पुराना नियम · गिनती · अध्याय 12 / 36
गिनती 12
1मूसा ने एक कूशी स्त्री से विवाह कर लिया। अतः मरियम और हारून, मूसा की निन्दा करने लगे क्योंकि उसने उस कूशी स्त्री से विवाह कर लिया था।
2उन्होंने कहा, “क्या यहोवा ने केवल मूसा ही के द्वारा बातें की हैं? क्या उसने हमारे द्वारा भी बातें नहीं की?” और यहोवा ने यह बात सुनी।
3मूसा तो पृथ्वी भर के निवासियों में सबसे अधिक नम्र था।
4और यहोवा ने मूसा, हारून और मरियम से एकाएक कहा, “तुम तीनों मिलापवाले तम्बू के पास निकल आओ।” अतः तीनों निकल आए।
5तब यहोवा बादल के खम्भे में उतर आया, और उसने तम्बू के द्वार पर खड़े होकर हारून और मरियम को बुलाया। जब वे दोनों सामने गए,
6तब उसने कहा, “मेरी बातें सुनो; यदि तुम में कोई नबी हो तो मैं यहोवा अपने आपको उस पर दर्शन के द्वारा प्रकट किया करता हूं; मैं उससे स्वप्न में बात करता हू।
7परन्तु मेरे दास मूसा के साथ ऐसा नहीं है। वह तो मेरे पूरे घराने में विश्वसनीय है।
8मैं उससे आमने-सामने, प्रत्यक्ष रूप में बातें करता हूं; गुप्त रूप से नही। वह यहोवा का रूप भी निहारते पाता है। तब तुम मेरे दास मूसा की निन्दा करते समय क्यों नहीं डरे?”
9अतः यहोवा का क्रोध उन पर भड़का, और वह चला गया।
10जब बादल तम्बू के ऊपर से उठ गया तब मरियम कोढ़ से हिम के समान श्वेत हो गई। और हारून ने मरियम की ओर फिरकर देखा कि वह कोढ़ी हो गई है।
11तब हारून ने मूसा से कहा, “हे मेरे स्वामी, हमने मूर्खता की है, वरन् पाप भी किया है। कृपया इस पाप का लेखा हमसे न ले।
12उसको उस मृतक के समान न रहने दे जिसकी देह मां के गर्भ से निकलते ही अर्ध-गली हो!”
13तब मूसा ने यहोवा की दुहाई दी, “हे परमेश्वर, कृपा करके उसे चंगा कर!”
14परन्तु यहोवा ने मूसा से कहा, “यदि उसके पिता ने उसके मुंह पर थूका होता तो क्या वह सात दिन तक लज्जित नहीं रहती? अतः वह सात दिनों तक छावनी के बाहर बन्द रखी जाए, और उसके बाद ही फिर ग्रहण की जाए।
15इसलिए मरियम छावनी के बाहर सात दिन तक बन्द रखी गई, तथा जब तक वह पुनः ग्रहण नहीं की गई तब तक प्रजा ने प्रस्थान नहीं किया।
16इसके बाद प्रजा ने हसेरोत से प्रस्थान किया, और पारान के जंगल में डेरे डाले।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)