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पुराना नियम · गिनती · अध्याय 15 / 36

गिनती 15

1फिर यहोवा ने मूसा से कहा,

2“इस्राएलियों से कह, ‘जब तुम उस देश में प्रवेश करो जो मैं तुम्हें निवास करने के लिए देता हूं,

3तब तुम यहोवा के लिए सुखदायक सुगन्ध हेतु गाय-बैल या भेड़-बकरियों में से अग्निबलि चढ़ाओ, चाहे वह होम-बलि हो, चाहे विशेष मन्नत पूरी करने की बलि हो, चाहे स्वेच्छा-बलि हो अथवा तुम्हारे निर्धारित समयों की हो।

4और जो भेंट चढ़ाए वह यहोवा के लिए एक चौथाई हीन तेल से सने हुए एपा का दसवां अंश मैदा अन्नबलि करके चढ़ाए,

5और अर्घ के लिए एक चौथाई हीन दाखमधु अपने होमबलि या मेलबलि के प्रत्येक मेमने के साथ तैयार करे।

6या एक मेढ़े के पीछे एपा का दो दसवां अंश मैदा जो एक तिहाई हीन तेल से सना हुआ हो, अन्नबलि के लिए तैयार करना।

7और यहोवा के लिए सुखदायक सुगन्ध हेतु एक तिहाई हीन दाख-मधु का अर्घ चढ़ाना।

8और जब तुम होमबलि या किसी विशेष मन्नत को पूरी करने के लिए बलि या मेलबलि करके बछड़े को यहोवा के लिए चढ़ाओ,

9तब तुम बछड़े के साथ आधा हीन तेल से सना हुआ एपा का तीन दसवां भाग मैदा अन्नबलि करके चढ़ाना।

10और यहोवा के लिए सुखदायक सुगन्ध हेतु आधा हीन दाखमधु का अर्घ चढ़ाना। वह अग्निबलि हो।

11‘प्रत्येक बछड़े, और प्रत्येक मेढ़े और प्रत्येक मेमने और प्रत्येक बकरे के साथ ऐसा ही किया जाए।

12गिनती के अनुसार हर एक के साथ ऐसा ही करना।

13सब जाति-भाई, इसी रीति से यहोवा को सुखदायक सुगन्ध देनेवाला अग्निबलि चढ़ाया करे।

14और यदि तुम्हारे मध्य कोई परदेशी रहता हो, या कोई ऐसा व्यक्ति हो जो पीढ़ियों से तुम्हारे संग हो और वह यहोवा को सुखदायक सुगन्ध देनेवाली अग्निबलि चढ़ाना चाहे तो जैसा तुम करते हो वैसा ही वह भी करे।

15इस्राएल प्रजा के लिए अर्थात् तुम्हारे और उस परदेशी के लिए जो तुम्हारे संग रहता है, एक ही विधान होगा यह तुम्हारी पीढ़ी से पीढ़ी तक अनन्तकाल के लिए विधि ठहरे, यहोवा के सम्मुख जैसा तुम हो वैसा ही परदेशी भी हो।

16तुम्हारे साथ रहने वाले परदेशी के लिए एक ही व्यवस्था और एक ही नियम हो’।”

17तब यहोवा ने मूसा से कहा,

18“इस्राएलियों से यह कहः जब तुम उस देश में प्रवेश करो जहां मैं तुम्हें लिए जाता हूं,

19और उस देश की रोटी खाओ, तब यहोवा के लिए उठाई हुई भेंट चढ़ाना।

20अपने पहले गुंधे हुए आटे की एक रोटी उठाने की भेंट के रूप में चढ़ाना। खलिहान की उठाई हुई भेंट के समान इसे चढ़ाना।

21अपने पहले गुंधे हुए आटे में से यहोवा के लिए उठाई हुई भेंट पीढ़ी से पीढ़ी तक चढ़ाया करना।

22“और यदि तुमसे भूल हो जाए और तुम उन सब आज्ञाओं को न मानो जो यहोवा ने मूसा को दीं,

