पुराना नियम · लैव्यवस्था · अध्याय 22 / 27
लैव्यवस्था 22
1तब यहोवा ने मूसा से कहा,
2“हारून और उसके पुत्रों से कह कि वे इस्राएलियों की पवित्र भेंटो के प्रति जिन्हें वे मेरे लिए अर्पित करते हैं, सावधानी बरतें, कहीं वे मेरे पवित्र नाम को अपवित्र न करे। मैं यहोवा हू।
3उनसे कह कि तुम्हारी पीढ़ी-पीढ़ी में जो कोई तुम्हारे वेश में से अपनी अशुद्धता की दशा में उन पवित्र वस्तुओं के पास जाए, जिन्हें इस्राएली लोग यहोवा के लिए अर्पित करते हैं, वह व्यक्ति मेरे सामने से हटा दिया जाए। मैं यहोवा हू।
4हारून के वंश में से जो कोढ़ी या प्रमेह का रोगी हो वह जब तक पवित्र न हो जाए, अर्पित वस्तुओं में से कुछ न खाए और जो कोई ऐसी वस्तु को जो लोथ के कारण अशुद्ध हो गई हो या उस व्यक्ति को छुए जिसका वीर्य स्खलित हो,
5या जो किसी रेंगने वाले जन्तु को जिसके छूने से वह अशुद्ध हो सकता है या किसी ऐसे मनुष्य को छुए जिसकी अशुद्धता, चाहे वह किसी भी प्रकार की हो, उसे भी लग सकती है,
6तो वह व्यक्ति जो इनमें से किसी को छुए संध्या तक अशुद्ध रहेगा और जब तक जल से स्नान न कर ले तब तक पवित्र वस्तुओं में से कुछ न खाए।
7परन्तु वह सूर्यास्त होने पर शुद्ध ठहरेगा और इसके पश्चात् वह पवित्र वस्तुओं में से खाए, क्योंकि वही उसका भोजन है।
8जो पशु अपने आप से मरा हो या किसी पशु से फाड़ा गया हो उसे खाकर वह अपने आप को अशुद्ध न करे। मैं यहोवा हू।
9इसलिए वे मेरे आदेशों का पालन करें कही ऐसा न हो कि उनको अपवित्र ठहराकर पाप का भार उठाएं और मर जाए। मैं उनको पवित्र करने वाला यहोवा हू।
10“जो व्यक्ति याजक नहीं हैं, पवित्र वस्तु को न खाने पाए। चाहे वह याजक का अतिथि हो या मजदूर हो फिर भी वह कोई पवित्र वस्तु न खाए,
11परन्तु यदि याजक किसी दास को खरीदकर अपनी सम्पत्ति बना ले तो यह दास उसमें से खा सकता है, और जो उसके घर में उत्पन्न हुए हों, वे भी उसके भोजन में से खा सकते है।
12यदि याजक की पुत्री का किसी अन्य पुरफ़ष के साथ विवाह हो जाए तो वह स्त्री उठाई हुईं भेंट में से न खाए।
13परन्तु यदि याजक की पुत्री विधवा हो जाए या त्याग दी जाए और उसकी सन्तान न हो और वह अपनी युवावस्था के दिनों के समान अपने पिता के घर में फिर आकर रहे, तो वह अपने पिता के भोजन में से खाए, परन्तु अन्य कोई उसमें से न खाए।
14परन्तु यदि कोई व्यक्ति अज्ञानता से किसी पवित्र वस्तु को खा ले तो वह उसका पांचवां भाग बढ़ाकर उसे पवित्र भेंटस्वरूप याजक को भर दे।
15और वे इस्राएलियों की पवित्र की हुई वस्तुओं को जिन्हें वे यहोवा के लिए चढ़ाऐं, अपवित्र न करे।
16वे इस प्रकार उनकी चढ़ाई हुई पवित्र वस्तुओं में से खाकर उनको दण्ड के भागी न ठहराए। मैं उनको पवित्र करने वाला यहोवा हू।”
17फिर यहोवा ने मूसा से कहा,
18“हारून और उसकी सन्तान और सब इस्राएलियों से बातें कर, और उनसे यह कहना कि इस्राएल के घराने का, या उन परदेशियों में से जो इस्राएलियों के मध्य में रहते हैं जो कोई मनुष्य भेंट लाता है, चाहे वह मन्नत की या स्वेच्छाबलि की हो, जिसे वह यहोवा के लिए होमबलि चढ़ाए-
19तो वह ग्रहणयोग्य ठहरने के लिए गाय-बैलों या भेंड़-बकरियों में से दोषरहित नर पशु ही चढ़ाए।
20जिसमें कोई दोष हो उसे न चढ़ाना क्योंकि वह तुम्हारे बदले में ग्रहणयोग्य न ठहरेगा।
21और जब कोई अपनी विशेष मन्नत पूरी करने या स्वेच्छाबलि चढ़ाने के लिए गाय-बैलों या भेड़-बकरियों में से यहोवा के सम्मुख मेलबलि चढ़ाए तो ग्रहण होने के लिए अवश्य है कि वह पशु दोष-रहित हो, उसमें कोई भी दोष न हो।
22जो पशु अन्धा, अपंग, या लूला-लंगड़ा हो या जिसके रसौली, खुजली अथवा चाईं हो, ऐसों को यहोवा के लिए बलि न करना और न उन्हें वेदी पर अग्निबलि करके यहोवा के लिए चढ़ाना।
23जिस किसी बछड़े या मेमने का कोई अंग बड़ा या छोटा होने के कारण कुरूप हो उसे तुम स्वेच्छाबलि के लिए चढ़ा सकते हो, परन्तु मन्नत पूरी करने के लिए वह ग्रहणयोग्य न ठहरेगा।
24जिस किसी पशु के अण्ड कुचले या दबे या टूटे या कटे हुए हों उसको तुम यहोवा के लिए न चढ़ाना और न अपने देश में बलिदान करना।
25और न तुम ऐसों को किसी परदेशी के हाथ से लेकर अपने परमेश्वर के भोजन के लिए चढ़ाना, क्योंकि उनके शरीर में बिगाड़ है, उनमें दोष है। अतः वे तुम्हारे बदले में ग्रहणयोग्य न ठहरेंगे।”
26फिर यहोवा ने मूसा से कहा,
27“जब बछड़ा या भेड़ या बकरा उत्पन्न हो तो वह सात दिन तक अपनी मां के साथ रहे और उसके पश्चात् आठवें दिन से वह यहोवा के समक्ष अग्निबलि के लिए ग्रहणयोग्य ठहरे।
28और चाहे गाय हो या भेड़, तुम उसे और उसके बच्चे दोनों को एक ही दिन वध न करना।
29और जब तुम यहोवा के लिए धन्यवाद का मेलबलि चढ़ाओ तो उसे इस प्रकार चढ़ाना कि तुम ग्रहण किए जाओ।
30वह उसी दिन खाया जाए, उसमें से कुछ भी सुबह तक बचने न पाए। मैं यहोवा हू।
31“अतः तुम मेरी आज्ञाओं को मानना और उनका पालन करना। मैं यहोवा हू।
32तुम मेरे पवित्र नाम को अपवित्र न करना, क्योंकि मैं इस्राएलियों के मध्य अवश्य ही पवित्र माना जाऊँगा। मैं तुम्हारा पवित्र करने वाला यहोवा हूं,
33जो तुम्हें मिस्र देश से निकाल लाया कि तुम्हारा परमेश्वर बना रहूँ। मैं यहोवा हू।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)