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पुराना नियम · लैव्यवस्था · अध्याय 7 / 27

लैव्यवस्था 7

1“अब दोषबलि की व्यवस्था इस प्रकार है। वह परमपवित्र है।

2जिस स्थान में होमबलि-पशु वध किया जाता है, उसी स्थान पर दोषबलि-पशु भी वध करें और उसके लहू को याजक वेदी के चारो ओर छिड़के।

3और वह उसमें की सब चरबी को चढ़ाए अर्थात् उसकी मोटी पूँछ और उस चरबी को जिससे अँतड़ियाँ ढँपी रहती हैं:

4और दोनों गुर्दे और जो चरबी उनके ऊपर और कमर के पास रहती है और कलेजे पर की झिल्ली गुर्दों सहित-इन सबको वह अलग करेः

5और याजक उनको वेदी पर यहोवा के सम्मुख सुखदायक सुगन्ध के लिए अग्निबलि चढ़ाए। यह दोषबलि है।

6याजकों में से प्रत्येक पुरफ़ष उसमें से खा सकता है। उसे पवित्रस्थान में खाया जाए। वह परमपवित्र है।

7दोषबलि वैसी ही है जैसी कि पापबलि है। उनके लिए एक ही व्यवस्था हैः जो याजक उनसे प्रायश्चित्त करता है वही उनको ले सकता है।

8और जो याजक किसी के लिए होमबलि चढ़ाता है, वही याजक उस होमबलि-पशु की खाल का ले ले।

9इसी प्रकार जो भी अन्नबलि तन्दूर, कड़ाही या तवे में पकाई जाए, वह उसी याजक की होगी जो उसे चढ़ाता है।

10और प्रत्येक अन्नबलि चाहे वह तेल से सनी हुई हो अथवा रूखी हो, वह हारून के पुत्रों को बराबर-बराबर मिले।

11“और यहोवा के लिए चढ़ाई जाने वाली मेलबलि की व्यवस्था यह है।

12यदि वह उसे धन्यवाद के लिए चढ़ाए तो धन्यवादबलि के साथ तेल से सने हुए अख़मीरी फुलके और तेल से चुपड़ी हुई अख़मीरी रोटियाँ और तेल से सने तथा भली-भांती गूंधे हुए मैदे के फूलके चढ़ाए।

13धन्यवाद की मेलबलि के चढ़ावे के साथ वह ख़मीरी रोटियाँ भी चढ़ाए।

14और प्रत्येक चढ़ावे में से वह एक रोटी यहोवा के लिए उठाने की भेंट करके चढ़ाए और यह उस याजक का भाग हो जो मेलबलियों का लहू छिड़कता है।

15“धन्यवाद बलि वाले मेलबलि के चढ़ावे का मांस बलिदान करने के दिन ही खाया जाए। उसमें से भोर तक कुछ शेष न रहे।

16परन्तु यदि उसके चढ़ावे का बलिदान मन्नत का अथवा स्वेच्छा का हो, तो जिस दिन बलिदान चढ़ाया जाए उसी दिन उसे खाया जाए, और जो कुछ बच जाए वह दूसरे दिन खाया जाए।

17परन्तु जो कुछ उस बलिदान के मांस में से तीसरे दिन तक रह जाए वह आग में जला दिया जाए।

18अतः यदि उसके मेलबलि के मांस में से कुछ भी तीसरे दिन खाया जाए तो उसका चढ़ाने वाला ग्रहण नहीं किया जाएगा और न यह उसके हित में गिना जाएगा। यह एक घृणित कार्य समझा जाएगा, और जो व्यक्ति उसे खाए उसका अधर्म उसी के सिर पर पड़ेगा।

19“फिर यह भी कि जो मांस किसी अशुद्ध वस्तु से छू जाए वह खाया न जाए। वह आग में जला दिया जाए। शेष मांस के सम्बन्ध में यह कि जो कोई शुद्ध हो वह ऐसे मांस को खा सकता है,