23अर्थात् उन सब आज्ञाओं को जिन्हें यहोवा आरम्भ से तुम्हें पीढ़ी-दर-पीढ़ी मूसा के द्वारा देता रहा,

24तब यदि अनजाने में भूल हो जाए और मंडली को इसका ज्ञान न हो तो पूरी मंडली एक बछड़ा यहोवा के लिए सुखदायक सुगन्ध देने वाला होमबलि करके चढ़ाए और नियमानुसार उसके साथ अन्नबलि और उसका अर्घ अर्पित करे और एक बकरा पापबलि करके चढ़ाए।

25तब याजक समस्त इस्राएल की मंडली के लिए प्रायश्चित्त करे, और उनके पाप क्षमा किए जाएंगे; क्योंकि यह भूल थी और इस भूल के लिए उन्होंने अपनी भेंट अर्थात् यहोवा के लिए अग्निबलि और पाप-बलि उसके सम्मुख चढ़ाए।

26इस प्रकार इस्राएल की सारी मंडली को और उस परदेशी को भी जो उनमें रहता है क्षमा किया जाएगा, क्योंकि यह बात सब लोगों के साथ भूल से हुई।

27“यह भी कि यदि कोई व्यक्ति अनजाने में पाप करे, तो वह एक वर्ष की बकरी पापबलि करके चढ़ाए।

28और अनजाने में पाप करने वाले व्यक्ति के लिए यहोवा के सम्मुख याजक प्रायश्चित्त करे। वह उसके लिए प्रायश्चित्त करे कि उसका पाप क्षमा किया जाए।

29जो कोई अनजाने में पाप करे चाहे वह स्वजातीय इस्राएल हो अथवा परदेशी जो तुम्हारे संग रहता हो, सबके लिए तुम्हारी एक ही व्यवस्था हो।

30परन्तु जानबूझ कर आज्ञा उल्लंघन करने वाला, चाहे वह स्वजातीय हो अथवा परदेशी, वह यहोवा की निन्दा करता है; ऐसे व्यक्ति को अपने लोगों के मध्य से नष्ट कर दिया जाए।

31इसलिए कि उसने यहोवा के वचन का तिरस्कार और उसकी आज्ञा का उल्लंघन किया है, ऐसा व्यक्ति पूर्णतः नष्ट कर दिया जाए, उसका दण्ड उसी के सिर पर हो।”

32जब इस्राएल जंगल में रहते थे, एक पुरुष उनको विश्राम के दिन लकड़ी बीनते हुए मिला।

33और जिनको वह लकड़ी बीनतेे हुए मिला वे उसे मूसा और हारून और मंडली के सामने ले आए।

34उन्होंने उसे हिरासत में रखा क्योंकि यह नहीं बताया गया था कि ऐसे व्यक्ति के साथ क्या करना चाहिए।

35तब यहोवा ने मूसा से कहा, “वह मनुष्य निश्चय मार डाला जाए, छावनी के बाहर पूरी मंडली उसका पथराव करे।”

36अतः जैसे कि यहोवा ने मूसा को आज्ञा दी थी, सारी मंडली ने उसे छावनी के बाहर लाकर उसका पथराव किया और उसे मार डाला।

37फिर यहोवा ने मूसा से कहा,

38“इस्राएलियों को समझा कर कह दे कि वे अपनी पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपने वस्त्रों के छोर पर झालर लगाएं और एक-एक छोर की झालर पर एक नीला फीता लगाए।

39यह झालर इसलिए हो कि इसे देखकर तुम यहोवा की सब आज्ञाओं का स्मरण करके उनका पालन करो और अपने मन और अपनी आंखों की लालसाओं के वश में होकर वेश्या के सदृश व्यवहार करते न रहो,

40परन्तु तुम मेरी सब आज्ञाओं को स्मरण करके उनका पालन करो और अपने परमेश्वर के लिए पवित्र ठहरो।

41मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं जो तुमको मिस्र देश से निकाल ले आया ताकि तुम्हारा परमेश्वर ठहरूं, मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हू।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)