पुराना नियम · मलाकी · अध्याय 3 / 4
मलाकी 3
1“देखो, मैं अपने दूत काे भेजता हूं, और वह मेरे आगे-आगे मार्ग सुधारेगा। और प्रभु जिसे तुम ढूंढ़ते हो, वह अचानक अपने मन्दिर में आ जाएगा, और वाचा का वह दूत जिससे तुम प्रसन्न होते हो, सुनो वह आता है,” सेनाओं के यहोवा का यही वचन है।
2“परन्तु उसके आगमन के दिन को कौन सह सकेगा? और जब वह प्रकट हो, तब कौन खड़ा रह सकेगा? क्योंकि वह सुनार की आग और धोबी की साबुन के समान है।
3वह चांदी का गलाने और शुद्ध करने वाले के समान बैठेगा और लेवियों को शुद्ध करके उन्हें सोने और चांदी के समान ताएगा जिससे वे यहोवा के लिए धार्मिकता से भेंट चढ़ा सके।
4तब यहूदा और यरूशलेम की भेंट यहोवा को ऐसी भाएगी, जैसी बीते दिनों अर्थात् प्राचीनकाल में भाती थी।
5तब मैं न्याय करने के लिए तुम्हारे निकट आऊंगा; और टोन्हों और व्यभिचारियों और झूठी शपथ खाने वालों के विरुद्ध, और जो मजदूर की मजदूरी दबाते, और विधवा और अनाथ पर अन्धेर करते, और जो परदेशी का न्याय बिगाड़ते, और मेरा भय नहीं मानते उन सबके विरुद्ध मैं शीघ्रता से साक्षी दूंगा,” सेनाओं के यहोवा का यही वचन है।
6“क्योंकि मैं यहोवा बदलता नहीं; इसीलिए हे याकूब की सन्तान तुम नष्ट नहीं हुए।”
7“अपने पूर्वजों के दिनों से तुम लोग मेरी विधियों से हटते आए हो, और तुमने उनका पालन नहीं किया। तुम मेरी ओर फिरो, तब मैं भी तुम्हारी ओर फिरूंगा,” सेनाओं के यहोवा का यही वचन है। “परन्तु तुम पूछते हो, ‘हम किस बात में फिरें?’
8क्या मनुष्य परमेश्वर को लूट सकता है? फिर भी तुम मुझे लूटते हो! परन्तु तुम पूछते हो,’ हमने किस बात में तुझे लूटा है?’ दशमांश और भेंटों मे।
9तुम पर भारी शाप पड़ा है, क्योंकि तुम मुझे लूटते हो; वरन् सारी जाति ऐसा करती है!
10सेनाओं के यहोवा का यह वचन है; सारे दशमांश भंडार में ले आओ कि मेरे भवन में भोजन-वस्तु रहे, और ऐसा करके मुझे परखो, कि मैं तुम्हारे लिए आकाश के झरोखे खोलकर, तुम्हारे ऊपर अपरम्पार आशीष की वर्षा करता हूं कि नही।
11तब मैं तुम्हारे लिए विनाश करने वाले को ऐसा घुड़कूंगा कि वह तुम्हारी भूमि की उपज को नष्ट न करेगा; न ही तुम्हारी दाखलताओं के फल कच्चे गिरेंगे,” सेनाओं के यहोवा का यही वचन है।
12“तब सारी जातियां तुमको धन्य कहेंगी क्योंकि तुम्हारा देश मनोहर देश होगा,” सेनाओं के यहोवा का यही वचन है।
13यहोवा यह कहता है कि तुमने मेरे विरुद्ध ढिठाई की बातें कही है। फिर भी तुम पूछते हो कि हमने तेरे विरुद्ध क्या कहा है?
14तुमने कहा है, कि परमेश्वर की सेवा करना व्यर्थ है; और हमने जो उसके बताए हुए कामों को पूरा किया, और सेनाओं के यहोवा के सामने शोक का पहरावा पहने हुए चले, तो इससे क्या लाभ हुआ?
15अतः अभिमानियों को हम धन्य कहते हैं क्योंकि न केवल दुराचारी सफल हुए, वरन् वे परमेश्वर की परीक्षा करते हैं और बच जाते है।
16तब यहोवा का भय मानने वालों ने आपस में बातें कीं, और यहोवा ने ध्यान देकर सुनी, और जो यहोवा का भय मानते और उसके नाम का सम्मान करते थे, उनके स्मरण के निमित्त उसके सामने एक पुस्तक लिखी जाती थी।
17सेनाओं का यहोवा यह कहता है कि जिस दिन मैं अपना निज भाग ठहराऊं उस दिन वे मेरे ठहरेंगे, और मैं उन पर ऐसी करुणा करूंगा जैसा कोई अपने सेवा करने वाले पुत्र पर करता है।
18तब तुम फिर एक बार धर्मी और दुष्ट का भेद, अर्थात् जो पमरेश्वर की सेवा करता है और जो नहीं करता, उन दोनों में भेद कर सकोगे।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)