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पुराना नियम · अय्यूब · अध्याय 19 / 42

अय्यूब 19

1तब अय्यूब ने उत्तर दिया,

2“तुम मुझे कब तक दुख देते रहोगे, और बातों से मुझे चूर-चूर करते रहोगे?

3इन दसों बार तुम लोगों ने मुझे अपमानित किया है, और मेरी बुराई करके भी तुम लज्जित नहीं होते।

4यदि वास्तव में मुझसे भूल हुई है, तो फिर वह मेरे ही सिर पर रहेगी।

5यदि तुम सचमुच मेरे विरुद्ध डींग मारते, और प्रमाण देकर मेरा अपमान करते हो,

6तो यह जान लो कि परमेश्वर ने ही मेरी हानि की है, और मुझे अपने जाल में फंसा लिया है।

7‘उपद्रव, उपद्रव!’ मैं पुकारता हूं, पर कोई उत्तर नहीं; सहायता के लिए चिल्लाता हूं, पर कोई न्याय नही।

8“उसने मेरे मार्ग को रूंध दिया है जिससे मैं आगे बढ़ नहीं सकता, और उसने मेरे मार्गों को अन्धकारमय कर दिया है।

9उसने मेरा सम्मान मुझसे छीन लिया है, और मुुकुट को मेरे सिर से उतार लिया है।

10वह मुझे चारों ओर से तोड़ डालता है, और मैं जाता रहा; उसने मेरी आशा को वृक्ष के समान उखाड़ डाला है।

11उसने मुझ पर अपना क्रोध भी भड़काया है, और मुझे अपना शत्रु समझ लिया है।

12उसकी सेनाएं एक साथ मुझ पर आ पड़ती हैं; और मेरे विरुद्ध मोर्चा बांधती हैं, और मेरे डेरे के चारों ओर छावनी डालती है।

13“उसने मेरे भाइयों को मुझसे दूर हटा लिया है, और मेरे जान-पहचान के लोग मुझसे बिल्कुल विमुख हो गए है।

14मेरे कुटुम्बियों ने मुझे त्याग दिया है, और मेरे परम मित्र मुझे भूल गए है।

15मेरे घर में रहने वाले वरन् मेरी दासियां भी, मुझे पराया समझती है। उनकी दृष्टि में मैं परदेशी हो गया हू।

16मैं अपने दास को बुलाता हूं, पर वह नहीं सुनता, मुझे उससे गिड़गिड़ाना पड़ता है।

17मेरा श्वास मेरी पत्नी को घिनौना लगता है, और मैं अपने भाइयों के लिए घृणित ठहरा हू।

18छोटे बच्चे भी मुझे तुच्छ समझते हैं, जब मैं उठता हूं तो वे मेरी हँसी उड़ाते है।

19मेरे सभी इष्ट मित्र मुझसे घृणा करते हैं, और जिनसे मैं प्रेम रखता हूं वे मेरे विरुद्ध हो गए है।

20मेरी चमड़ी और मांस मेरी हड्डी से चिपक गए हैं, मैं मरने से बाल-बाल बचा हू।

21हे मेरे मित्रों, मुझ पर तरस खाओ, तरस, क्योंकि परमेश्वर का हाथ मुझ पर पड़ चुका है।

22जैसे परमेश्वर मुझे सताता है वैस तुम मुझे क्यों सताते हो, और मेरे मांस से सन्तुष्ट नहीं होते?

23“काश, मेरी बातें लिखी जातीं; काश, वे एक पुस्तक में अंकित कर ली जाती।

24और लोहे की टांकी और सीसे से सर्वदा के लिए चट्टान पर खोदी जाती।

25मुझे तो निश्चय है कि मेरा छुड़ाने वाला जीवित है, और वह अन्त में पृथ्वी पर खड़ा होगा।

26और अपनी खाल के इस प्रकार नष्ट हो जाने के बाद भी, मैं इस शरीर में होकर परमेश्वर का दर्शन पाऊंगा।

27जिसे मैं स्वयं देखूंगा, जिसे मैं अपनी आंखों से देखूंगा, दूसरा कोई और नही। मेरा हृदय भीतर ही भीतर व्याकुल हो रहा है।

28यदि तुम कहते हो, ‘हम उसे कैसे सताएं?” और ‘अपने दुख का कारण तो वह स्वयं है,’

29तो तुम स्वयं तलवार से डरो, क्योंकि क्रोध का परिणाम तलवार का दण्ड है, जिससे तुम जान लो कि न्याय होता है।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)