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पुराना नियम · लैव्यवस्था · अध्याय 8 / 27

लैव्यवस्था 8

1तब यहोवा ने मूसा से कहा,

2“हारून और उसके साथ उसके पुत्रों को, वस्त्रों को, अभिषेक के तेल को, और पापबलि के बछड़े को, और दोनों मेढ़ों को, और अख़मीरी रोटी की टोकरी को साथ ले,

3और सारी सभा को मिलापवाले तम्बू के द्वार पर एकत्रित कर।”

4मूसा ने यहोवा के आज्ञानुसार किया। जब सारी मंडली मिलापवाले तम्बू के द्वार पर एकत्रित हुई,

5तब मूसा ने मंडली से कहा, “जिस कार्य के करने की आज्ञा यहोवा ने दी है वह यही है।”

6तब मूसा ने हारून और उसके पुत्रों को पास बुलाया, और उनको जल से नहलाया।

7और उसने हारून को कुरता पहनाया, उस पर कमरबन्द लपेटा, उसे बागा पहनाया, और उस पर एपोद लगाया और एपोद के कलात्मक कमरबन्द को उसके ऊपर लपेटा।

8तब उसने सीनाबन्द को उसके ऊपर लगाकर सीनाबन्द में ऊरीम और तुम्मीम लगा दिए।

9उसने उसके सिर पर पगड़ी भी रखी और पगड़ी के सामने स्वर्ण-चक्र को अर्थात् पवित्र मुकुट को लगाया जैसा कि यहोवा ने मूसा को आज्ञा दी थी।

10तब मूसा ने अभिषेक का तेल लिया और तम्बू तथा जो कुछ उसमें था, सबका अभिषेक करके उन्हें पवित्र किया।

11और उसने उसमें से कुछ लेकर वेदी के ऊपर सात बार छिड़का तथा वेदी और उसके सब पात्रों को और हौज और उसके पायदान को भी पवित्र करने के लिए उनका अभिषेक किया।

12तब उसने अभिषेक के कुछ तेल हारून के सिर पर डालकर उसका अभिषेक किया कि उसे पवित्र करे।

13उसके पश्चात् मूसा ने हारून के पुत्रों को पास बुलाकर उन्हें कुरते पहनाए, कमरबन्द बांधे, और टोपियां पहनाई, जैसा कि यहोवा ने मूसा को आज्ञा दी थी।

14तब वह पापबलि का बछड़ा ले आया और हारून तथा उसके पुत्रों ने पापबलि के बछड़े पर अपने हाथ रखे।

15इसके पश्चात् मूसा ने उसको बलि किया और अपनी उंगली से उसका कुछ लहू लेकर वेदी के सींगों के चारों ओर लगाया और वेदी को पवित्र किया। तब उसने शेष लहू वेदी के आधार पर डालकर उसे पवित्र किया कि उसके लिए प्रायश्चित्त करे।

16मूसा ने अँतड़ियों के ऊपर की चरबी को भी लिया और कलेजे के ऊपर की झिल्ली और दोनों गुर्दों और उनकी चरबी को लेकर वेदी पर होम किया।

17परन्तु बछड़े और उसके चमड़े, मांस और गोबर को उसने छावनी के बाहर आग में जलाया जैसा कि यहोवा ने मूसा को आज्ञा दी थी।

18तब वह होमबलि का मेढ़ा ले आया और हारून तथा उसके पुत्रों ने उस मेढ़े के सिर पर अपने हाथ रखे।

19और मूसा ने उसे बलि किया और उसके लहू को वेदी पर चारों ओर छिड़का।

20मूसा ने मेढ़े को टुकड़े-टुकड़े करके उसके सिर और टुकड़ों तथा चरबी को होम किया।

21जब मूसा अँतड़ियों और पैरों को पानी से धो चुका तब उसने पूरे मेढ़े को वेदी पर होम किया। यह सुखदायक सुगन्ध वाली होमबलि थी। यह यहोवा के लिए अग्निबलि थी, जैसा कि यहोवा ने मूसा को आज्ञा दी थी।

