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पुराना नियम · मलाकी · अध्याय 2 / 4

मलाकी 2

1“और अब हे याजको यह आज्ञा तुम्हारे लिए है।

2यदि तुम न सुनो, और हृदय से मेरे नाम का आदर न करो तो सेनाओं का यहोवा यों कहता है, “तब मैं तुम पर शाप भेजूंगा, और तुम्हारी आशीषों पर मेरा शाप पड़ेगा, वरन् तुम जो इस पर मन नहीं लगाते हो, इस कारण उन पर मेरा शाप पड़ चुका है।

3देखो, मैं तुम्हारे वंश को झिड़कूंगा, और मैं तुम्हारे मुंह पर कचरा अर्थात् तुम्हारे यज्ञ-पशुओं का कचरा फैलाऊंगा, और उसके साथ तुम भी उठाकर फेंक दिए जाओगे।

4तब तुम जानोगे कि यह आज्ञा मेरी ओर से निकली कि लेवी के साथ मेरी वाचा बनी रहे,” सेनाओं के यहोवा का यही वचन है।

5उसके साथ मेरी वाचा जीवन और शान्ति की थी, और मैंने यह इसलिए उसको दिया, कि वह भय मानता रहे; अतः उसने मेरा भय माना, और मेरे नाम से अत्यन्त भय खाता रहा।

6उसे सच्ची शिक्षा कंठस्थ थी, और उसके होंठों से कुटिल बात नहीं निकलती थी। वह शान्ति और खराई से मेरे संग-संग चलता रहा, और वह बहुतों को अधर्म से लौटा ले आया।

7क्योंकि याजक को चाहिए कि वह अपने होठों से ज्ञान की रक्षा करे और लोग उसके मुंह से शिक्षा की अभिलाषा रखें क्योंकि वह तो सेनाओं के यहोवा का दूत है।

8परन्तु तुम लोग तो मार्ग से भटक गए हो तुम बहुतों के लिए शिक्षा के द्वारा ठोकर का कारण हुए; सेनाओं के यहोवा का यह वचन है तुमने लेवी की वाचा को तोड़ दिया है,

9इसलिए मैंने भी तुमको सब लोगों के सामने तुच्छ और नीचा कर दिया है, क्योंकि तुम मेरे मार्गों पर नहीं चलते परन्तु शिक्षा देने में मुंह देखा विचार करते हो।

10“क्या हम सभों का एक ही पिता नहीं? क्या एक ही परमेश्वर ने हमको उत्पन्न नहीं किया? हम क्यों अपने भाई से विश्वासघात करके अपने पूर्वजों की वाचा का अपमान करते हैं?

11यहूदा ने विश्वासघात किया है और इस्राएल और यरूशलेम में घृणित काम किया है; क्योंकि यहूदा ने पराए देवता की पुत्री से विवाह करके यहोवा के प्रिय और पवित्रस्थान को अपवित्र किया।

12जो भी पुरुष ऐसा करे, उसको अर्थात् प्रत्येक जागने और उत्तर देने वाले को तथा सेनाओं के यहोवा के लिए अन्नबलि चढ़ाने वाले को याकूब के तम्बुओं में से यहोवा मिटा डाले।

13दूसरा काम फिर तुम यह करते हो, कि यहोवा की वेदी को रोने और आहें भरने वालों के आसुंओं से भिगो देते हो, क्योंकि अब न तो वह तुम्हारी भेंट की ओर दृष्टि करता और न प्रसन्न होकर उसे तुम्हारे हाथ से ग्रहण करता है।

14फिर भी तुम पूछते हो, ऐसा क्यों है? इसलिए कि यहोवा तेरे और तेरी जवानी की पत्नी के बीच साक्षी है। यघपि वह तेरी जीवन-संगिनी और ब्याही हुई पत्नी है, तूने उसके साथ विश्वासघात किया है।

15परन्तु जिनमें आत्मा का कुछ प्रभाव रह गया है उनमें से एक ने भी ऐसा नहीं किया। और ऐसों ने परमेश्वर का भय मानने वाली सन्तान पाने के लिए किया? इसलिए तुम अपने मन की चौकसी करो, और तुममें से कोई अपनी जवानी की पत्नी से विश्वासघात न करे।

16क्योंकि मैं तलाक से घृणा करता हूं,” इस्राएल के यहोवा परमेश्वर का यही वचन है, “और उससे भी जो अन्याय का वस्त्र ओढ़ता है।” सेनाओं के यहोवा का यही वचन है। “इसलिए तुम अपने मन की चौकसी करो, कि तुम विश्वासघात न करो।”

17तुम लोगों ने बातों से यहोवा को उकता दिया है और फिर भी तुम पूछते हो, “हमने किस बात से उसे उकता दिया है?” ऐसा कहकर कि जो कोई बुरा करता है वह यहोवा की दृष्टि में अच्छा होता है, वरन् यहोवा ऐसे लोगों से प्रसन्न रहता है, और यह कि न्यायी परमेश्वर कहां है?

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)