पुराना नियम · अय्यूब · अध्याय 37 / 42
अय्यूब 37
1“इस बात पर भी मेरा हृदय कांपता है और अपने स्थान से उछल पड़ता है।
2परमेश्वर की आवाज के गर्जन को और उस गड़गड़ाहट को, जो उसके मुख से निकलती है, ध्यान से सुनो।
3उसको वह सम्पूर्ण आकाश के नीचे और अपनी बिजली को पृथ्वी के छोर तक फैला देता है।
4उसके बाद एक गर्जन सुनाई देती है; वह अपनी प्रतापी आवाज से गरजता है। और जब उसकी आवाज सुनाई देती है तब वह बिजली को नहीं रोकता।
5परमेश्वर अद्भुत गर्जन से अपनी आवाज सुनाता है, और बड़े-बड़े काम करता है जिनको हम नहीं समझ सकते।
6क्योंकि हिम से वह कहता है, ‘पृथ्वी पर गिर!’ तथा मूसलाधार वर्षा और बारिश से, ‘जमकर बरसो!’
7वह प्रत्येक मनुष्य के हाथ को रोक देता है, कि सब मनुष्य उसके कार्य को समझ सके।
8तब वनपशु अपनी गुफाओं में घुस जाते, और अपनी-अपनी मांदों में रहते है।
9दक्षिण की ओर से आंधी, तथा उत्तर से शीत-लहर आती है।
10परमेश्वर के श्वास से बर्फ बनती है, और विशाल सागर भी जम जाते है।
11साथ ही वह घने बादल पर नमी लादता, और अपनी बिजली से बादल को तितर-बितर कर देता है।
12और यह उसके निर्देशन के अनुसार दिशा बदलते हुए इधर-उधर फिरता है। जिससे आबाद पृथ्वी पर उसकी प्रत्येक आज्ञा को पूरी करे।
13चाहे सुधार के लिए, चाहे अपने संसार के लिए, चाहे करुणा के लिए, वह इसे भेजता है।
14“हे अय्यूब, इसे सुन, जरा रुक कर परमेश्वर के अद्भुत कार्यों पर विचार करः
15क्या तू जानता है कि परमेश्वर इन्हें किस प्रकार स्थापित करता, और अपने बादल से बिजली चमकाता है?
16क्या तू घटाओं का हवा में तैरना, और जो सिद्ध ज्ञानी है उसके आश्चर्यकर्मों को समझता है?
17जब दक्षिणी हवा के कारण भूमि पर सन्नाटा छाया रहता है तब तेरे कपड़े क्यों गर्म रहते हैं?
18क्या तू उसके साथ आकाशमंडल को तान सकता है जो ढाले हुए दर्पण के समान दृढ़ है?
19हमें सिखा कि हम उससे क्या कहेंगे; अज्ञान के कारण हम अपना वक्तव्य रच नहीं सकते;
20क्या उसे बताया जाए कि मैं बोलना चाहता हूं? क्या मनुष्य कहे कि मुझे निगल लिया जाए?
21अभी तो आकाशमंडल में का तेज प्रकाश देखा नहीं जाता, जबकि वायु ने बहकर उसको स्वच्छ कर दिया है।
22उत्तर दिशा से सुनहरी ज्योति आती है, परमेश्वर भययोग्य तेज से विभूषित है।
23सर्वशक्तिमान को हम पा नहीं सकते; वह सामर्थ्य में अति महान् है; वह न्याय और पूर्ण धार्मिकता का उल्लंघन नहीं कर सकता।
24इसीलिए मनुष्य उसका भय मानते हैं; जो अपनी दृष्टि में बुद्धिमान हैं उनकी वह परवाह नहीं करता।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)