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पुराना नियम · अय्यूब · अध्याय 32 / 42

अय्यूब 32

1तब इन तीनों व्यक्तियों ने यह देखकर कि अय्यूब अपनी दृष्टि में निर्दोष है, उसको उत्तर देना छोड़ दिया।

2परन्तु राम के कुल के बूजी बारकेल के पुत्र एलीहू का क्रोध भड़क उठा। अय्यूब पर उसका क्रोध इसलिए भड़का कि उसने परमेश्वर के सामने अपने आपको निर्दोष ठहराया।

3फिर उसका क्रोध उसके तीनों मित्रों पर इसलिए भड़का कि वे उत्तर तो दे नहीं सके, फिर भी उन्होंने अय्यूब को दोषी ठहराया था।

4एलीहू तो यह जानकर कि ये लोग आयु में मुझसे बड़े हैं, अय्यूब से बात करने से रुका रहा।

5पर जब एलीहू ने देखा कि उन तीनों के पास कोई उत्तर न रहा तब उसका क्रोध भड़क उठा।

6अतः बूजी बारकेल का पुत्र एलीहू अपनी बात कहने लगाः “मैं तो आयु में छोटा हूं और तुम बड़े हो; इसलिए मैं संकोच करता रहा और तुम्हें अपना विचार बताने से डरता था।

7मैंने सोचा, जो आयु में बड़े हैं, वे ही बोलें, तथा जो बहुत वर्ष के हैं वे ही बुद्धि की बातें सिखाए।

8परन्तु यह तो मनुष्य में आत्मा के द्वारा ही है, और सर्वशक्तिमान् की श्वास ही समझ देती है।

9बुद्धिमान केवल बड़ी आयु वाले ही नहीं होते, न वयोवृद्ध ही न्याय को समझते है।

10अतः मैं कहता हूं, ‘मेरी सुन, मैं भी अपना विचार बताऊंगा।’

11“मैं तो तुम्हारे वचनों के लिए ठहरा रहा, मैंने तुम्हारे तर्कों को सुना जबकि तुम शब्द खोज रहे थे।

12मैंने ध्यान से तुम्हारी सुनी, देखो, किसी ने भी अय्यूब का खंडन नहीं किया, और तुममें से एक भी न था जिसने उसके वचनों को उत्तर दिया।

13ऐसा न कहो कि, हमने बुद्धि प्राप्त कर ली है; परमेश्वर ही उसे निरुत्तर कर सकता है, मनुष्य नही।

14उसने मेरे विरुद्ध कुछ नहीं कहा, न मैं तुम्हारे तर्कों से उसे उत्तर दूंगा।

15“वे अवाक रह गए और कुछ उत्तर नहीं देते, उन्हें शब्द ही नहीं मिलते।

16इसलिए कि वे बोलते नहीं, और चुप रहकर कोई उत्तर नहीं देते तो क्या मैं रुका रहूं?

17अब मैं भी उत्तर दूंगा, मैं भी अपना विचार प्रकट करूंगा।

18क्योंकि मेरे मन में बाते भरी हैं; और मेरी आत्मा मुझे उभार रही है।

19देखो, मेरा पेट बन्द रखी मदिरा के समान है वह नई कुप्पियों के समान फट जाने पर है।

20शान्ति पाने के लिए मुझे बोलने दो, मुझे होंठ खोलकर उत्तर देने दो।

21न मैं किसी का पक्ष लूंगा, और न किसी की चापलूसी करूंगा।

22क्योंकि मुझे चापलूसी करना आता ही नहीं, नहीं तो मेरा सृजनहार मुझे शीघ्र उठा लेता।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)