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पुराना नियम · अय्यूब · अध्याय 20 / 42

अय्यूब 20

1तब नामाती सोपर ने कहा,

2“मेरे विचारों की उथल-पुथल अर्थात् भीतर ही भीतर मेरी व्याकुलता मुझे बोलने के लिए बाध्य करती है।

3मैंने ऐसी फटकार सुनी जिससे मेरा अपमान होता है। और मेरी आत्मा अपनी समझ के अनुसार तुझे उत्तर देने के लिए मुझे बाध्य करती है।

4क्या तू नहीं जानता है कि प्राचीन काल से, अर्थात् पृथ्वी पर मनुष्य के स्थापित किए जाने के समय से ही,

5दुष्टों का विजयोल्लास अप्लकालिक, और विधर्मियों का आनन्द क्षणिक है?

6चाहे उसका माहात्म्य आकाश तक पहुंच जाए, और उसका मस्तक बादलों को स्पर्श करने लग जाए,

7फिर भी वह अपनी विष्ठा के समान सदा के लिए नष्ट हो जाएगा; जिन्होंने उसे देखा था वे पूछेंगे, वह कहां रहा?

8वह स्वप्न के समान लुप्त हो जाएगा और किसी को फिर न मिलेगा, हां, वह रात के दृश्य के समान दूर कर दिया जाएगा।

9जिस आंख ने उसे देखा था वह उसे फिर न देखेगी, और न उसके स्थान पर उसका कुछ पता रहेगा।

10उसके बाल-बच्चे कंगालों से भी दया की भीख मांगेंगे, उसे अपने ही हाथों से अपना धन लौटाना पड़ेगा।

11उसकी हड्डियां जवानी के बल से भरपूर हैं, परन्तु यह उसी के साथ धूल में मिल जाएगा।

12“चाहे बुराई उसके मुंह में मीठी लगती हो, और वह उसे अपनी जीभ के नीचे छिपाए रखता हो,

13और उसकी लालसा करता और उसको छोड़ना न चाहता हो, वरन् उसे अपने मुंह में दबाए रखता हो,

14फिर भी उसका यह भोजन पेट में जाकर उसके अन्दर नाग का विष बन जाता है।

15उसने जो धन निगल लिया है, उसे फिर उगल देगा; परमेश्वर उसे उसके पेट में से बाहर निकाल लेगा।

16वह नागों का विष चूसता है; वह करैत के डसने से मारा जाता है।

17वह नदियों को, हां, शहद और दही की धाराओं को देखने न पाएगा।

18जो कुछ उसने प्राप्त किया है उसको उसे लौटा देना पड़ेगा, वह उसे निगलने न पाएगा। अपने कमाए हुए धन का वह उपभोग भी नहीं कर पाएगा,

19क्योंकि उसने कंगालों को पीसकर छोड़ दिया है, और उस घर को हड़प लिया है जिसे उसने नहीं बनाया।

20“इसलिए कि उसकी अभिलाषा का कोई अन्त नहीं, वह अपनी कोई प्रिय वस्तु रखने न पाएगा।

21“निगलने के लिए अब कोई वस्तु शेष न रही, इसलिए उसकी समृद्धि बनी नहीं रहेगी।

22अपनी बहुतायत की भरपूरी में भी वह सकेती में रहेगा; प्रत्येक पीड़ित का हाथ उस पर पड़ेगा।

23जब वह अपना पेट भर रहा हो तब परमेश्वर अपना प्रकोप उस पर भेजेगा, जब वह भोजन कर रहा हो, उस समय परमेश्वर उस पर क्रोधाग्नि बरसाएगा।

24लोहे के हथियार से वह भले ही बच निकले, परन्तु कांसे का धनुष उसे बेध डालेगा।

25तीर खींचकर उसकी पीठ से निकाला जाएगा, हां, उसकी चमकदार नोक उसके पित्त से निकलेगी। भय उसको धर दबोचेगा।

26उसकी सम्पत्ति का भाग घोर अन्धकार है, वह ऐसी आग से भस्म होगा जो मनुष्य की लगाई हुई न हो; वही उसके डेरे में बचे हुओं को भी भस्म कर डालेगी।

27आकाश उसका अधर्म प्रकट कर देेगा, और पृथ्वी उसके विरुद्ध उठ खड़ी होगी।

28उसके घर की समृद्धि जाती रहेगी, वह परमेश्वर के क्रोध के दिन बह जाएगी।

29परमेश्वर की ओर से दुष्ट का भाग, वरन् उसके लिए परमेश्वर की ओर से ठहराई हुई मीरास यही है।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)