20परन्तु यदि कोई व्यक्ति अपनी अशुद्धता में यहोवा के लिए चढ़ाए गए मेलबलि का मांस खाए तो वह अपने लोगों में से नष्ट किया जाए।

21यदि कोई किसी अशुद्ध वस्तु को छुए, चाहे वह मनुष्य की अशुद्धता हो, या अशुद्ध पशु हो, या कोई अशुद्ध घृणित वस्तु हो, और फिर यहोवा के लिए चढ़ाए मेलबलि-पशु के मांस में से खाए तो वह व्यक्ति भी अपने लोगों में से नष्ट किया जाए।”

22फिर यहोवा ने मूसा से कहा,

23“इस्राएलियों से कहः तुम न तो बैल, न भेड़, और न बकरी की कुछ चरबी खाना।

24जो पशु स्वाभाविक रीति से मर गया हो और वह पशु भी जिसको हिंसक पशु ने फाड़ डाला हो, उनकी चरबी किसी भी अन्य काम मेें लाई जा सकती है, परन्तु तुम उसे कदापि न खाना।

25क्योंकि जो कोई ऐसे पशु की चरबी में से खाए जिसे यहोवा के लिए अग्निबलि करके चढ़ाया गया हो, वह खाने वाला अपने लोगों में से नष्ट किया जाएगा।

26और तुम जहां कहीं रहो, किसी भी प्रकार का लहू, चाहे वह पशु का अथवा पक्षी का हो, न खाना।

27जो भी व्यक्ति किसी प्रकार का लहू खाए, वह अपने लोगों में से नष्ट किया जाए।”

28तब यहोवा ने मूसा से कहा,

29“इस्राएलियों से कहः जो कोई यहोवा के लिए मेलबलि चढ़ाए वह उसी मेलबलि में से यहोवा के पास अपनी भेंट ले आए।

30वह अपने ही हाथों में यहोवा के लिए अग्निबलि लेकर आए अर्थात् चरबी को सीना सहित लाए कि सीने को हिलाने की भेंट करके यहोवा के सामने चढ़ाया जाए।

31और याजक चरबी को वेदी पर होम करे, परन्तु सीना हारून तथा उसके पुत्रों का हो।

32और तुम अपने मेलबलियों मेें से दाहिनी जांघ को उठाने की भेंट के रूप में याजक को देना।

33हारून के पुत्रों में से जो मेलबलि के लहू और चरबी को चढ़ाए, दाहिनी जांघ उसी का भाग हो।

34क्योंकि इस्राएलियों के मेलबलियों में से हिलाने की भेंट के सीने और उठाने की भेंट की जांघ को मैंने हारून याजक और उसके पुत्रों को दिया है कि इस्राएलियों की ओर से यह सर्वदा उनका अधिकार बना रहे।

35“यह यहोवा की अग्निबलियों में से हारून और उसके पुत्रों के लिए पवित्र किया हूआ भाग है, जो उस दिन निर्धारित किया गया जब वे यहोवा के सम्मुख याजक की सेवा करने के लिए उपस्थित किए गए।

36जिस दिन यहोवा ने उनका अभिषेक किया उसी दिन उसने आज्ञा दी कि उनको इस्राएलियों की ओर से सदैव यही भाग मिला करे। पीढ़ी से पीढ़ी तक सदा के लिए उनका यही अधिकार ठहराया गया।”

37होमबलि, अन्नबलि, पापबलि, दोषबलि, याजकों के संस्कार-बलि, और मेलबलि की यही व्यवस्था है।

38इसकी आज्ञा यहोवा ने मूसा को उस दिन सीनै पर्वत पर दी जिस दिन उसने इस्रएलियों से कहा कि सीनै के जंगल में यहोवा के सम्मुख अपने बलिदान चढ़ाए।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)