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पुराना नियम · लैव्यवस्था · अध्याय 5 / 27

लैव्यवस्था 5

1“यदि किसी गवाह को शपथ दिलाई जाकर पूछा जाए कि क्या तूने यह देखा है या इसे जानता है, और वह न बताकर पाप करे, तो उसका अधर्म उसी के सिर पर पड़ेगा।

2अथवा यदि कोई व्यक्ति किसी अशुद्ध वस्तु को अनजाने में छू ले, चाहे वह अशुद्ध वनपशु की या अशुद्ध घरेलू पशु की या रेंगने वाले अशुद्ध जीव-जन्तु की लोथ हो, वह व्यक्ति अशुद्ध होकर दोषी ठहरेगा।

3या यदि कोई व्यक्ति मनुष्य की अशुद्ध वस्तुओं में से किसी वस्तु को अनजाने में छू ले, चाहे वह किसी भी प्रकार की अशुद्धता से अशुद्ध हो जाए, तो जब वह इस बात को जान ले तो वह दोषी ठहरेगा।

4या यदि कोई मनुष्य बिना सोचे-विचारे शपथ खाए, चाहे कोई भी बात बिना सोचे-विचारे शपथ खाकर कहे, तो वह ऐसी बात में दोषी उस समय ठहरेगा जब उसे मालूम हो जाएगा।

5अतः जब वह इन बातों में से किसी एक बात में दोषी हो तब जिस बात में उसने पाप किया हो उसको मान ले।

6और जो पाप उसने किया हो उसके लिए वह यहोवा के सम्मुख दोषबलि भी अर्थात् रेवड़ में से पापबलि के लिए एक भेड़ी या बकरी लेकर आए। तब याजक उसके पाप के लिए प्रायश्चित्त करे।

7“परन्तु यदि वह मेमना न चढ़ा सके तो अपने पाप के कारण दोषबलि के रूप में दो पंडुक या कबूतर के दो बच्चे यहोवा के पास लाए, अर्थात् एक तो पापबलि के लिए और दूसरा होमबलि के लिए।

8वह उन्हें याजक के पास ले आए। याजक पहले उसे चढ़ाए जो पापबलि के लिए है। वह उसका सिर गले से मरोड़ डाले, पर उसे अलग न करे।

9वह पापबलि के लहू में से भी कुछ लेकर वेदी के बाजू पर छिड़के और शेष लहू को वेदी के आधार पर गिर जाने दे। यह पापबलि ठहरेगी।

10और वह दूसरे पक्षी को विधि के अनुसार होमबलि करके चढ़ाए। अतः याजक उसके किए हुए पाप का प्रायश्चित्त करे और उसका वह पाप क्षमा किया जाएगा।

11“यदि वह दो पंडुक या कबूतर के दो बच्चे भी न दे सके तो वह अपने पाप के कारण चढ़ावे के लिए एपा का दसवां भाग मैदा पापबलि करके ले आए। वह उस पर न तो तेल डाले और न लोबान रखे, क्योंकि वह पापबलि है।

12वह उसे याजक के पास लाए और याजक उसमें से अपनी मुट्ठी भरकर उसके स्मरणार्थ भाग को वेदी पर यहोवा के लिए अर्पित अग्निबलि पर होम करे। वह पापबलि ठहरेगा।

13अतः इसमें से जो भी पाप उसने किया हो उसके लिए याजक प्रायश्चित्त करे और उसका वह पाप क्षमा किया जाएगा। तब अन्नबलि के समान शेष भाग याजक का होगा।”

14तब यहोवा ने मूसा से कहा,

15“यदि कोई यहोवा की पवित्र वस्तुओं के प्रति अविश्वास-योग्य रहे और अनजाने में पाप करे तो वह अपने दोषबलि के लिए यहोवा के पास एक दोषरहित मेढ़ा ले आए। दोषबलि का मूल्य चांदी के शेकेल अर्थात् पवित्रस्थान के शेकेल के अनुसार हो।

16और जिस पवित्र वस्तु के सम्बन्ध में उससे पाप हुआ हो उसमें वह पांचवां भाग और बढ़ाकर क्षतिपूर्ति के रूप में याजक को दे। याजक दोषबलि का मेमना चढ़ाकर उसके लिए प्रायश्चित्त करे, तब उसका पाप क्षमा किया जाएगा।

17“और यदि कोई पाप करे और उन कामों में से जिन्हें यहोवा ने मना किया है, किसी काम को करे, तो चाहे उसने अनजाने में किया हो, फिर भी वह दोषी ठहरेगा, और उसका अधर्म उसी के सिर पर पड़ेगा।

18अतः वह दोषबलि के लिए रेवड़ में से एक दोषरहित मेढ़ा याजक के पास लाए। यह ठहराए गए मूल्य के अनुसार हो। वह जिस बात में भूल से पाप करके अनजान रहा उसका प्रायश्चित्त याजक उस व्यक्ति के लिए करे। और उसका वह पाप क्षमा किया जाएगा।

19यह दोषबलि ठहरेगी। ऐसा व्यक्ति निश्चय ही यहोवा के सम्मुख दोषी है।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)