पुराना नियम · गिनती · अध्याय 13 / 36
गिनती 13
1तब यहोवा ने मूसा से कहा,
2“कनान देश जिसे मैं इस्राएलियों को देने वाला हूं उसका भेद लेने के लिए पुरुषों को भेज। पूर्वजों के गोत्रों में से एक-एक ऐसे पुरुष को भेज जो उनमें अगुवे हो।”
3अतः मूसा ने यहोवा की आज्ञा के अनुसार पारान के जंगल से सब ऐसे पुरुषों को भेजा जो इस्राएलियों के प्रमुख थे।
4उनके नाम ये हैं: रूबेन के गोत्र से जक्कूर का पुत्र शम्मू,
5शमौन के गोत्र से होरी का पुत्र शापात,
6यहूदा के गोत्र से यपुन्ने का पुत्र कालेब,
7इस्साकार के गोत्र से योसेप का पुत्र यिगाल,
8एप्रैम के गोत्र से नून का पुत्र होशे,
9बिन्यामीन के गोत्र से रापू का पुत्र पलती,
10जबूलून के गोत्र से सोदी का पुत्र गद्दीएल,
11यूसुफ-वंशियों में मनश्शे के गोत्र से सूसी का पुत्र गद्दी,
12दान के गोत्र से गमल्ली का पुत्र अम्मीएल,
13आशेर के गोत्र से मीकाएल का पुत्र सतूर,
14नप्ताली के गोत्र से वोप्सी का पुत्र नहबी,
15गाद के गोत्र से माकी का पुत्र गुएल।
16जिन पुरुषों को मूसा ने देश का भेद लेने भेजा था उनके नाम ये ही हैं, परन्तु मूसा ने नून के पुत्र होशे का नाम यहोशू रखा।
17जब मूसा ने उनको कनान देश का भेद लेने भेजा उस समय उनसे कहा, “इधर नेगेव से होते हुए पहाड़ी देश में जाओ,
18और देखो कि देश कैसा है, उसमें निवास करने वाले बलवान हैं या निर्बल, थोड़े हैं या अधिक।
19फिर जिस देश में वे रहते हैं वह अच्छा है या बुरा? उनके नगर कैसे हैं-वे खुले मैदान में तम्बुओं में रहते हैं अथवा परकोटा-बन्द किलों में?
20और वहां की भूमि कैसी है, उपजाऊ है या बंजर? उसमें वृक्ष हैं या नहीं? यत्न करके उस देश के कुछ फल भी साथ लेते आना।” यह अंगूर के पहले फल का समय था।
21अतः वे निकल गए, और सीन नामक जंगल से लेकर लेबो-हमात के पास रहोब तक के देश का भेद लिया।
22इसके बाद वे नेगेव होते हुए हेब्रोन पहुँचे जहां अनाक की सन्तान अहीमन, शेशै और तल्मै रहते थे। हेब्रोन तो मिस्र के सोअन से सात वर्ष पूर्व बसाया गया था।
23फिर वे एश्कोल की तराई में पहुंचे, और वहां से अंगूर की एक डाली काट ली जिसमें एक बड़ा गुच्छा था जिसे दो पुरुष लाठी पर लटका कर ले गए। साथ ही वे कुछ अनार और अंजीर भी ले गए।
24इस्राएल जो गुच्छा काट कर वहां से ले गए उसी के कारण उस स्थान का नाम एश्कोल की तराई पड़ा
25जब वे उस देश का भेद लेकर चालीस दिन के बाद लौटे
26तब वे पारान जंगल के कादेश नामक स्थान में मूसा, हारून और इस्राएलियों की सम्पूर्ण मंडली के सामने पहुंचे, और उनको और सारी मंडली को समाचार सुनाया, तथा उस देश के फल दिखाए।
27उन्होंने उससे कहाः “जिस देश में तूने हमें भेजा उस देश में हम गए। वहां सचमुच दूध और मधु की धारा बहती है, और यह वहां की उपज है।
28फिर भी, उस देश के निवासी बलवान हैं तथा उसके नगर बड़े-बड़े और गढ़ वाले है। फिर हमने वहां अनाक-वंशियों को भी देखा है।
29नेगेव में तो अमालेकी बसे हुए हैं, तथा पहाड़ी देश में हित्ती, यबूसी और एमोरी रहते है। और समुद्र के किनारे-किनारे यरदन नदी के तट पर कनानी भी बसे हुए है।
30तब कालेब ने मूसा के सामने लोगों को चुप कराया, और कहा, “हम तुरन्त चढ़कर उसे अपने अधिकार में कर लें क्योंकि हम अवश्य विजयी होंगे।”
31परन्तु जो पुरुष उसके साथ गए थे उन्होंने कहा, “हम उन पर चढ़ाई नहीं कर सकते, क्याेंकि वे हमसे अधिक बलवान है।”
32अतः जिस देश का भेद लेने वे गए थे उसका उन्होंने यह कह कर भयावह चित्र प्रस्तुत किया, “भेद लेने के लिए हम जिस देश में गए वह ऐसा देश है जो अपने ही निवासियों को निगल जाता है, तथा जितने मनुष्य हमने वहां देखे वे सब बड़े डील-डौल के थे।
33फिर हमने वहां नपीली लोगों को भी देखा-अनाकवंशी तो नपीलियों में से हैं-हम तो अपनी दृष्टि में उनके सामने टिडिóयों के समान लगते थे, और उनकी दृष्टि में भी ऐसे ही लगते थे।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)