पुराना नियम · नहेमायाह · अध्याय 4 / 13
नहेमायाह 4
1जब सम्बल्लत ने हमारे विषय में सुना कि वे लोग शहरपनाह का पुनर्निर्माण कर रहे हैं तो वह आग-बबूला हो गया और यहूदियों का ठट्ठा करने लगा।
2उसने अपने भाइयों और सामरिया के धनाढ्य लोगों के समक्ष यह कहा, “ये निर्बल यहूदी क्या कर रहे हैं? क्या वे उसको अपने आप ही फिर से बना लेंगे? क्या वे बलिदान चढ़ा पाएंगे? क्या वे एक ही दिन में काम पूरा कर लेंगे? क्या वे मिट्टी के ढेर के इन जले हुए पत्थरों को भी फिर नए बनाएंगें?”
3उसके निकट ही अम्मोनी तोबियाह था। उसने कहा, “जो कुछ वे बना रहे है, यदि कोई गीदड़ भी उस पर चढ़े तो वह उनकी पत्थर की शहरपनाह को तोड़ डालेगा।”
4“हे हमारे परमेश्वर, सुन ले कि हमारा कैसा तिरस्कार हो रहा है। उनके द्वारा किए गए अपमान को उन्हीं के सिर लौटा दे, और उन्हें बन्धुवाई के देश में लुटवा दे।
5उनका अधर्म क्षमा न कर और न उनका पाप तेरे सामने से मिटाया जाए क्योंकि उन्होंने शहरपनाह बनाने वालों को निरुत्साहित किया है।”
6और हम लोगों ने शहरपनाह को बनाया और सारी शहरपनाह आधी ऊंचाई तक बन गई, क्योकि लोगों ने पूरी लगन से काम किया था।
7तब ऐसा हुआ कि जब सम्बल्लत, तोबिय्याह, अरबियों, अम्मोनियों और अशदोदियों ने सुना कि यरूशलेम की शहरपनाह की मरम्मत होती जा रही है, और उसके नाके भी बन्द होने लगे हैं, तो वे बहुत क्रोधित हुए।
8तब उन सभी ने मिलकर यरूशलेम से लड़ने, और कार्य में बाधा डालने का षड्यंत्र रचा।
9परन्तु हमने अपने परमेश्वर से प्रार्थना की और उनके कारण रात-दिन पहरा लगा दिया।
10अतः यहूदा में यह कहा जाने लगा, “बोझ उठाने वालों की शक्ति क्षीण होती जा ही है, फिर भी अब तक मिट्टी बहुत पड़ी है और हम शहरपनाह का पुनर्निर्माण करने में असमर्थ है।”
11और हमारे शत्रुओं ने कहा, “जब तक हम उनके मध्य जाकर और उन्हें घात करके उनका काम बन्द न कर दें, तब तक उनको न तो कुछ मालूम होगा और न ही कुछ दिखाई देगा।”
12ऐसा हुआ कि उनके आसपास रहने वाले यहूदियों ने हमारे पास आकर हमसे दस बार कहा, “तुम चाहे जहां भी मुड़ो वे चारों ओर से हमारे विरुद्ध चढ़ आएंगे।”
13तब मैंने शहरपनाह के सबसे निचले स्थानों में पीछे अर्थात् खुले स्थानों में, लोगों को तलवारें, बर्छियां और धनुष देकर घराने-घराने के अनुसार ठहरा दिया।
14जब मैंने उनके भय को देखा तब मैं उठा और रईसों, अधिकारियों तथा अन्य लोगों से बोला, “उनसे मत डरो, प्रभु जो महान् और भययोग्य है उसी को स्मरण करो, और अपने भाइयों, बेटों, बेटियों, स्त्रियों और अपने घरों के लिए लड़ो।”
15और ऐसा हुआ कि जब हमारे शत्रुओं ने सुना कि यहूदियों को मालूम हो गया है और परमेश्वर ने उनकी योजना को निष्फल कर दिया है, तब हम सब शहरपनाह के पास अपने अपने काम पर लौट गए।
16और उस दिन से ऐसा हुआ कि मेरे आधे सेवक तो काम में लगे रहे और आधे बर्छियां, ढालें, धनुष और झिलमें धारण किए रहते थे। यहूदा के सारे घराने के पीछे सेनाध्यक्ष रहा करते थे।
17शहरपनाह का निर्माण करने वाले और बोझ ढोने वाले दोनों ही एक हाथ से तो कार्य करते थे और दूसरे हाथ से हथियार पकड़े रहते थे।
18राजमिस्त्रियों में से प्रत्येक अपनी बगल में तलवार लटकाए हुए निर्माण कार्य करता था जबकि तुरही का फूंकनेवाला मेरे पास खड़ा रहता था।
19और मैंने रईसों, अधिकारियों तथा अन्य सब लोगों से कहा, “काम तो बड़ा फैला हुआ है, और हम लोग शहरपनाह पर एक दूसरे से दूर रहते है।
20इसलिए जहां कहीं से तुरही की आवाज सुनाई दे, वहीं हमारे पास इकट्ठे हो जाना। हमारा परमेश्वर हमारी ओर से लड़ेगा।”
21इस प्रकार आधे लोग बर्छियां लिए रहे, और हम भोर से लेकर तारे निकलने तक काम में लगे रहे।
22उसी समय मैंने लोगों से यह भी कहा, “प्रत्येक मनुष्य अपने दास के साथ यरूशलेम के भीतर रात व्यतीत करे जिससे लोग रात्रि को हमारे लिए पहरा दें और दिन को काम में लगे रहे।
23इस प्रकार न तो मैं, न मेरे भाई, न मेरे सेवक, न वे रक्षक जो मेरे पीछे चलते थे अपने वस्त्र कभी उतारते थे, यहां तक कि पानी के लिए जाते समय भी प्रत्येक अपने हथियार लिए रहता था।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)