पुराना नियम · लैव्यवस्था · अध्याय 6 / 27
लैव्यवस्था 6
1फिर यहोवा ने मूसा से कहा,
2“यदि कोई व्यक्ति पाप करे और यहोवा के प्रति विश्वासघात करे, अर्थात् धरोहर, लेन-देन या लूटने के द्वारा अपने साथी को धोखा दे, अथवा अपने साथी पर अन्धेर करे,
3या किसी खोई हुई वस्तु को पाकर उसके विषय में झूठ बोले और झूठी शपथ खाए, अर्थात इनमें से कोई भी ऐसा काम करे जिसे करके मनुष्य पाप करता है,
4तो जब वह ऐसा काम करके दोषी ठहरे तब जो वस्तु उसने लूट ली, और जो उसने अन्धेर करके ले ली, तथा वह धरोहर जो उसे सौंपी गई थी, और वह खोई हुई वस्तु जो उसे मिली थी, उसे वह लौटा दे,
5वरन् कोई भी वस्तु जिसके विषय में उसने झूठी शपथ खाई हो, अवश्य है कि वह उसे पूरा-पूरा लौटा दे और उसके साथ पांचवां भाग भी बढ़ाकर दे। जिस दिन वह अपनी दोषबलि चढ़ाए उसी दिन वह वस्तु उसके स्वामी को लौटा दे।
6तब वह यहोवा के सम्मुख दोषबलि चढ़ाए अर्थात् तेरे ठहराए गए मूल्य के अनुसार रेवड़ में से एक दोषरहित मेढ़ा दोषबलि के रूप में याजक के पास ले आए,
7और याजक उसके लिए यहोवा के सम्मुख प्रायश्चित्त करे, तब जिस किसी कार्य को करके वह दोषी ठहरा था उसकी क्षमा उसे मिलेगी।”
8फिर यहोवा ने मूसा से कहा,
9“हारून और उसके पुत्रों को यह कहकर आज्ञा दे कि होमबलि के लिए व्यवस्था इस प्रकार हैः वेदी के ऊपर होमबलि रात भर वरन् भोर तक रहे, और वेदी पर की आग जलती रहे।
10और याजक अपना मलमल का वस्त्र पहने और अपने तन पर मलमल का जांघिया पहने और वेदी से भस्म की गई होमबलि की राख उठाकर वेदी की एक ओर रखे।
11तब वह अपने इन वस्त्रों को उतार कर दूसरे वस्त्र पहने और राख को छावनी से बाहर किसी स्वच्छ स्थान पर ले जाए।
12वेदी पर की आग जलती रहे और कभी बुझने न पाए; और याजक प्रति भोर उस पर लकड़ियां जलाया करे और होमबलि को उसके ऊपर सजाकर रखे और उसके ऊपर मेलबलियों की चरबी को जलाया करे।
13वेदी पर आग निरन्तर जलती रहे, वह कभी बुझने न पाए।
14“अन्नबलि की व्यवस्था इस प्रकार हैः हारून के पुत्र उसे वेदी के आगे यहोवा के सम्मुख ले आए।
15और उनमें से एक जन अन्नबलि में से अपनी मुट्ठी भर तेल से सना हुआ मैदा और अन्नबलि के ऊपर के सब लोबान को लेकर स्मरणार्थ इस भेंट को यहोवा के सम्मुख वेदी पर सुखदायक सुगन्ध होने के लिए होम करे।
16और उसमें से जो बच जाए उसे हारून और उसके पुत्र खाए। वह पवित्रस्थान में बिना ख़मीर के खाया जाए अर्थात् वे उसे मिलापवाले तम्बू के आंगन में खाए।
17वह ख़मीर के साथ न पकाया जाए। मैंने अपनी अिर्ग्नबलियों में से इसे उनका भाग ठहराया है। यह पापबलि और दोषबलि के समान परमपवित्र है।
18हारून की सन्तान के सब पुरफ़ष उसमें से खा सकते है। तुम्हारी पीढ़ी से पीढ़ी तक यहोवा के लिए चढ़ाई गई अग्निबलियों में से यह सदैव उनका निर्धारित भाग ठहरेगा। जो कोई अग्निबलियों को स्पर्श करे वह पवित्र ठहरेगा।”
19और यहोवा ने मूसा से कहा,
20“जिस दिन हारून का अभिषेक किया जाए उस दिन वह तथा उसके पुत्र यहोवा के लिए यह चढ़ावा चढ़ाएं अर्थात् एपा के दसवें भाग के बराबर मैदा, आधा भोर को और आधा संध्या के समय नित्य अन्नबलि करके चढ़ाए।
21वह तवे पर तेल में पकाया जाए। जब वह तर हो जाए तब उसे ले आना। इस अन्नबलि को पकवान के टुकड़ों के रूप में चढ़ाना कि वह यहोवा के लिए सुखदायक सुगन्ध ठहरे।
22और उसके पुत्रों में से जो भी उसके स्थान पर याजक अभिषिक्त हो, वह उसे चढ़ाया करे। यह सदा की विधि होगी कि यहोवा के सम्मुख वह सम्पूर्ण चढ़ावा जलाया जाए।
23याजक की प्रत्येक अन्नबलि पूरी तरह जलाई जाए। वह कभी न खाई जाए।”
24तब यहोवा ने मूसा से कहा,
25“हारून और उसके पुत्रों से कहः पापबलि की व्यवस्था इस प्रकार है कि जिस स्थान में होमबलि-पशु वध किया जाता है, उसी स्थान में पापबलि-पशु भी यहोवा के सम्मुख बलिदान किया जाए। वह परमपवित्र है।
26जो याजक पापबलि चढ़ाए वही उसे खाए। वह पवित्रस्थान में अर्थात् मिलापवाले तम्बू के आंगन में खाया जाए।
27जो कोई उसके मांस को छू ले वह पवित्र ठहरेगा और जब उसके लहू में से कुछ छींटे किसी वस्त्र पर पड़ जाएं तो उसे किसी पवित्रस्थान में धोना।
28मिट्टी का वह पात्र जिसमें वह पकाया गया हो वह तोड़ दिया जाए, परन्तु यदि वह कांसे के पात्र में पकाया गया हो तो उस पात्र को मांजकर पानी से धो दिया जाए।
29और याजको में से प्रत्येक पुरफ़ष उसे खा सकता है। वह परमपवित्र है।
30परन्तु जिस पापबलि के लहू में से कुछ भी लहू मिलापवाले तम्बू के भीतर प्रायश्चित्त करने के लिए पहुँचाया जाए तो उसका मांस कभी न खाया जाए, वरन् वह आग में जला दिया जाए।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)