22तब वह दूसरा मेढ़ा ले आया अर्थात् संस्कार-बलि का मेढ़ा ले आया, और हारून तथा उसके पुत्रों ने मेढ़े के सिर पर अपने हाथ रखे।

23और मूसा ने उसको बलि किया और उसके लहू में से कुछ लेकर हारून के दाहिने कान की लौ तथा दाहिने हाथ और दाहिने पैर के अंगूठों पर लगाया।

24उसने हारून के पुत्रों को भी पास बुलाया और मूसा ने प्रत्येक के दाहिने कान की लौ पर तथा दाहिने हाथ और दाहिने पैर के अंगूठों पर कुछ लहू लगाया। तब मूसा ने शेष लहू वेदी पर चारों ओर छिड़क दिया।

25और उसने चरबी, मोटी पूँछ, अँतड़ियों के ऊपर की चरबी, और कलेजे पर की झिल्ली सहित दोनों गुर्दे और उनकी चरबी, तथा दाहिनी जांघ को लिया,

26और अख़मीरी रोटी की टोकरी जो यहोवा के सामने थी, उसमें से उसने एक अख़मीरी रोटी ली और तेल से सनी रोटी का एक फुलका और एक चपाती निकालकर उसे चरबी और दाहिनी जांघ के ऊपर रख दिया।

27तब उसने इन सबको हारून और उसके पुत्रों के हाथों पर रखा और यहोवा के सम्मुख हिलाने वाली भेंट करके चढ़ाया।

28तब मूसा ने इन्हें उनके हाथों से लेकर होमबलि के साथ वेदी पर होम किया। वे सुखदायक सुगन्ध के लिए संस्कार-बलि थे। यह यहोवा के लिए अग्निबलि थी।

29मूसा ने सीने को भी लेकर यहोवा के सामने इसे हिलाने वाली भेंट करके चढ़ाया। यह संस्कार-बलि के मेढ़ेे में से मूसा का भाग था जैसा कि यहोवा ने मूसा को आज्ञा दी थी।

30अतः मूसा ने अभिषेक के तेल और वेदी पर के लहू में से कुछ लेकर उसे हारून और उसके वस्त्रों पर तथा उसके पुत्रों और उनके वस्त्रों पर छिड़क दिया। इस प्रकार उसने हारून और उसके वस्त्रों को, तथा उसके पुत्रों और उनके वस्त्रों को पवित्र किया।

31तब मूसा ने हारून और उसके पुत्रों से कहा, “मिलापवाले तम्बू के द्वार पर उस मांस को उबालो और उसे संस्कारबलि की टोकरी की रोटी के साथ वहीं खाओ, जैसा कि मैंने यह कहकर आज्ञा दी है कि हारून और उसके पुत्र उसे खाए।

32जो मांस और रोटी बच जाए उसको तुम आग में जला देना।

33और तुम मिलापवाले तम्बू के द्वार से सात दिन तक बाहर न जाना जब तक कि तुम्हारे संस्कार के दिन पूरे न हो जाएं, क्योंकि वह तुम्हारा संस्कार सात दिन तक करता रहेगा।

34जैसा आज किया गया है वैसा ही करने की आज्ञा यहोवा ने दी है कि तुम्हारे लिए प्रायश्चित्त किया जाए।

35अतः तुम मिलापवाले तम्बू के द्वार पर सात दिन तक दिन-रात ठहरे रहना और यहोवा की आज्ञा को मानना कि तुम मर न जाओ, क्योंकि मुझे ऐसी ही आज्ञा मिली है।”

36इस प्रकार हारून और उसके पुत्रों ने वह सब कुछ किया जिसकी यहोवा ने मूसा के द्वारा आज्ञा दी थी।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)