21क्योंकि मृत्यु हमारी खिड़कियाेंं से हमारे महलों के अन्दर घुस आई है कि गलियों से बच्चों को और चौकों से जवानों को मिटा दे।

22तू यह कह, “यहोवा यों कहता हैः ‘मनुष्यों के शव खेतों में खाद के समान ऐसे पड़े रहेंगें जैसे काटने वालाें के पीछे पूलियां, और कोई उन्हेंं नही उठाएगा।’”

23यहोवा यों कहता है, “बुद्धिमान अपनी बुद्धि पर घमंड न करे, न बलवन्त अपने बल पर, और न ही धनवान अपनी धन-सम्पत्ति पर गर्व करे;

24परन्तु जो गर्व करता है वह इस बात पर गर्व करे कि वह मुझे जानता और समझता है, और यह भी कि मैं ही वह यहोवा हूं जो पृथ्वी पर करफ़णा, न्याय और धार्मिकता के कार्य करता हूं, क्योंकि मैं इन बातों से प्रसन्न होता हूं,” यहोवा की यह वाणी है।

25यहोवा कहता है, “देखो, ऐसे दिन आने वाले हैं कि मैं सब ख़तना वालों को ख़तना रहितों के समान दण्ड दूंगा-

26मिस्रियों, यहूदियो, एदोमियों, अम्मोनियों और मोआबियों की सन्तानों और उन सबको जो रेगिस्तान में रहते हैं, और अपने गाल के बालों को काटते हैे; क्योंकि सब जातियां भी ख़तनारहित है। और इस्राएल का समस्त घराना भी हृदय से ख़तनारहित है।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)