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पुराना नियम · नहेमायाह · अध्याय 10 / 13

नहेमायाह 10

1छाप लगे दस्तावेज पर इन लोगों के नाम थे हकल्याह का पुत्र नहेमायाह जो राज्यपाल था, और सिदकिय्याह,

2सरायाह, अजर्याह, यिर्मयाह,

3पशहूर, अमर्याह, मल्किय्याह,

4हत्तूश, शबन्याह, मल्लूक,

5हारीम, मरेमोत, ओबघाह,

6दानिय्येल, गिन्नतोन, बारूक,

7मशुल्लमाम, अबिय्याह, मिय्यामीन,

8माज्यह, बिल्गै और शमायाह, ये ही याजक थे।

9और लेवीये थेः आजन्याह का पुत्र येशू, हेनादाद की सन्तान में से बिन्नूई और कदमीएल,

10और उनके भाई शबन्याह, होदिय्याह, कलीता, पलायाह, हानान,

11मीका, रहोब, हशब्याह,

12जक्कूर, शेरेब्याह, शबन्याह।

13होदिय्याह, बानी और बनीनू,

14फिर प्रजा के प्रधान ये थे: परोश, पहतमोआब, एलाम, जत्तू, बानी,

15बुनी, अजगाद, बेबै,

16अदोनिय्या, बिग्वै, आदीन,

17आतेर, हिजकिय्याह, अज्जूर,

18होदिय्याह, हाशूम, बेसै,

19हारीफ, अनातोत, नेबै,

20मग्पीआश, मशुल्लाम, हेजीर,

21मशेजबेल, सादोक, यद्दू

22पलत्याह, हानान, अनायाह,

23होशे, हनन्याह, हश्शूब,

24हल्लोहेश, पिल्हा, शोबेक,

25रहूम, हशब्ना, माशेयाह,

26अहिय्याह, हानान, आनान,

27मल्लूक, हारीम और बाना।

28अब शेष लोग अर्थात् याजक, लेवीय, द्वारपाल, गवैये और मन्दिर के सेवक, और जिन्होंने परमेश्वर की व्यवस्था मानने के लिए अपने आपको देश-देश के लोगों से अलग कर लिया था, उन सब ने अपनी पत्नियों, और उन सब पुत्रों-पुत्रियों समेत जो समझ और ज्ञान रखते थे,

29अपने भाइयों और कुलीनों के साथ मिलकर अपने आपको इस शाप और शपथ के अधीन किया कि हम परमेश्वर की व्यवस्था पर चलेंगे जो परमेश्वर के दास मूसा के द्वारा दी गई और अपने प्रभु यहोवा की सब आज्ञाएं नियम और विधियां मानेंगे और उन पर चलेंगे।

30और न तो हम इस देश के लोगों को अपनी पुत्रियां विवाह में देंगे और न उनकी पुत्रियों को अपने पुत्रों के लिए विवाह में लेंगे।

31जब इस देश के विजातीय विश्रामदिन को अनाज तथा अन्य वस्तुएं बिक्री के लिए लाएंगे तब हम उनसे न तो विश्रामदिन को और न किसी पवित्र दिन को कुछ मोल लेंगे, सातवें वर्ष में भूमि से उपज न लेंगे और अपने ट्टण वसूल नहीं करेंगे।

32हमने अपने लिए ऐसा नियम ठहराया है कि अपने परमेश्वर के भवन में सेवा के लिए प्रतिवर्ष एक तिहाई शेकेल दिया करेंगें,

33अर्थात् भेंट की रोटी, नित्य अन्नबलि, नित्य होमबलि, विश्राम-दिन, नए चांद और नित्य पर्वों के बलिदानों, पवित्र भेंटों और इस्राएल के प्रायश्चित के निमित्त पापबलियों के लिए और हमारे परमेश्वर के भवन के समस्त कार्य के लिए।

34इसी प्रकार हमने अर्थात् याजकों, लेवियों और लोगों ने लकड़ी पहुंचाने के लिए चिट्ठियां डालीं जिससे अपने परमेश्वर के भवन में पूर्वजों के घरानों के अनुसार प्रतिवर्ष नियुक्त समयों पर, अपने परमेश्वर की वेदी पर जलानेे के लिए लकड़ी पहुंचाएं, जैसा कि व्यवस्था में लिखा है।

35हम प्रतिवर्ष अपनी भूमि की पहली उपज और सब प्रकार के वृक्षों के फलों में से पहले फल भी परमेश्वर के भवन में लाया करें,

36और जैसा व्यवस्था में लिखा है अपने परमेश्वर के भवन में अपने पहलौठे पुत्रों और पशुओं के अर्थात् पहलौठे बछड़े और मेमने उन याजकों के लिए लाया करेंगे जो हमारे परमेश्वर यहोवा के भवन में सेवा-टहल करते हैं,

37हम अपना पहला गूंधा हुआ आटा, उठाई हुई भेंटें, सब प्रकार के वृक्षों के फल, नया दाखमधु और तेल अपने परमेश्वर के भवन की कोठरियों में याजकों के पास और अपने खेत की उपज का दशमांश लेवियों के पास लाया करेंगे क्योंकि खेती के हमारे सब नगरों में लेवी दशमांश लेते है।

38और जब लेवी दशमांश लें, तो कोई याजक जो हारून की सन्तान हो लेवियों के संग रहे और लेवीय दशमांशों का दशमांश हमारे परमेश्वर के भवन की कोठरियों में पहुंचाया करेंगे।

39क्योंकि इस्राएली और लेवीय अनाज, दाखमधु, और तेल की उठाई हुई भेंट, उन कोठरियों में लाया करेंगे जहां पवित्र-स्थान के पात्र, सेवा करने वाले याजक, द्वारपाल और गवैये रहते हैं, इस प्रकार हम अपने परमेश्वर यहोवा के भवन को नहीं छोड़ेंगे।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)