Loading account

पुराना नियम · गिनती · अध्याय 14 / 36

गिनती 14

1तब सारी मंडली के लोग रो रोकर चिल्ला उठे और रात भर रोते रहे।

2सब इस्राएल मूसा और हारून के विरुद्ध कुड़कुड़ाने लगे। सम्पूर्ण मंडली ने उनसे कहा, “काश, हम मिस्र में या इस जंगल में ही मर जाते!

3यहोवा हमको उस देश में ले जाकर तलवार से क्यों मरवाना चाहता है? हमारी पत्नियां और बाल-बच्चे तो लूट में चले जाएंगे। क्या यह अच्छा नहीं कि हम मिस्र देश को लौट जाएं?”

4अतः वे आपस में कहने लगे, “आओ, हम अपने लिए अगुवा नियुक्त करें और मिस्र को लौट चले।”

5तब मूसा और हारून इस्राएलियों की सारी मंडली के सामने मुंह के बल गिरे।

6और जो लोग उस देश का भेद लेने गए थे उनमें से नून के पुत्र यहोशू तथा यपुन्ने के पुत्र कालेब ने अपने-अपने वस्त्र फाड़ डाले;

7और इस्राएलियों की सम्पूर्ण मंडली से कहा, “जिस देश का भेद लेने को हमने भ्रमण किया था वह अत्यधिक मनोहर देश है।

8यदि यहोवा हमसे प्रसन्न है तो वह हमें उस देश में पहुंचाकर उसे दे भी देगा। उस देश में तो दूध और मधु की धाराएं बहती है।

9बस, यहोवा से विद्रोह मत करो, तथा उस देश के लोगों से मत डरो क्योंकि वे हमारा आहार ठहरेंगे। छाया उनके सिर पर से उठा ली गई है, तथा यहोवा हमारे साथ है। उनसे मत डरो।”

10परन्तु सम्पूर्ण मंडली चिल्ला उठी कि इनका पथराव करो। इसी समय सब इस्राएलियों को मिलापवाले तम्बू में यहोवा का तेज दिखाई दिया।

11तब यहोवा ने मूसा से कहा, “यह प्रजा मेरा तिरस्कार कब तक करती रहेगी? और जितने चिह्न मैंने इन लोगों के बीच दिखाए हैं उन सबको देखकर भी ये कब तक मुझ पर विश्वास नहीं करेंगे?

12मैं उनको मरी से मारूंगा, और मीरास से वंचित कर दूंगा। और तुझसे एक ऐसी जाति उत्पन्न करूंगा जो उनसे बड़ी और सामर्थी होगी।

13परन्तु मूसा ने यहोवा से कहा, “तब तो मिस्री इसके विषय में सुनेंगे क्योंकि तू इस प्रजा को अपने सामर्थ्य के द्वारा उनके बीच से निकाल लाया।

14फिर वे इस देश के निवासियों को इसके विषय में बताएेंगे। हे यहोवा, उन्होंने तो पहले सुना है कि तू इन लोगों के मध्य रहता है क्योंकि हे यहोवा, तेरा बादल उनके ऊपर ठहरता और तू उनको प्रत्यक्ष दिखाई देता है, और दिन को बादल के खम्भे में तथा रात को अग्नि के खम्भे में होकर इनके आगे-आगे चलता है।

15अब यदि तू इन सब लोगों को एक ही बार में मार डाले तो जिन जातियों ने तेरी कीर्ति सुनी है वे कहेंगी,

16‘इसलिए कि यहोवा इन लोगों को उस देश में नहीं पहुंचा सका जिसकी प्रतिज्ञा उसनेे शपथ खाकर की थी, उसने जंगल में उनका सत्यानाश कर दिया।’

17परन्तु अब हे प्रभु, अपनी सामर्थ को महान् बनाए रख जैसा तूने कहा हैः

18‘यहोवा क्रोध करने में धीमा और करुणा से भरपूर है, वह अधर्म और अपराध का क्षमा करनेवाला है; परन्तु वह दोषी को किसी प्रकार निर्दोष नहीं ठहराएगा, और पूर्वजों के अधर्म का दण्ड तीसरी और चौथी पीढ़ियों तक देता रहता है’

19कृपा करके तू इन लोगों का अधर्म अपनी अपार करुणा के अनुसार जैसा मिस्र से क्षमा करता आया है, वैसा ही अब भी क्षमा कर।”

20तब यहोवा ने कहा, “तेरी विनती के अनुसार मैंने उनको क्षमा किया है।

21फिर भी मेरे जीवन की शपथ, सारी पृथ्वी यहोवा की महिमा से सचमुच परिपूर्ण हो जाएगी।

22जितने लोगों ने मेरी महिमा देखी और मिस्र में तथा जंगल में मेरे चिह्न देखे और फिर भी इन दसों बार मेरी परीक्षा की, और मेरी बातें नहीं मानीं

23निश्चय ही, वे लोग उस देश को कभी देखने नहीं पाएंगे जसकी शपथ मैंने उनके पूर्वजों से खाई थी। और जितनों ने मेरा अपमान किया है उनमें से कोई भी उसे देखने नहीं पाएगा।

