पुराना नियम · नहेमायाह · अध्याय 6 / 13
नहेमायाह 6
1जब सम्बल्लत, तोबिय्याह, अरबी गेशेम तथा हमारे अन्य सब शत्रुओं को मेरे विषय में यह समाचार मिला कि मैंने शहरपनाह का पुनर्निर्माण कर लिया है और उसमें अब कोई दरार नहीं रह गई है, यघपि उस समय तक मैंने फाटकों में दरवाजे नहीं लगाए थे,
2तो सम्बल्लत और गेशेम ने मेरे पास यह संदेश भेजा, “आ, हम ओनो के मैदान के किसी गांव में एक दूसरे से भेंट करे।” परन्तु उन्होंने मेरी हानि करने की ठानी थी।
3इसलिए मैंने संदेशवाहकों को उनके पास यह कहने भेजा, “मैं एक महान् कार्य में लगा हूं और मैं नहीं आ सकता। मेरे इस कार्य को छोड़कर तुम्हारे पास आने से वह कार्य बन्द क्यों हो जाए?”
4और उन्होंने चार बार मेरे पास इसी प्रकार संदेश भेजा और मैंने उनको ऐसा ही उत्तर दिया।
5तब सम्बल्लत ने अपने सेवक को खुली चिट्ठी देकर पांचवी बार मेरे पास भेजा।
6उसमें लिखा था, “जाति-जाति के लोगों में यह कहा जाता है और गेशेम भी कहता है, कि तूने और यहूदी लोगों ने विद्रोह करने की ठानी है, इसलिए तुम शहरपनाह का पुनर्निर्माण कर रहे हो। और इन समाचारों के अनुसार तू उनका राजा बनना चाहता है।
7और तुमने यह प्रचार करने के लिए कि यहूदा में एक राजा है, यरूशलेम में भविष्यद्वक्ता नियुक्त किए है। अब इन समाचारों के अनुसार राजा को समाचार दिया जाएगा। इसलिए आ, हम आपस में सम्मति करे।”
8तब मैंने उसके पास कहला भेजा, “जैसा तू कह रहा है वैसा तो कुछ भी नहीं हुआ, परन्तु तू इन बातों को अपने ही मन से गढ़ता है।”
9वे सब यह सोचकर हमको डराने का प्रयत्न कर रहे थे कि ये कार्य करने में ढीले पड़ जाएं और कार्य बन्द हो जाए। परन्तु हे परमेश्वर, अब मेरे हाथों को ढृढ़ कर।
10मैंने दलायाह के पुत्र और महेतबेल के पोते शमायाह के घर में प्रवेश किया। वह तो घर में बन्द था। उसने कहा, “आ, हम परमेश्वर के भवन अर्थात् मन्दिर में भेंट करें और मन्दिर के द्वार बन्द करें, क्योंकि वे तुझे घात करने आ रहे है। वे रात में ही तुझे घात करने आएंगे।”
11परन्तु मैंने कहा, “क्या मुझ जैसा मनुष्य भागे? और क्या ऐसा मनुष्य अपना प्राण बचाने को मन्दिर में घुसे? मैं भीतर नहीं जाऊंगा।”
12तब मैं समझ गया कि निश्चय, परमेश्वर ने उसे नहीं भेजा है। परन्तु उसने अपनी नबूवत मेरे विरुद्ध इसलिए की थी कि सम्बल्लत तोबिय्याह ने उसे रुपया दे रखा था।
13उन्होंने उसे इस कारण रुपया दिया था कि मैं डर के कारण ऐसा कार्य करूं और पापी ठहरूं जिससे कि उनको दोष लगाने का अवसर मिले और वे मेरी निन्दा कर सके।
14हे मेरे परमेश्वर, तोबिय्याह सम्बल्लत, और नोअघाह नबिया तथा अन्य भविष्यद्वक्ताओं को, जो मुझे डराना चाहते थे, उनके कार्यों के अनुसार उन्हें स्मरण रख।
15एलूल महीने के पच्चीसवें दिन को अर्थात् बावन दिन में शहरपनाह बन गई।
16और ऐसा हुआ कि जब हमारे सब शत्रुओं ने यह सुना और हमारे चारों ओर रहने वाली सब अन्यजातियों ने शहरपनाह को देखा, तो उनका हियाव टूट गया, क्योंकि उन्होंने जान लिया कि यह कार्य इनके परमेश्वर की ओर से ही हुआ है।
17उन दिनों में यहूदा के अधिकारियों ने तोबिय्याह को, और तोबिय्याह ने उनको कई पत्र भेजे।
18अनेक यहूदियों ने उसका साथ देने के लिए शपथ खाई थी, क्योंकि वह आरह के पुत्र शकन्याह का दामाद था और उसके पुत्र यहोहानान ने बेरेक्याह के पुत्र मशुल्लाम की पुत्री को ब्याह लिया था।
19और वे मेरे सामने उसके भले कार्यों का वर्णन किया करते और मेरी बातें भी उसे सुनाया करते थे। तब तोबिय्याह ने मुझे डराने के लिए पत्र भेजे।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)