नया नियम · मत्ती · अध्याय 4 / 28
मत्ती 4
1तब आत्मा यीशु को जंगल में ले गया किशैतान द्वारा उसकी परीक्षा हो।
2जब वह चालीस दिन और चालीस रात उपवास कर चुका तब उसे भूख लगी।
3और परखने वाले ने निकट आकर उससे कहा, “यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो आज्ञा दे कि ये पत्थर रोटियां बन जाए।”
4पर उसने उत्तर दिया, “यह लिखा है, ‘मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है जीवित रहेगा’।”
5तब शैतान उसे पवित्र नगर में ले गया और मन्दिर के शिखर पर खड़ा करके,
6उसने उससे कहा, “यदि तू परमेश्वर का पुत्र है तो अपने आप को नीचे गिरा दे; क्योंकि लिखा है, ‘वह तेरे विषय में अपने स्वर्गदूतों को आज्ञा देगा, और वे तुझे हाथों-हाथ उठा लेंगे, कहीं ऐसा न हो कि तेरे पैरों में पत्थर से ठेस लगे’।”
7यीशु ने उससे कहा, “यह भी लिखा हैः ‘तू प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न कर’।”
8फिर शैतान उसे एक बहुत ऊंचे पर्वत पर ले गया, और संसार के सारे राज्य और वैभव को दिखाकर
9उसने कहा, “यदि तू गिरकर मुझे दण्डवत करे तो मैं यह सब कुछ तुझे दे दूंगा।”
10तब यीशु ने उससे कहा, “हे शैतान, दूर हट, क्योंकि लिखा है, ‘तू प्रभु अपने परमेश्वर को दण्ड्वत कर-और केवल उसी की सेवा कर’।”
11तब शैतान उसे छोड़कर चला गया, और देखो, स्वर्गदूत आकर उसकी सेवा-टहल करने लगे।
12और जब उसने सुना कि यूहन्ना बन्दी बना लिया गया है, तो यह गलील को चला गया।
13और वह नासरत को छोड़कर कफरनहूम में जो झील के किनारे जबूलून और नप्ताली के क्षेत्र में है, रहने लगा
14जिससे कि वह बात जो यशायाह नबी द्वारा कही गई थी पूरी होः
15“जबूलून और नप्ताली के देश, झील के मार्ग से यरदन के पार, गैरयहूदियों का गलील-
16जो लोग अन्धकार में बैठे थे उन्होंने बड़ी ज्योति देखी। जो मृत्यु के देश और छाया में बैठे थे, उन पर एक ज्योति चमकी।”
17उस समय से यीशु ने यह प्रचार करना और कहना आरम्भ कियाः “मन फिराओ, क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है।”
18गलील की झील के किनारे चलते हुए उसने दो भाइयों को अर्थात् शमौन जो पतरस कहलाता था तथा उसके भाई अन्द्रियास को झील में जाल डालते देखा; वे तो मछुए थे।
19उसने उनसे कहा, “मेरे पीछे चलो। मैं तुम्हें मनुष्यों के मछुए बनाऊंगा।”
20वे तुरन्त जालों को छोड़कर उसके पीछे चल पड़े।
21वहां से आगे बढ़कर उसने अन्य दो भाइयों, अर्थात् जब्दी के पुत्र याकूब और उसके भाई यूहन्ना को देखा जो अपने पिता जब्दी के साथ नाव पर जालों को सुधार रहे थे, और उसने उन्हें बुलाया।
22वे तुरन्त अपनी नाव और पिता को छोड़कर उसके पीछे चल पड़े।
23यीशु सारे गलील में फिरता हुआ उनके आराधनालयों में उपदेश करता, राज्य का सुसमाचार प्रचार करता, और लोगों की हर प्रकार की बीमारी और हर प्रकार की दुर्बलता को दूर करता फिरा।
24और उसकी चर्चा सम्पूर्ण सीरिया में फैल गई और लोग सब बीमारों को जो विभिन्न प्रकार की बीमारियों तथा दुखों से ग्रसित थे, और जिनमें दुष्टात्माएं थीं, मिर्गी वालों को, लकवे के मारे हुओं को-सब को उसके पास लाए और उसने उन्हें चंगा किया।
25और गलील और दिकापुलिस और यरूशलेम और यहूदिया और यरदन नदी के पार से भीड़ की भीड़ उसके पीछे चल पड़ी।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)