24परन्तु इसलिए कि मेरे दास कालेब में भिन्न आत्मा है, और उसने पूरी रीति से मेरा अनुकरण किया है, मैं उसे उस देश में पहुंचाऊंगा जहां उसने प्रवेश किया था। उसका वंश उस देश का अधिकारी होगा।

25अमालेकी और कनानी तो तराई में रहते है। अतः कल तुम घूमकर प्रस्थान करो और लाल समुद्र के मार्ग से जंगल में जाओ।”

26यहोवा ने मूसा और हारून से कहा,

27“यह बुरी प्रजा मेरे विरुद्ध कुड़कुड़ाती ही रहती है, मैं उसकी कब तक सहता रहूं? इस्राएल लोग तो मेरे विरुद्ध कुड़कुड़ाते ही रहते है। मैंने उनकी कुड़कुड़ाहट सुनी है।

28उनसे कह दे; यहोवा कहता है, ‘मेरे जीवन की शपथ, जो बातें तुमने मेरे सुनते कही हैं मैं निश्चय उन्हीं के अनुसार तुम्हारे साथ करूंगा।

29तुम में से बीस वर्ष या उससे अधिक आयु के जितने लोग गिने गए थे, और जो मेरे विरुद्ध कुड़कुड़ाते थे उनके शव इसी जंगल में पड़े रहेंगे।

30यपुन्ने के पुत्र कालेब तथा नून के पुत्र यहोशू के सिवाय तुम में से कोई उस देश में जाने नहीं पाएगा जिसके विषय में मैंने शपथ खाई है कि तुमको उसमें बसाऊंगा।

31परन्तु तुमने अपने जिन बाल-बच्चों के विषय में कहा कि वे लूट में चले जाएंगे उनको मैं उस देश में पहुंचाऊंगा। जिस देश को तुमने तुच्छ जाना उसी को वे जान लेंगे।

32परन्तु तुम्हारे शव तो इसी जंगल में पड़े रहेंगे।

33तुम्हारे बाल-बच्चे जंगल में चालीस वर्ष तक चरवाही करते फिरेंगे, तथा तुम्हारे व्यभिचार का फल तब तक भोगते रहेंगे जब तक तुम्हारे शव गलकर मिट्टी में न मिल जाए।

34जितने दिन तुम उस देश का भेद लेते रहे, अर्थात् चालीस दिन, उतने दिनों की गिनती के अनुसार, दिन-पीछे एक वर्ष के हिसाब से अर्थात् चालीस वर्षों तक तुम अपने अधर्मों का दण्ड भोगते रहोगे। तब तुम मेरे विरुद्ध हो जाने का अर्थ समझोगे।

35मैं यहोवा कह चुका हूं कि मैं इस बुरी प्रजा से, जो मेरे विरुद्ध संगठित हो गई है, निश्चय ऐसा ही करूंगा। उनका सर्वनाश इसी जंगल में होगा, और वे यहीं मर मिटेंगे।’।”

36जिन पुरुषों को मूसा ने देश का भेद लेने के लिए भेजा था और जिन्होंने लौटकर उस देश के विषय में ऐसा भयावह चित्र प्रस्तुत किया था कि सम्पूर्ण प्रजा उसके विरुद्ध कुड़कुड़ाने लगी,

37हां, वे ही पुरुष जिन्होंने उस देश का भयावह चित्र प्रस्तुत किया था, यहोवा के सामने ही महामारी से मर गए।

38परन्तु जितने पुरुष देश का भेद लेने गए थे उनमें से नून का पुत्र यहोशू तथा यपुन्ने का पुत्र कालेब दोनों जीवित बचे रहे।

39जब मूसा ने सब इस्राएलियों से ये बातें कह सुनाईं तब वे अत्यधिक विलाप करने लगे।

40प्रातःकाल वे जल्दी उठे और यह कहते हुए पर्वतीय प्रदेश की एक पहाड़ी पर चढ़ने लगे कि देखो हम आ गए। हमने सचमुच पाप तो किया था परन्तु जब हम उस स्थान को जाने के लिए तैयार हैं जिसके विषय में यहोवा ने प्रतिज्ञा की है।

41परन्तु मूसा ने कहा, “तुम क्यों यहोवा की आज्ञा का उल्लंघन कर रहे हो? यह प्रयास सफल नहीं हो सकता।

42मत चढ़ो ऐसा न हो कि शत्रुओं के द्वारा मार गिराए जाओ क्योंकि यहोवा तुम्हारे मध्य नहीं है।

43वहां अमालेकी और कनानी तुम्हारे सामने हाेंगे। अतः तुम तलवार से मारे जाओगे क्योंकि तुमने यहोवा के पीछे चलना छोड़ दिया है, और वह तुम्हारे साथ नहीं रहेगा।”

44परन्तु वे अनसुनी करके उसी पहाड़ की चोटी की ओर चढ़ते चले गए। परन्तु यहोवा की वाचा का सन्दूक और मूसा छावनी से न हटे।

45तब उस पहाड़ी क्षेत्र में रहने वाले अमालेकियों और कनानियों ने उतर कर उन पर आक्रमण किया और होर्मा तक उन्हें मारते चले गए।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)